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एमसीबी@ मेडिकल कॉलेज पर सियासत गरम

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  • क्या सचमुच अटक गया मनेंद्रगढ़ का सपना,या एनएमसी की सामान्य प्रक्रिया को बनाया जा रहा है राजनीतिक हथियार?
  • मेडिकल कॉलेज पर सियासत तेज, एनएमसी की आपत्तियों के बीच उम्मीदें बरकरार,आरोप-प्रत्यारोप जारी
  • मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज पर घमासान,विपक्ष ने बताया विफलता, सरकार बोली…यह सामान्य प्रक्रिया
  • क्या अटक गया मेडिकल कॉलेज का सपना? एनएमसी की आपत्तियों पर आमने-सामने सत्ता और विपक्ष?
  • 220 बिस्तरों का अस्पताल तैयार, निर्माण जारी फिर क्यों उठ रहे मेडिकल कॉलेज पर सवाल?
  • एनएमसी की कमियों पर सियासत गर्म,मेडिकल कॉलेज बंद नहीं,प्रक्रिया में है मंजूरी


-रवि सिंह-
एमसीबी12 जून 2026 (घटती-घटना)।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में मेडिकल कॉलेज को लेकर एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है,एक अखबार में प्रकाशित खबर में दावा किया गया कि छत्तीसगढ़ के पांच प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से मंजूरी नहीं मिल सकी है,खबर सामने आते ही विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता करार दिया,जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर किसी प्रकार की अंतिम रोक नहीं लगी है, इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या मेडिकल कॉलेज का सपना टूट गया है या फिर यह केवल मान्यता की प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी बाधा है, जिसे समय के साथ दूर कर लिया जाएगा?
राजनीतिक बयान और जमीनी सच्चाई…
राजनीति में अक्सर उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और कमियों को बड़ा मुद्दा बना दिया जाता है,मेडिकल कॉलेज के मामले में भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है,विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की नाकामी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है,जबकि सरकार इसे प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है,लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि मेडिकल कॉलेज के लिए निर्माण कार्य हुआ है,अस्पताल तैयार है और परियोजना अस्तित्व में है,दूसरी सच्चाई यह भी है कि एनएमसी ने कुछ कमियां बताई हैं,जिन्हें पूरा किए बिना अंतिम मंजूरी मिलना संभव नहीं होगा, यानी मामला न तो पूरी तरह विफलता का है और न ही पूर्ण सफलता का।
अब आगे क्या होगा?
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार एनएमसी द्वारा बताई गई कमियों को कितनी तेजी से दूर कर पाती है,यदि आवश्यक सुधार समय पर पूरे हो जाते हैं तो मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिलने का रास्ता साफ हो सकता है,लेकिन यदि प्रक्रिया लंबी खिंचती है तो राजनीतिक विवाद और तीखा होगा।
परियोजना अभी समाप्त नहीं,मान्यता प्रक्रिया जारी है…
मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज को लेकर फैली निराशा और राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक तथ्य सबसे महत्वपूर्ण है,यह परियोजना अभी समाप्त नहीं हुई है,मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चल चुका है,220 बिस्तरों वाला अस्पताल तैयार है और मान्यता प्रक्रिया जारी है,एनएमसी द्वारा बताई गई कमियां निश्चित रूप से गंभीर हैं,क्योंकि बिना उन्हें पूरा किए मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हो सकता,लेकिन यह भी उतना ही सच है कि देश और प्रदेश के अनेक मेडिकल कॉलेज इसी प्रकार की आपत्तियों और सुधार प्रक्रियाओं से गुजरकर ही अस्तित्व में आए हैं,इसलिए फिलहाल यह कहना कि मेडिकल कॉलेज नहीं खुलेगा,जल्दबाजी होगी,वहीं यह कहना भी उचित नहीं होगा कि सब कुछ पूरी तरह तैयार है और कोई समस्या नहीं है, अब जिले की जनता को राजनीतिक बयान नहीं,बल्कि एक ही जवाब चाहिए मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज कब शुरू होगा? यही सवाल आने वाले समय में सरकार,स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी परीक्षा बनकर खड़ा रहेगा।
जिस मेडिकल कॉलेज को लेकर वर्षों से इंतजार था…
एमसीबी जिला बनने के बाद से ही क्षेत्रवासियों की सबसे बड़ी मांगों में मेडिकल कॉलेज शामिल रहा है,जिले के लोगों को उम्मीद थी कि मेडिकल कॉलेज बनने से न केवल स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार होगा,सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ,मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लगभग 220 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल भी तैयार किया गया,अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं और मेडिकल कॉलेज परिसर के निर्माण का कार्य भी आगे बढ़ा है,यानी स्थिति यह नहीं है कि केवल कागजों में मेडिकल कॉलेज की घोषणा हुई हो,जमीनी स्तर पर अधोसंरचना निर्माण और अस्पताल संचालन का काम पहले से चल रहा है।
एनएमसी आखिर देखता क्या है?
कई लोगों को यह भ्रम है कि भवन बन गया तो मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएगा, वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है,एनएमसी किसी भी मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से पहले दर्जनों बिंदुओं की जांच करता है,इसमें अस्पताल में मरीजों की संख्या,विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, शिक्षकों की नियुक्ति,प्रयोगशालाएं,उपकरण,पुस्तकालय,छात्रावास, व्याख्यान कक्ष और अन्य सुविधाएं शामिल होती हैं,कई बार भवन पूरी तरह तैयार होने के बाद भी फैकल्टी या उपकरण संबंधी कमियां रह जाती हैं, ऐसे मामलों में एनएमसी आपत्तियां दर्ज करता है और सुधार का समय देता है,इसलिए निरीक्षण में कमियां मिलना सीधे तौर पर मेडिकल कॉलेज रद्द होने का संकेत नहीं माना जाता।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भी इसी प्रक्रिया से गुजरा था…
राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक तथ्य यह भी है कि छत्तीसगढ़ में पहले भी मेडिकल कॉलेज इसी प्रकार की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं,अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के शुरुआती दौर में भी निरीक्षण के दौरान विभिन्न आपत्तियां सामने आई थीं,कई तकनीकी और अधोसंरचनात्मक बिंदुओं पर सुधार के निर्देश दिए गए थे,बाद में कमियां दूर की गईं और कॉलेज को मान्यता प्राप्त हुई,स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि देश के अधिकांश नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभिक निरीक्षण में आपत्तियों का सामना करते हैं, इसलिए केवल आपत्तियों के आधार पर किसी परियोजना को विफल घोषित करना उचित नहीं होगा।
जनता का सवाल फिर भी जायज है…
हालांकि सरकार का पक्ष अपनी जगह है,लेकिन जनता के कुछ सवाल भी पूरी तरह उचित हैं,यदि मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया जारी थी तो यह स्पष्ट जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई? यदि कुछ कमियां शेष थीं तो कॉलेज जल्द शुरू होने के दावे क्यों किए गए? जनता जानना चाहती है कि एनएमसी ने वास्तव में कौन-कौन सी कमियां बताई हैं और उन्हें दूर करने में कितना समय लगेगा, यह पारदर्शिता सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए आवश्यक है।
सियासत के केंद्र में स्वास्थ्य का मुद्दा…
मेडिकल कॉलेज का विषय केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह सीधे तौर पर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा हुआ मामला है,मनेंद्रगढ़,चिरमिरी,भरतपुर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख करने को मजबूर होते हैं, मेडिकल कॉलेज शुरू होने से स्थानीय छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा,इसके अलावा गंभीर मरीजों को अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर और अन्य शहरों तक रेफर करने की मजबूरी भी कम हो सकती है, यही कारण है कि जनता इस परियोजना को केवल चुनावी घोषणा नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता के रूप में देख रही है।
फिर विवाद क्यों खड़ा हुआ? : पूर्व विधायक गुलाब कमरो
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब खबर सामने आई कि एनएमसी ने प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों में कुछ कमियां पाई हैं, खबर में अस्पताल और भवन संबंधी कमियों का उल्लेख किया गया,जिसके बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इसे डबल इंजन सरकार की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज के नाम पर जनता को भ्रमित किया गया,उन्होंने आरोप लगाया कि यदि तैयारियां पूरी थीं तो एनएमसी ने आपत्तियां क्यों लगाईं,कमरो ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से क्षेत्र के युवाओं और मरीजों को बड़ी उम्मीदें थीं,लेकिन सरकार उन उम्मीदों पर खरी उतरती दिखाई नहीं दे रही है।
यह कोई असामान्य घटना नहीं : प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा
भाजपा और सरकार का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि एनएमसी द्वारा बताई गई कमियां किसी भी नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होती हैं, निरीक्षण के दौरान भवन, उपकरण, फैकल्टी, प्रयोगशालाओं और अन्य सुविधाओं की जांच होती है। यदि कहीं कमी मिलती है तो उसे दूर करने का अवसर दिया जाता है,सरकार का दावा है कि जो कमियां बताई गई हैं,उन्हें दूर करने की प्रक्रिया पहले से जारी है और अंतिम मान्यता प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।


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