- ओएसडी पद से हटने के बाद पहले संयुक्त कलेक्टर बनाए गए फिर संशोधित करके डिप्टी कलेक्टर बनाया क्या अब फिर से संशोधित करके संयुक्त कलेक्टर बनाया गया एक व्यक्ति के लिए तीन बार संशोधन क्यों?
- तीन बार आदेश आने के बाद भी डिप्टी कलेक्टर संजय मरकाम नहीं कर पाए पद ग्रहण क्यों?

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,26 मार्च 2025 (घटती-घटना)। प्रदेश में फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी के पद पर कार्यरत एक अधिकारी के लिए राज्य सरकार इतनी मेहरबान है कि वह जैसा आदेश और जैसा पद चाह रहा है वैसा उसे प्रदान किया जा रहा है,अब सरकार की कौन सी ऐसी कमजोर नज वह पकड़ रखा है कि वह मनमाने आदेश के साथ जब चाहे जिस पद पर बैठ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी से चुनाव पूर्व उन्हें संयुक्त कलेक्टर सुरजपुर बनाया गया फिर आदेश संशोधित हुआ और वह सुरजपुर डिप्टी कलेक्टर बनाए गए वहीं उन्होंने तब कार्यभार ग्रहण नहीं किया अब फिर नया आदेश आया है जिसमें उन्हें स्वास्थ्य मंत्री के यहां से पुनः संयुक्त कलेक्टर सुरजपुर बनाया गया है।
दिव्यांग संघ का आरोप है कि उक्त राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी फर्जी रूप से प्रमाण-पत्र प्राप्त कर राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी के पद पर कार्यरत है । वैसे आश्चर्य इस बात का है कि वह कैसे मनचाहा पद प्राप्त करने में महारत रखे हुए हैं और कैसे जब जिस पद पर जाना चाहते हैं जा रहे हैं। संयुक्त कलेक्टर सुरजपुर बनाए गए संजय मरकाम की कहानी कुछ इसी तरह की है…अब वह इस आदेश के बाद कार्यभार ग्रहण करते हैं कि नहीं अपने ही गृह जिले में यह देखने वाली बात होगी। वैसे माना जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री लगातार इनकी सुर्खियों की वजह से जो इनके फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र की सुर्खियां हैं के कारण इनसे दूरी बनाना चाह रहे हैं और यह हैं कि यह स्वास्थ्य मंत्री का पीछा छोड़ नहीं रहे हैं। अब देखना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस बार पीछा छूटता है कि नहीं।
जैसा कि आरोप है कि सुरजपुर के संयुक्त कलेक्टर बनाए गए फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले अधिकारी संजय मरकाम की फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र की जांच क्यों नहीं हो रही है जिसके के लिए दिव्यांग संघ कई आंदोलन कर चुका है यह भी सवाल है क्योंकि कोई ऐसी बात या सरकार की मजबूरी जरूर है जो इनके फर्जी प्रमाण-पत्र की जांच नहीं हो पा रही है।
वास्तविक दिव्यांगों का हक मार कर क्या कर रहे हैं नौकरी?
सुरजपुर संयुक्त कलेक्टर बनाए गए संजय मरकाम क्या सही मायने में वास्तविक दिव्यांग जनों का हक मारकर नौकरी कर रहे हैं,दिव्यांग संघ के आरोपों के अनुसार तो ऐसा ही है,अब जब आरोप दिव्यांग संघ लगा रहा है जांच और कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है यह बड़ा सवाल है,वैसे श्रवण बाधित बनकर नौकरी कर रहे संजय मरकाम के दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच की मांग काफी पुरानी है जिसमें जांच नहीं हो पा रही है।
ओएसडी पद से हट गए पर प्रभाव अभी भी उतना ही
संयुक्त कलेक्टर सुरजपुर बनाए गए संजय मरकाम भले ही स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी पद से हटा दिए गए हों लेकिन उनका प्रभाव आज भी उतना ही है,बता दें कि वह शासन से मनचाहा आदेश निकलवाने में सक्षम हैं और वह शासन की कोई ऐसी कमी पकड़ बैठे हैं कि शासन मजबूर है उनके मनमुताबिक काम करने आदेश करने के लिए।
दिव्यांग संघ पूरी ताकत लगाकर कर रहा है आंदोलन…पर आंदोलन से नहीं पड़ रहा कोई फर्क?
दिव्यांग संघ पूरी ताकत लगाकर आंदोलन कर रहा है और फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी करने वालों को प्रमाण सहित उनकी पहचान जारी कर उनके नौकरी से हटाए जाने की सिफारिश कर रहा लेकिन इसका सरकार पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। सरकार दिव्यांग संघ को केवल आश्वासन देकर ही संतुष्ट कर रही है उनके हक में जांच कर वास्तविक दिव्यांग को उसका हक दिलाने सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है।
क्या वास्तविक दिव्यांगों का हक नहीं देना चाहती है सरकार,फर्जी दिव्यांग ही बने रहेंगे हकदार?
सरकार से वास्तविक दिव्यांग अपना हक मांग रहे हैं,वह आंदोलन कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के साथ नौकरी कर रहे लोगों को नौकरी से बाहर करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार मौन साधे बैठी है और इससे जाहिर होता ही वास्तविक दिव्यांग मांग ही करते रह जायेंगे और वह आंदोलन ही करते रह जायेंगे और फर्जी दिव्यांग नौकरी के हकदार बने रहेंगे।
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