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बैकुण्ठपुर/पटना@झण्डावाला रामचरित मानस गायन वादन का 52 वाँ प्रतियोगिता कटकोना में हुई आयोजित

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54 साल से अनवरत् झण्डा लेने की परम्परा जारी,चैत पूर्णिमा में होता है कार्यक्रम

बैकुण्ठपुर/पटना, 07 अप्रैल 2023 (घटती-घटना)। झण्डावाला रामचरित मानस गायन वादन का 52 वॉं प्रतियोगिता कटकोना में आयोजित किया गया है जो तीन दिन तक चलेगा। 54 साल से अनवरत झण्डा लेने की परम्परा जारी है, चैत पूर्णिमा में होता है कार्यक्रम। रामचरित मानस गायन वादन प्रतियोगिता की अनुठी परम्परा का शुभारंभ पटना से हुई थी। श्री हनुमान जयंती पर्व पर तुलसीकृत राम चरित मानस गायन वादन महासम्मेलन कोरिया जिले के कटकोना में गुरूवार से प्रारंभ है। रामचरित मानस गायन वादन सम्मेलन पिछले 54 वर्षों से अनवरत चला आ रहा है। इस परम्परा के तहत कार्यक्रम स्थल से झण्डा लेने वाले मण्डली को यह प्रतियोगिता कराना होता है। इसी परम्परा का निर्वहन करते इस वर्ष कोयलाचंल नगरी कटकोना में कार्यक्रम होना है। प्रतियोगिता श्री हनुमान जंयती के पावन पर्व पर आयोजन किया जाता है।
तीन दिन की होगी प्रतियोगिता
कार्यक्रम के कार्यकारी अध्यक्ष योगेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हमारे कटकोना कॉलरी के शिवमंदिर प्रांगण में यह कार्यक्रम होगा जिसमें 109 मानस गायन मण्डिलयों ने भाग लिया है। यह प्रतियोतिगता संध्या 07 बजे से 06 अप्रैल से लेकर 08 अप्रैल तक चलेगी। पुरस्कार के तौर पर पुरूष, महिला व बाल मानस मण्डली इस प्रतियोगिता में षामिल हो सकेंगे जिसमें प्रथम पुरस्कार के तौर पर 11 हजार, द्वितीय 71 सौ, तृतीय 51 सौ, चतुर्थ 31 सौ, पंचम 21 सौ रखी गयी है। इस पूरे कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिये आयोजक समिति का गठन किया गया है जिसमें संरक्षक आर.के.मण्डल सहक्षेत्र प्रबंधक कटकोना, सहसंरक्षक एस.के. पाण्डेय, व्ही. एस. परिहार खान प्रबंधक, बिरंची सिंह सरपंच, के.के. शर्मा उपसरपंच, गणेश राजवाड़े सचिव, अध्यक्ष विनोद कुमार कार्मिक प्रबंधक है।
ऐसे हुई प्रारंभ
53 वर्ष पूर्व चैत पूर्णिमा श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर मानस प्रेमी द्वारा ध्वज ले जाने की परम्परा की शुरूआत हुई। इस परम्परा में ध्वज ले जाने वाले गावं द्वारा इस सम्मेलन को कराया जाता है। हनुमान जन्मोत्सव रामचरित मानस गा.वा. सम्मेलन केन्द्रीय समिति पटना के संरक्षक मदन गोपाल अग्रवाल ने बताया की ऐसे कार्यक्रम से भाईचारा, नैतिकता के साथ श्री राम के स्तुति और नव ऊर्जा का संचार होता है ऐसे प्रतियोगिता के माध्यम से लोक कला, संगीत, गायन वादन को बढ़ावा मिलता है।


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