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बैकुण्ठपुर,@जिन्होंने पहले कांग्रेस छोड़ा…फिर उन्हें जिन्होंने कांग्रेस प्रवेश करवाया…प्रवेश कराने के बाद न जाने किस किनारे उन्हे छोड़ दिया?

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  • क्या कांग्रेस प्रवेश कराने तक ही थी उनकी जवाबदारी बाकी प्रवेश करने वाले समझे यही थी रणनीति
  • पार्टी छोड़कर फिर वापस आने पर नहीं हो रही पूछ परख,किनारे नजर आ रहे ऐसे लोग

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,09 नवम्बर 2023 (घटती-घटना)। राजनीति का कोई धर्म नहीं होता सिर्फ राजनीति का उद्देश्य होता है सत्ता पाना, सत्ता पाने के लिए क्या नहीं किया जाता यह किसी से छुपा नहीं है, सत्ता पाने की चाह इतनी अधिक होती है कि कोई भी प्रत्याशी किसी भी हद तक जा सकता है या कहे तो उनके समर्थक अपने प्रत्याशी के लिए कुछ भी कर सकते हैं, ताकि वह जीतने के बाद उनके करीबी बनकर 5 साल रेवड़ी खा सके, पर इस बीच प्रत्याशी को जीताने के लिए जो भी हथकंडे अपनाए जाते हैं वह कहीं ना कहीं नियमों पर खरे नहीं उतरते, कुछ ऐसा ही एक वाक्या बैकुंठपुर विधानसभा के राजनीति में भी देखने को मिला कांग्रेस से प्रत्याशी का नाम तय होने के बाद कुछ कांग्रेसी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में चले गए जैसे ही वह गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में गए तत्काल प्रत्याशी के करीबी बनने वाले उन्हें दूसरे दिन ही कांग्रेस प्रवेश करा दिए, कांग्रेस प्रवेश करने के बाद ऐसा लगा कि उन्हें जवाबदारी व जिम्मेदारियां मिलेगी और कांग्रेस में उनका कद बढ़ेगा पर जिन्होंने वापसी की उन्हें वापसी कराने वाले ही किनारे लगा दिए, आज दबी जुबान पर कांग्रेस में रहकर भी उन्हें वह पार्टी अपनी सी नहीं लग रही ऐसा लग रहा है कि कहीं जबरदस्ती में वह पार्टी से जुड़े हुए हैं और इसकी सिर्फ वजह है उनको वापसी कराने वाले नेता जो उन्हें वापसी कराकर छोड़ दिए हैं ख्याति अपनी बढ़ा लिए और उनकी ख्याति की वाट लगा दिए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में जाकर लौटने वाले नेताओं को गाडि़यों में बैठाकर घुमाना नाश्ता कराना और दिनभर घुमाकर साथ रात में घर छोड़ देना इतनी ही जिम्मेदारी उनको वापसी कराने वाले नेता निभा रहे हैं। वापसी करने वालों को अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। दबी जुबान में उनका मानना है की उनके प्रति विश्वास पार्टी के वह नेता भी नहीं कर पा रहे हैं जिन्होंने उनकी पार्टी में वापसी कराई है। अब ऐसे नेताओं की स्थिति बड़ी अजीब सी हो गई है, उन्हे निर्देश मानने की तो छूट दी गई है लेकिन उन्हे यह छूट नहीं है की उन्हे कोई निर्णय खुद लेना है। अब ऐसे नेता खुद को कोसते भी नजर आ रहे हैं। वैसे भी राजनीति में माना जाता है की दल बदल करने वाली की गिनती फिर से नीचे से शुरू होती है वैसी ही इन नेताओं की हुई है गिनती नीचे से शुरू हुई है और फिलहाल उन्हे नीचे से ही अब ऊपर आने का प्रयास जारी रखना है। पार्टी में फिलहाल उन्हे निर्देशों का ही पालन करना है और उन्हे अन्य के साथ ही पार्टी के लिए काम करना है। वैसे बताया जा रहा है ऐसे नेता खुद को भी कोश रहे हैं क्योंकि उन्होंने अलग दल में जाकर उसकी सदस्यता ले ली थी और जिसे सार्वजनिक भी कर दिया गया था। उन्होंने भले ही सफाई यह दी हो की वह समझ नहीं सके लेकिन इसे कांग्रेस स्वीकार आसानी से नहीं करने वाली क्योंकि वयस्क को बहकाना आसान बिलकुल नहीं होता।


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