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संपादकीय

लेख@ प्रकृति प्रदत्त विकृत सुआकृति लेती

पृथ्वी पर पायी जाने वाली समस्त जीव जंतु प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति के गोद में ही खेलते पलते और बढ़ते है। मनुष्य प्रकृति से बहुत सारी अपेक्षाएं रखना है और जब उनके अनुकूल प्रकृति प्रदत्त घटनाएं होती है तो व्यक्ति बहुत खुश होता है, लेकिन यदि कोई घटनाएं मनुष्य के प्रतिकूल होता है तो व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से …

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लेख@ मानव मात्र एक समान देश है सबसे ऊपर

हमें ज्ञान देने वाला कौन है।आप जब एक कौवा को एकबार बिजली के तार से गिर कर मरते देखा तो शायद उसके शोक में सैकड़ो कौवा चिल्लाते हुए आ गए और कॉव कॉव करने लगे। ना तो उसकी क़ोई जाति ना क़ोई धर्म मानो सिर्फ मुश्किल में एकजुटता ही उसके प्रति संवेदना थी ना तो वो किसी पैसे को लेता …

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लेख@ अधिसंख्य आबादी तक पहुंचें सस्ती दवाइयां

पिछले काफी समय से जेनेरिक या ब्रांडेड दवाओं पर बहस छिड़ी है। पिछले साल नेशनल मेडिकल कमीशन ने एक नियम लागू किया था। इसमें कहा गया था कि डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं भी लिखनी होंगी। नियम न मानने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एनएमसी के इस फैसले के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस नियम पर सवाल खड़े किए थे। …

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लेख@ कर्मठता के साथ बड़ी सफलता प्राप्त कीजिये

अकर्मण्यता जीवन की उन्नती का बड़ा अवरोधयह बात चाहे मनुष्य के जीवन की हो यह राष्ट्र के उत्थान से संदर्भित हो,जीवन में मनुष्य के संदर्भ में अकर्मण्यता एक बड़ी शारीरिक,मानसिक व्याधि और दशा है, यह जीवन को निर्रथक बनाती है। इसी तरह देश का शासन तंत्र यदि आक्रमण्य और निराशावादी हो तो देश की उन्नति में अवरोध और बढ़ाएं सदैव …

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लेख@ शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव हैमहिला अध्यापिकाओं की बढ़ती संख्या

महिलाओं द्वारा संचालित कक्षाओं में समावेशी भागीदारी 20 प्रतिशत अधिक होती है। सामाजिक बाधाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करके, महिला शिक्षकों की उपस्थिति लड़कियों के शैक्षिक अवसरों को बढ़ाती है। महिला शिक्षकों की संख्या में वृद्धि के कारण बिहार की कन्या उत्थान योजना में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। लिंग भूमिकाओं, बाल विवाह और मासिक धर्म …

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लेख@ सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े हुए हैं प्रदर्शन कलाएँ और रंगमंच

मजदूर वर्ग को आजाद कराने और स्थापित सत्ता के खिलाफ क्रांति को मज़बूत करने के लिए 20वीं सदी की शुरुआत में नुक्कड़ नाटक का विकास हुआ। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से उपनिवेशवाद विरोधी युग के दौरान भारत में वामपंथी रंगमंच कार्यकर्ताओं द्वारा की गई थी। यद्यपि नुक्कड़ नाटक और लोक नाटक में कई समानताएँ हैं, लेकिन नुक्कड़ नाटक एक सीधा-सादा …

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लेख@ राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के प्रतीक हैं देवाधिदेव शिव

भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का विशेष अवसर है महाशिवरात्रि,जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं और महाशिवरात्रि का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मानसिक शांति,आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि …

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लेख@ महिलाओं को आगे बढ़ाने की धुंधली कोशिशें

बालिकाएं अच्छी शिक्षा की हकदारनिश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है और नई सुबह ज्यादा चमकदार और उजाले से भरपूर होती है। भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया है। स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी है। …

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लेख@ परीक्षा के दौरान एक छात्र की मन की स्थिति

परीक्षा बहुत शब्द छात्रों के सबसे अधिक स्टोइक के माध्यम से चिंता का एक लहर भेज सकता है। यह एक सार्वभौमिक अनुभव है: एक कक्षा का शांत हम, एक दिल की धड़कन की तरह गुदगुदी घड़ी गूंज, और उम्मीद का वजन नीचे दबाने का वजन। लेकिन वास्तव में सतह के नीचे क्या चल रहा है? इन निर्णायक क्षणों के दौरान …

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लेख@ कितनी उचित है गंगाजल पर बयान बाजी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। विद्वानो का कहना है कि 144 वर्षों के बाद इस बार का महाकुंभ विशेष योग में संपन्न हो रहा है। ऐसे में यहां स्नान करने का सर्वाधिक महत्व है। मकर संक्रांति से प्रारंभ होकर महाशिवरात्रि तक चलने वाला महाकुंभ अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। सरकार …

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