दिल्ली समागम में गूंजी जनजातीय स्वाभिमान की आवाज…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,14 जून 2026 (घटती-घटना)। जनजाति सुरक्षा मंच ने रविवार को उरांव समाज भवन,पटेलपारा में प्रेस वार्ता आयोजित कर दिल्ली में आयोजित जनजाति समागम 2026 की जानकारी दी। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति,परंपरा,आस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 24 मई को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में विशाल जनजाति समागम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के विभिन्न जनजातीय समुदायों के लाखों लोगों ने भागीदारी की। प्रेस वार्ता में मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत, प्रांत संयोजक रोशन प्रताप सिंह,सह संयोजक इंदर भगत,जिला संयोजक बिहारीलाल उरांव,जिला संरक्षक नाथूराम भगत,खंड संयोजक खेमराज सिंह तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस समागम में देश के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा,लोकनृत्य, लोकगीत,मांदर-ढोल और अन्य सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से जनजातीय समाज ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। लाल किला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को जनजातीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया गया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से भी लगभग 5 हजार लोग इस आयोजन में शामिल हुए। अंबिकापुर, सूरजपुर,बलरामपुर,कोरिया,मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर,रायगढ़, कोरबा और जशपुर सहित विभिन्न जिलों से समाज के प्रतिनिधि, युवा,महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे थे। सरगुजा संभाग की भागीदारी ने राष्ट्रीय मंच पर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और सामाजिक एकता की मजबूत पहचान प्रस्तुत की। मंच के अनुसार कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में जनजातीय समाज की परंपराओं,प्रकृति-पूजा,जल-जंगल-जमीन से जुड़े जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को भारत की आत्मा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। साथ ही कहा कि जनजातीय समाज ने सदियों से प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रेस वार्ता में मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का संरक्षक नहीं,बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का जीवंत स्वरूप है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है,तब जनजातीय जीवन-दर्शन टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करता है।
जनजातीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर उठाई मांग : मंच ने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान केवल संवैधानिक सूची का विषय नहीं है, बल्कि उसकी आस्था, संस्कृति,परंपरा,रीति-रिवाज और सामाजिक जीवन-पद्धति से भी जुड़ी हुई है। मंच ने मांग की कि अनुसूचित जनजाति की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा निर्धारित की जाए,ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने। प्रतिनिधियों ने बताया कि इस विषय को लेकर पिछले दो दशकों से देशभर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2009-10 में 26 राज्यों के हजारों गांवों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर लाखों लोगों का समर्थन जुटाया गया था। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर रैलियां, सम्मेलन,जनसंपर्क अभियान तथा जनप्रतिनिधियों से संवाद के माध्यम से यह मुद्दा लगातार उठाया जाता रहा है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति
से भी हुई मुलाकात…
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि 28 मई 2026 को संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर जनजातीय समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने अनुसूचित जनजाति की परिभाषा,सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मंच ने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, परंपरागत जीवन-पद्धति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने चाहिए। यह केवल आरक्षण या कानूनी व्याख्या का विषय नहीं,बल्कि करोड़ों जनजातीय लोगों की पहचान, परंपरा और अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। प्रेस वार्ता के अंत में मंच के पदाधिकारियों ने जनजातीय समाज से एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
filter: 0; jpegRotation: 0; fileterIntensity: 0.000000; filterMask: 0;
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur