विश्व रक्तदाता दिवस पर एसईसीएल डिस्पेंसरी में आयोजित हुआ रक्तदान शिविर, 33वीं बार रक्तदान कर बने प्रेरणा स्रोत
-संवाददाता-
कोरिया,14 जून 2026 (घटती-घटना)। आज के दौर में जहां जन्मदिन का मतलब केक, मोमबत्ती और जश्न तक सीमित होता जा रहा है, वहीं एसईसीएल कटकोना क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक नेता योगेंद्र कुमार मिश्रा ने एक बार फिर अपने जन्मदिन को समाजसेवा से जोड़ते हुए रक्तदान कर मनाया, संयोग से उनका जन्मदिन और विश्व रक्तदाता दिवस एक ही दिन पड़ता है, जिसे वे वर्षों से जरूरतमंदों के लिए रक्तदान कर विशेष बनाते आ रहे हैं। एसईसीएल डिस्पेंसरी में आयोजित भव्य रक्तदान शिविर में योगेंद्र मिश्रा ने अपने साथियों के साथ रक्तदान किया, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रमिकों और कर्मचारियों ने भी रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया, योगेंद्र मिश्रा अब तक 33 बार रक्तदान कर चुके हैं और लगातार लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
1991 में की थी पहली बार रक्तदान की शुरुआत- योगेंद्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1991 में पीजी कॉलेज अंबिकापुर में अध्ययन के दौरान उन्हें पहली बार रक्तदान करने का अवसर मिला, उस समय अपने मित्र प्रदीप मिश्रा (वर्तमान में भोपाल में डीएसपी) के साथ उन्होंने होली क्रॉस अस्पताल अंबिकापुर में रक्तदान किया था, पहली बार रक्तदान से मिली संतुष्टि ने उन्हें इस सेवा कार्य से जोड़ दिया और तब से वे लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं, उन्होंने बताया कि उनके श्रमिक संगठन कोयला मजदूर सभा (हिन्द मजदूर सभा) द्वारा भी प्रत्येक वर्ष विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा सके।
एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बचा सकता है-योगेंद्र मिश्रा का मानना है कि यदि उनके एक यूनिट रक्त से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के प्राण बच सकते हैं, तो इससे बड़ा जन्मदिन का उपहार कोई नहीं हो सकता,उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है, उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए, रक्तदान से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती,बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का परिचायक है।
साथियों को भी कर रहे प्रेरित-योगेंद्र मिश्रा केवल स्वयं रक्तदान नहीं करते, बल्कि अपने सहयोगियों और साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं,यही कारण है कि हर वर्ष उनके साथ रक्तदान करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, क्षेत्र में उनकी पहचान केवल एक श्रमिक नेता के रूप में नहीं,बल्कि समाजसेवी और जनहितैषी व्यक्तित्व के रूप में भी बनी हुई है।
मानव सेवा का प्रेरणादायी संदेश- विश्व रक्तदाता दिवस और जन्मदिन के इस अनूठे संगम पर आयोजित रक्तदान शिविर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि उत्सव केवल व्यक्तिगत खुशी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के लिए उपयोगी कार्यों से भी जुड़ना चाहिए, योगेंद्र मिश्रा का यह प्रयास क्षेत्र के युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है तथा यह साबित करता है कि रक्तदान वास्तव में महादान है।
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