- क्या मुख्यमंत्री कम बजट वाली आधे अधूरे बने मुख्यमंत्री आवास योजना को साय सरकार पैसा रोककर कराना चाहते हैं खंडहरों में तदील?
- क्या त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री जन मन आवास योजना दी गई प्राथमिकता?
- इन मुद्दों को लेकर विपक्षी कांग्रेस नेताओं के द्वारा ग्रामीण जनता के हित के लिए सड़क से सदन तक क्यों नहीं उठाया मुद्दा?
- मुख्यमंत्री आवास निर्माण में लगने वाले सामग्री का रेट बढ़ने से ग्रामीण हितग्राही चिंतित….
- सुदामा राजवाड़े –
राजपुर,01 मार्च 2025 (घटती-घटना)। विदित हो की पूर्व की कांग्रेस सरकार के द्वारा चुनाव पूर्व प्रदेश भर में आर्थिक जनगणना करवा कर आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों के लिए प्रदेश भर में मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना का घोषणा कर पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के लिए योजना चालू किया गया था लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के 1 वर्ष से अधिक बीत जाने के बावजूद आज दिनांक तक कई जगह अधूरा निर्माण के वजह से खंडहरों में तदील होने के लिए अग्रसर देखे जा रहे हैं।
ऐसा ही मामला बलरामपुर जिले के राजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के पंचायत में देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष जनजाति के आवास हितग्राहियों को 250000 रुपए आंबटित कर सरकारी नुमाइंदों के द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पूर्व युद्ध स्तर पर कार्य कराया गया लेकिन साय सरकार के द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के द्वारा 130000 रुपए की धनराशि वाली मुख्यमंत्री आवास योजना की आवास रिपोर्टिंग के दौरान कुछ ग्राम पंचायत में आधी अधूरी निर्माण नजर आ रही है। आधे अधूरे आवास हितग्राहियों से नहीं बनने का कारण पूछा गया तो उनके द्वारा बताया गया 1 बरस से अधिक बीत गया है इसके बावजूद सरकार क्यों नहीं बनवाने के लिए राशि जारी कर रही है यह तो सरकार ही बताएगी यह मुख्यमंत्री आवास कब पूरे होंगे। उक्त हितग्राहियों के मायूस भरी बातों से जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री आवास एक सपना बनकर रह ना जाए। ग्रामीणों का मानना भी सच साबित होता है क्योंकि एक ओर साय सरकार पिछड़ी जनजातियो के लिए जनमन आवास योजना निर्माण करना इनके लिए सबसे महत्वपूर्ण था। क्योंकि सामने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वोट हासिल कर चुनावी बैतरणी पार जो था द्य लेकिन सवाल उठना लाजमी होता है। जो सरकार ग्रामीण हितेषी बनकर आवास मुद्दे को लेकर हो हल्ला मचा कर साा प्राप्ति की द्य आज वही पार्टी साा प्राप्ति कर मुख्यमंत्री आवास पर ध्यान नहीं दे रही है।
चुनाव हारने के बाद विपक्ष की कांग्रेसी भी अपना हौसला खो चुके हैं । बहरहाल अब देखना यह है कि उक्त हितग्राहियों का आवास बारिश पूर्ण से पहले पूर्ण हो जाएगा या मुख्यमंत्री वह आवास जो अर्धनिर्माणधीन हैं वह कहीं खंडहरों में तदील न हो जाए। क्योंकि हीतग्राहियों को जब यह राशि दी गई थी तब से एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और 1 वर्ष पूर्व आवास निर्माण में लगने वाले मटेरियल सीमेंट ईंट रेत वगैरह का दाम वर्तमान में बढ़ चुका है तब क्या आवास खंडहर नूमा होने से हितग्राही कसूरवार होगा या सरकारी नीति?
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