- थाना नहीं सीधा जिला बदला…घटती-घटना की खबर पर लगी मुहर.
- तबादला सूची आते ही जिला सहित शहर के लोग में दिखी किसी थाना प्रभारी के हटने की खुशी.
- मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के तबादला सूची में नाम को देख पुलिस कर्मचारियों में भी दिखी खुशी की लहर.
- मनचाहा जिला ना मिलने से निरीक्षक नाखुश,सूत्र.
- सचिन सौरव की जोड़ी टूटी अलग-अलग जिलों के थानों में संभालेंगे अपनी जिम्मेदारी.

–रवि सिंह –
कोरिया/एमसीबी,06 जून 2023 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले व नवीन जिला मनेंद्रगढ़ के थाना प्रभारी 3 साल के लंबे कार्यकाल के बाद थाना छोड़ेंगे, 3 साल में थाना तो नहीं बदला पर 3 साल बाद जिला ही बदल गया, जिसकी संभावना दैनिक घटती घटना ने पहले ही खबर प्रकाशित करके जताई थी, जिस पर मुहर भी लग गई थाना नहीं सीधे जिला बदला गया दोनो निरीक्षकों का। वही सौरभ द्विवेदी व सचिन सिंह जो एक ही जिले में कार्यरत थे और दोनों साझेदारी के साथ काम कर रहे थे यह साझेदारी भी टूट गई अब दोनों अलग-अलग जिले में काम करते नजर आएंगे एक को रायगढ़ भेजा गया है तो दूसरे को बीजापुर भेजा गया है।
ज्ञात हो कि अविभाजित कोरिया जिले के समय सचिन सिंह व सौरभ द्विवेदी का जिले में एक साथ आगमन हुआ था और दोनों को एक साथ थाना मिला था सौरभ द्विवेदी को जहां चरचा पुलिस थाने की कमान मिली थी तो वही सचिन सिंह को मनेंद्रगढ़ थाना मिला था, सचिन सिंह ने एक ही थाने में अपना 3 साल पूरा कर लिया और वही सौरभ द्विवेदी को तीन थाना घूमना पड़ा था, अंत में थाना छोड़ उन्हें साइबर का प्रभार दिया गया था पर वही सचिन सिंह का थाना बदल पाने में उच्च अधिकारी नाकाम रहे, अब इसकी वजह जो भी थी पर घटती घटना ने इसका अंदेशा पहले ही जता दिया था कि इनका थाना नहीं जिला बदलेगा और अंततः वही हुआ भी, थाना तो 3 साल में नहीं बदला सीधा जिला ही बदल गया, अब सचिन सिंह जो निरीक्षक हो चुके हैं अब वह बीजापुर जिले में काम करते नजर आएंगे सूत्रों की माने तो यह तबादले से खुश नहीं है और तबादला रुकवाने का पूरा प्रयास करते नजर आएंगे।
एक ही थाने में भले ही 3 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया पर मान सम्मान बिल्कुल भी इनका नहीं था
सचिन सिंह ने भले ही एक ही पुलिस थाने में तीन सालों का कार्यकाल पूरा कर लिया लेकिन इनका मान सम्मान बिल्कुल नहीं था थाना क्षेत्र में जो आज भी सुना जा सकता है। अपनी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले यह एक ऐसे निरीक्षक थे जिनपर आरोप लगते रहे और इनके थाना क्षेत्र में अवैध कारोबार भी फलते फूलते रहे। सचिन सिंह का कार्यकाल मनेंद्रगढ़ पुलिस थाने में यादगार रहने वाला है और वह भी उनकी कारगुजारियों की वजह से।
सबसे निम्न स्तर के थाना प्रभारी में सुमार हो गए
मनेंद्रगढ़ पुलिस थाना प्रभारी सबसे निम्न स्तर के थाना प्रभारियों में अपना नाम शुमार कराकर जिले से रवाना होंगे। हाल ही ही हांथ पैर जोड़कर एक मामले में इन्हे माफी भी मांगनी पड़ी जिसकी चर्चा भी जोरों पर है। कुल मिलाकर जोड़ जुगाड से जितना दिन इनका चल सका यह जिले में बने रहे और जब तबादला हुआ भी तो घोर नक्सल क्षेत्र में इनको पदस्थापना मिली जो इनकी चाह में बिल्कुल नहीं थी।
सौरभ सचिन की जोड़ी भी टूटी
अविभाजित कोरिया जिले में एक साथ पदस्थ हुए उप निरीक्षक जो बाद में निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए जिसमे सचिन सिंह और सौरभ द्विवेदी का नाम शामिल है की जोड़ी लगी प्रसिद्ध रही अविभाजित कोरिया जिले में। दोनो की जुगलबंदी ऐसी थी कि दोनों एक साथ थाना का प्रभार भी पाने में सफल हुए थे और दोनो लगातार थानों के ही प्रभार में बने हुए थे। दोनो की कार्यप्रणाली भी एक जैसी थी जो दोषपूर्ण कही जा सकती है और अंत में दोनो का एक साथ तबादला हुआ जिसमे एक तो बढि़या जगह पहुंच पाने में सफल हुए लेकिन दूसरे को नक्सल क्षेत्र जाना पड़ा। इस तरह दोनो की जोड़ी अब अलग हुई और दोनो प्रदेश के दो अलग अलग कोनो में पहुंच गए।

थाना प्रभारी के बदलते क्या बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी भी नहीं दिखेगी?
मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के बदलते ही अब शहर में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी क्या नहीं दिखेगी यह भी एक सवाल है। अपनी मनमानी कभी बिना वर्दी और लगातार बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी में यात्रा करने वाले थाना प्रभारी का वाहन अब नए नए जिले में भी बिना नंबर ही दिखा करेगी यह भी एक सवाल है। थाना प्रभारी की मनमानी पर मनेंद्रगढ़ में तो उच्च अधिकारी अंकुश नहीं लगा सके थे क्या नए जिले में उनकी कार्यप्रणाली पर अंकुश लगेगा यह भी एक सवाल है।
तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ हुई शिकायतों में क्या अब होगी कोई कार्यवाही?
मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के पूरे कार्यकाल के दौरान उनकी कई शिकायत हुई और कई बार उनके ऊपर आरोप भी लगे। अब देखने वाली बात यह होगी की क्या उनके यहां से जाने के बाद उनके खिलाफ हुई शिकायतों की कोई जांच होगी क्या उनके ऊपर उन शिकायतों के आधार पर कोई कार्यवाही होगी। अभी तक खुद ही प्रभारी होने के कारण वह मामले में बचते चले आ रहे थे अब जब वह स्थानांतरित हो चुके हैं क्या जांच कर मामले में न्याय होगा यह भी एक सवाल है।
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