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खड़गवां/चिरमिरी@ वन विभाग की नाक के नीचे रेत का साम्राज्य?

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मेरो-आमाडांड-मुकुंदपुर में अवैध खनन के आरोपों से उठे बड़े सवाल….
रेत माफिया मालामाल,गरीब हितग्राही बेहाल-क्या यही है खनन नियंत्रण की हकीकत?
-राजेंद्र शर्मा-
खड़गवां/चिरमिरी 12 जून 2026 (घटती-घटना)।
एक तरफ शासन अवैध खनन पर सख्ती के दावे कर रहा है,दूसरी तरफ चिरमिरी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेरो,आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं,स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया है, आरोप हैं कि क्षेत्र में महीनों से खुलेआम रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है,लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि आखिर वह कौन-सी अदृश्य शक्ति है जो रेत से भरे वाहनों को निर्भय होकर सड़कों पर दौड़ने की अनुमति दे रही है? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है तो फिर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच इतनी नाराजगी क्यों है? बता दे की चिरमिरी वन परिक्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर उठे सवाल अब केवल अफवाह या स्थानीय चर्चा तक सीमित नहीं रह गए हैं,ग्रामीणों की शिकायतें, लगातार लग रहे आरोप और विभाग की चुप्पी इस मामले को गंभीर बना रहे हैं,आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला निष्पक्ष जांच ही कर सकती है, लेकिन जब तक जांच नहीं होती, तब तक सवाल उठते रहेंगे और लोगों के मन में यह शंका बनी रहेगी कि आखिर रेत के इस खेल में कौन-कौन शामिल है और किसके संरक्षण में यहकारोबार फल-फूल रहा है।
रेत का कारोबार या संरक्षण का खेल?-स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मेरो, आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में लंबे समय से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है,आरोप है कि नदी-नालों से रेत निकालकर प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और अन्य वाहन चिरमिरी क्षेत्र की ओर भेजे जा रहे हैं, सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरा कारोबार विभागीय निगरानी से बाहर नहीं बल्कि कथित रूप से उसकी जानकारी में चल रहा है,क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि अवैध खनन और परिवहन में लगे कुछ लोगों तथा विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों के बीच सांठगांठ होने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने जांच की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है।
गरीबों पर डंडा,माफियाओं पर चुप्पी?-ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निजी निर्माण कार्यों के लिए गिट्टी या निर्माण सामग्री ले जाने वाले छोटे वाहन चालकों को रोककर पूछताछ की जाती है,कई लोगों ने कथित रूप से अनावश्यक परेशान किए जाने की शिकायत भी की है, यहीं से विवाद और गहरा हो जाता है,ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि कुछ ट्रॉली गिट्टी लेकर जाने वाले लोगों पर इतनी सख्ती दिखाई जाती है तो फिर प्रतिदिन निकल रहे कथित रेत वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह सवाल अब गांवों की चौपालों से निकलकर प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंचने लगा है।
पर्यावरण पर भी मंडरा रहा खतरा- रेत खनन का मुद्दा केवल राजस्व या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, अनियंत्रित और अवैध खनन का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है, विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक रेत निकासी से नदी और नालों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है, जल स्तर पर असर पड़ता है, कटाव बढ़ता है और भविष्य में जल संकट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, इसीलिए खनन को नियमों और वैज्ञानिक मानकों के तहत नियंत्रित किया जाता है, लेकिन यदि आरोप सही हैं और अवैध खनन लंबे समय से जारी है, तो पर्यावरणीय नुकसान की भी जांच जरूरी होगी।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश-मेरो, आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस विषय को उठा रहे हैं,लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी,ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं विभागीय स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई, लोगों का कहना है कि यदि छोटे लोगों पर कार्रवाई हो सकती है तो बड़े स्तर पर हो रहे कथित अवैध कारोबार पर भी समान रूप से सख्ती होनी चाहिए।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल-अब पूरे मामले में कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर क्षेत्र की जनता जानना चाहती है क्या मेरो,आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में अवैध रेत खनन वास्तव में हो रहा है? यदि हो रहा है तो अब तक कितनी कार्रवाई की गई? वन परिक्षेत्र कार्यालय के सामने से गुजरने वाले वाहनों की जांच क्यों नहीं हुई? गिट्टी और निर्माण सामग्री ले जाने वाले गरीब हितग्राहियों पर सख्ती और कथित रेत कारोबारियों पर नरमी क्यों दिखाई जा रही है? क्या विभागीय अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या शासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जनता के सामने सच्चाई रखेगा?
वन विभाग का पक्ष…आप खबर प्रकाशित कर दीजिए…
अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के संबंध में पूछे जाने पर चिरमिरी वन परिक्षेत्र के रेंजर टेकाम सिंह ठाकुर ने कहा कि विभाग को यदि ऐसे मामलों की जानकारी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है,उन्होंने कहा, आप खबर प्रकाशित कर दीजिए,उसके बाद कार्रवाई की जाएगी,रेंजर का कहना है कि शिकायतों और तथ्यों के आधार पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
वन परिक्षेत्र कार्यालय के सामने से गुजरते वाहन और उठते सवाल…
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिन मार्गों से रेत का परिवहन हो रहा है,वे कोई गुप्त रास्ते नहीं हैं, कई वाहन ऐसे मार्गों से गुजरते हैं जहां विभागीय अमला नियमित रूप से मौजूद रहता है,ऐसे में लोगों का सवाल है कि क्या विभाग को यह गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं? यदि दिखाई देती हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि दिखाई नहीं देतीं तो फिर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
वसूली की चर्चाओं ने बढ़ाई गंभीरता…
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि अवैध खनन और परिवहन से जुड़े कुछ वाहन मालिकों से कथित रूप से रकम वसूली गई है,हालांकि इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है,लेकिन लगातार फैल रही चर्चाओं ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है,यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई निकलती है तो मामला केवल अवैध खनन का नहीं रहेगा, बल्कि संरक्षण और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर प्रश्न भी खड़े होंगे,इसी वजह से ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


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