सूरजपुर,10 जून 2023 (घटती-घटना)। जिला मुख्यालय सहित आस पास के क्षेत्रो मे बांसुरी को मधुर धुन लोगो का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसकी आवाज सुनते लोग अनायास उस ओर खींचे चले जा रहे है। क्या बच्चे क्या युवा व बुर्जग सभी बासुरी की मधुरतान के इनदिनों मुरीद हो चुके है। बासुरी की धुन में अब भी उतना से दम है जितना पहले हुआ करता था। गंगा दशहरा पर लंबे समय से बासुरी बेंचने आ रहे सूरजपुर मो सेराज बासुरी बेच कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इन दिनों इनकी बांसुरी की मीठी तान लोगो को आकर्षित कर रही है। बांसुरी की मधुर तान सभी आयु वर्ग के लोगो को घर से बाहर निकलने को विवश कर दे रही है। इससे छोटे बच्चे सबसे अधिक उत्साहित नजर आते है। पिछले 30 वर्ष से बिहार के मुज्जफरपुर से आकर लोगों को अपनी मधुर मुरली की आवाज से मंत्रमुग्गध करने वाले सेराज खान ने बताया कि इनका यह कारोबार इनकी पुस्तैनी है उनके पिता सरदार साह ने बांसुरी बनाने की कला उनके दादा से सीखी थी। वे भी लगभग 50 वर्षों से इस व्यवसाय को करते रहें हैं। बिहार प्रांत के मुज्जफरपुर से आये सेराज भाई ने बताया की वे गंगा दशहरा के दौरान प्रतिवर्ष यहां पहुंचते है और करीब 30 दिनों तक यहां रहकर अपना व्यवसाय करते है। मों सेराज ने बताया की इस धंधे से रोजी रोटी का साधन – बन जाता है। शहर में बासुरी के शौकीन आज भी है जिनके बदौलत उनका व्यवसाय टिका हुआ है। मो. सेराज अपने पिता, बड़े भाई, पुत्र व दो सहयोगी के साथ आए हुए है, और सुबह होते ही सभी लोग बांसुरी की मीठी धुन के साथ अपने- अपने व्यवसाय पर निकल जाते है। मप्र उडीसा बंगाल महाराष्ट्र सहित पडोसी देश नेपाल भी जाते है।
बांसुरी बजाना सिख रहे है बच्चे नगर में पहुंचे सेराज भाई बांसुरी बेचने के साथ साथ ही वे बासुरी बजाने की कला भी सिखाते है। जिससे बच्चे उनसे बांसुरी खरीदने के साथ बांसुरी बजाना भी सीख रहे है। बांसुरी बजाना स्वास्थ के लिए भी लाभ दायक डाक्टरों के मुताबिक बांसुरी बजाने से जहां उंगलियों की कसरत होती है वही मस्तिष्क श्वशन त्रंत्र के लिए भी लाभ दायक रहता है।
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