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नई दिल्ली@लोकसभा में स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

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50 विपक्षी सांसदों ने पक्ष में वोट किया,गोगोई बोले…सदन में राहुल को बोलने नहीं दिया
नई दिल्ली,10 मार्च 2026। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष स्पीकर ओम बिरला को पद हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया। 50 से ज्यादा सांसदों ने पक्ष में वोट किया। इसके बाद पीठासीन ने प्रस्ताव पेश करने की परमिशन दे दी। अब इस प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा चलेगी। विपक्ष ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने 20 बार राहुल गांधी को रोक-टोका गया। उन्हें बार बार रूलिंग बुक दिखाई गई। उन्होंने अपनी स्पीच में एक आर्टिकल का हवाला दिया। इस पर उन्हें मना किया गया, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसदों ने भारत में बैन किताबें सदन में दिखाईं। उनसे कुछ नहीं कहा गया। इस तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं है। सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया और कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो,तब स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और जो व्यक्ति चेयर पर बैठे हैं,वे भी स्पीकर की मंजूरी से ही आए हैं,इसलिए वे इस प्रस्ताव पर कार्यवाही नहीं चला सकते। उन्होंने मांग की कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर डिप्टी स्पीकर नियुक्त न करने को लेकर हमला बोला और कहा कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति ली जानी चाहिए। इसके बाद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि चेयर पर बैठे व्यक्ति को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। आखिर में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही चलाने का अधिकार है। कई सदस्यों ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की कोशिश की।
प्रियंका ने कहा…राहुल की सच्चाई इनसे पचती ही नहीं है…
प्रियंका गांधी ने कहा कि एक ही व्यक्ति है इस देश में जो इन 12 सालों में इनके सामने झुका नहीं। वह नेता प्रतिपक्ष है। और वो नेता प्रतिपक्ष इस सदन में खड़े होके इनके सामने सच बोल देते हैं। सच्चाई वो जो बोलते हैं वह इनसे पचती नहीं है।
किरेन रिजिजू ने कहा…हमें गर्व है कि स्पीकर ओम बिरला हैं…
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कुछ लोग खुद को संविधान के ऊपर समझते हैं। खुद को ज्यादा ज्ञानी समझते हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि मुझे इस सदन में बोलने नहीं दिया जाता। कांग्रेस में कई सीनियर लीडर हैं। उन्होंने राहुल को क्यों नहीं समझाया है। सदन में बोलने के लिए स्पीकर की परमिशन की जरूरत है। उसके बिना नहीं बोल सकते हैं। आप अपने आपको स्पीकर से बड़ा समझेंगे तो ये गलत है। हमें गर्व है कि हम उस लोकसभा के सदस्य हैं, जिसके स्पीकर ओम बिरला हैं। 64 देशों का फ्रेंडशिप ग्रुप बनाया है, इसकी अध्यक्षा ओम बिरला कर रहे हैं। पीएम मोदी का मार्गदर्शन है। विपक्ष ने निजी टिप्पणी की है। 18वीं लोकसभा में 93′ से ज्यादा प्रोडक्टिविटी है। 321 सवाल पूछने का मौका सत्ता पक्ष को दिए हैं। 362 सवाल पूछने का मौका विपक्ष को दिया है स्पीकर सर ने।
मोइत्रा ने कहा- बिरला ने विपक्षी सांसदों का सबसे बड़ा सस्पेंशन किया था…
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि दिसंबर 2023 में स्पीकर ओम बिरला ने भारतीय पार्लियमेंट के इतिहास का सबसे बड़ा सस्पेंशन दिया, जिसमें विपक्ष के 100 सांसदों को सस्पेंड किया गया था। ये 2004 से हुए सस्पेंशन का 40′ था। पिछले 20 साल में इस एक दिन में सदन के 40′ सांसद सस्पेंड किए गए थे। ऐसा क्यों किया गया था क्योंकि संसद में घुसपैठ पर विपक्ष सरकार से जबाव मांग रहा था। क्या ये जरूरी मुद्दा नहीं था।
कांग्रेस ने लोकसभा
स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया

बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। मोहम्मद जावेद की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सदन की कार्यवाही कौन संभालेगा। सौगत राय, असदुद्दीन ओवैसी और वेणुगोपाल राय ने इस पर रूल्स ऑफ प्रोजिसर के नियम बताए।
गोगोई ने बिरला पर भेदभाव के 3 आरोप लगाए
– 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी जब बोल रहे थे,तब उन्हें बार-बार रोका गया। स्पीकर सर ने उनके तर्क पर सबूत देने का कहा।
– 9 फरवरी को शशि थरूर जब बोल रहे थे,तब उनका माइक बंद कर दिया गया। सरकार ने कहा कि बोलिए…लेकिन हम कैसे बोल सकते हैं जब माइक ऑफ किया गया हो। संसद में ऐसी नई-नई चीजें हो रही हैं।
– आज महिला सांसदों के उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ओम बिरला जी ने पीएम मोदी के समय कहा था कि महिला सांसदों ने पीएम की चेयर घेर ली है। उनके साथ कुछ भी हो सकता था। ये बहुत ही शर्मनाक बात है। बिरला ने किस आधार पर महिला सांसदों पर ये आरोप लगाए।


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