-संवाददाता-
अम्बिकापुर,14 जून 2026 (घटती-घटना)।कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में संचालित राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को पूर्ण होने जा रहा है। इस दौरान सरगुजा जिले में प्राचीन ज्ञान-संपदा के रूप में अनेक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां सामने आ रही हैं। अभियान के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर में दो संरक्षकों के पास महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां प्राप्त हुई हैं।
बिलासपुर चैक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के पास संवत् 1866 में लिखित वनदुर्गा महात्म्य की पाण्डुलिपि मिली है। इसके साथ ही तत्कालीन महाराज सरगुजा को संबोधित भूमि संबंधी एक आवेदन पत्र भी प्राप्त हुआ है। डॉ. पाठक ने बताया कि यह पत्र स्वतंत्रता पूर्व का है, जिसे उनके बाबा जी द्वारा लिखा गया था। उल्लेखनीय है कि अम्बिकापुर नगर में वनदुर्गा से संबंधित कई पाण्डुलिपियां पूर्व में भी प्राप्त हो चुकी हैं। पाण्डुलिपियों का अवलोकन करते हुए नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से हमारी समृद्ध प्राचीन ज्ञान-संपदा सामने आ रही है, जिसका लाभ वर्तमान एवं भावी पीढि़यों को मिलेगा। सर्वेक्षण अभियान के दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल तथा जिला सदस्य श्रीश मिश्र भी उपस्थित रहे। श्रीमती अग्रवाल ने स्वयं पाण्डुलिपियों को पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया में सहभागिता निभाई। इसी क्रम में बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री वेणुधर सिंह के पास महामाया विजयोत्सव वंदना नामक एक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इस पाण्डुलिपि में महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव एवं महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर से संबंधित विरुदावली का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके लेखक एवं लेखन काल का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान जिला सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत अब तक पूरे देश में एक करोड़ आठ लाख से अधिक पाण्डुलिपियों का सफलतापूर्वक जियो-टैगिंग किया जा चुका है। वहीं सरगुजा जिले में 13 कस्टोडियन के पास उपलब्ध 46 पाण्डुलिपियों को अब तक पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। पाण्डुलिपियों के अपलोडिंग का कार्य सर्वेयर गौरव पाठक द्वारा नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल की उपस्थिति में संपन्न कराया गया। यह अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
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