नई दिल्ली,12 मार्च 2026। देश के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु और उनकी अस्थियों को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुँचा। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर से नेताजी की कथित अस्थियां भारत वापस लाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के कड़े रुख के बाद याचिकाकर्ता को अपनी अर्जी वापस लेनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ ने की। याचिकाकर्ता आशीष रे,जो नेताजी की बहन के पोते हैं, की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पुरजोर तरीके से पक्ष रखा। हालांकि,पीठ ने मामले की गंभीरता और इसकी प्रकृति को देखते हुए इस पर किसी भी प्रकार के आदेश पारित करने में अपनी अनिच्छा जताई। कोर्ट के रुख को भांपते हुए अधिवक्ता सिंघवी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने तत्काल स्वीकार कर लिया।
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