

‘
घटती घटना’ की खबर के बाद हरकत में आया विभाग,अनुपस्थिति और लापरवाही पर जवाब-तलब
चपरासी के भरोसे चल रहा
अस्पताल की खबर से मचा हड़कंप, दो दिन में मांगा जवाब, अब रोज भेजनी होगी जियो-टैग फोटो
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां (एमसीबी),09 जून 2026 (घटती-घटना)। विकासखंड मुख्यालय खड़गवां स्थित पशु चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था, चिकित्सकों की कथित अनुपस्थिति और पशुपालकों को हो रही परेशानियों को लेकर प्रकाशित समाचार का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है,समाचार पत्र घटती-घटना में प्रमुखता से प्रकाशित खबर ‘कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र में बदहाल पशु चिकित्सालय,चपरासी के भरोसे चल रही व्यवस्था’ के बाद पशु चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है और मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा जारी पत्र में विकासखंड खड़गवां में पदस्थ पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. जितेंद्र पाल कंवर को नोटिस जारी कर समाचार में प्रकाशित तथ्यों पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय पत्र में उल्लेख किया गया है कि समाचार में अस्पताल में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के नियमित रूप से अनुपस्थित रहने तथा निर्धारित समय के अनुरूप अस्पताल संचालन नहीं होने की जानकारी सामने आई थी, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
दो दिनों के भीतर मांगा गया तथ्यात्मक जवाब-विभागीय पत्र के अनुसार संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे दो दिनों के भीतर समस्त तथ्यों सहित अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, विभाग की इस कार्रवाई को मामले में पहली बड़ी प्रशासनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
अब रोजाना भेजनी होगी जियो-टैग फोटो- मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अस्पताल की नियमित निगरानी के लिए नया आदेश भी जारी किया है, आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी को अस्पताल खुलने और बंद होने के समय की जियो-टैग फोटो प्रतिदिन विभागीय व्हाट्सएप समूह में साझा करनी होगी, यदि किसी दिन फोटो उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो उसे अनुपस्थिति माना जाएगा और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
समाचार में उठाए गए थे गंभीर सवाल
प्रकाशित समाचार में ग्रामीणों और पशुपालकों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर और जिम्मेदार कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं,कई बार पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अस्पताल में चिकित्सक उपलब्ध नहीं होते, ग्रामीणों का कहना था कि पशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल विपरीत नजर आते हैं,समाचार में यह भी सवाल उठाया गया था कि जब क्षेत्र में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है,तब पशु चिकित्सालय जैसी महत्वपूर्ण संस्था की अनदेखी आखिर किसकी जिम्मेदारी है? यही वजह रही कि खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग को तत्काल संज्ञान लेना पड़ा।
कार्रवाई होगी या फिर फाइलों में सिमट जाएगा मामला?
विभाग द्वारा स्पष्टीकरण मांगना और निगरानी व्यवस्था लागू करना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि क्षेत्र के पशुपालकों और ग्रामीणों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वास्तविक कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाता है,फिलहाल इतना तय है कि एक समाचार ने विभाग को जवाबदेह बनने के लिए मजबूर किया है और खड़गवां पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर अब पहले से कहीं अधिक नजर रखी जाएगी, आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विभाग की सख्ती केवल नोटिस तक सीमित रहती है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाती है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur