Breaking News

एमसीबी/भरतपुर@ 7 रुपये की मजदूरी और करोड़ों के दावे

Share


आखिर मनरेगा में मजदूरों का पैसा गया कहां?
भरतपुर के नौडिया में मजदूरी भुगतान पर बड़ा सवाल,
पसीना मजदूरों का और भुगतान मजाक जैसा!
-संवाददाता-
एमसीबी/भरतपुर,14 जून 2026 (घटती-घटना)।
सरकारें चाहे जितने दावे कर लें कि गरीबों के उत्थान और मजदूरों के सम्मान के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं,लेकिन भरतपुर विकासखंड के ग्राम नौडिया से सामने आई खबर ने इन दावों की चमक पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, यहां मनरेगा और पंचायत कार्यों में लगे करीब 100 मजदूरों को कथित तौर पर मजदूरी के नाम पर प्रतिदिन महज 7 रुपये का भुगतान मिलने की बात सामने आई है, इस खुलासे के बाद मजदूरों में आक्रोश है और प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी हो गई है,जिस मनरेगा योजना को ग्रामीण गरीबों की आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है,उसी योजना में यदि दिनभर कड़ी धूप में काम करने वाले मजदूरों को सात रुपये प्रतिदिन का भुगतान मिले तो यह केवल त्रुटि नहीं बल्कि व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
पसीना बहाया मजदूरों ने, रकम देखकर उड़ गए होश…
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नौडिया में विभिन्न पंचायत और मनरेगा कार्यों में लगे मजदूरों ने जब अपने खातों की जांच की तो वे हैरान रह गए,जिन मजदूरों को तय मजदूरी मिलने की उम्मीद थी,उनके खाते में बेहद कम राशि जमा हुई,कई मजदूरों का आरोप है कि भुगतान की गणना के आधार पर उन्हें प्रतिदिन लगभग 7 रुपये के बराबर राशि प्राप्त हुई,गांव में चर्चा का विषय यही है कि आखिर मजदूरों की मेहनत का मूल्य इतना कम कैसे हो सकता है, जिन हाथों ने मिट्टी काटी,तालाब खोदे,सड़क बनाई और सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारा,उन्हीं हाथों में मजदूरी के नाम पर इतनी छोटी राशि पहुंचना लोगों को समझ से परे लग रहा है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार को घेरा…
मामला सामने आने के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है,उन्होंने इसे गरीब मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि यदि मजदूरों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिला है तो यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए,उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीब हितैषी होने का दावा करती है,लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा,उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं…
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं,यदि मस्टर रोल में पूरी मजदूरी दर्ज है तो भुगतान कम क्यों हुआ? क्या यह तकनीकी त्रुटि है या फिर भुगतान प्रक्रिया में कोई बड़ी गड़बड़ी? क्या मजदूरों के खातों तक राशि पहुंचने से पहले कहीं कटौती हुई? क्या पंचायत,जनपद या संबंधित विभागों ने भुगतान की जांच की? और सबसे बड़ा सवाल—यदि वास्तव में मजदूरों को सात रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान मिला है तो बाकी राशि कहां गई?
व्यवस्था पर व्यंग्य भी कम नहीं…
ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि महंगाई के इस दौर में जहां सात रुपये में एक कप चाय भी मुश्किल से मिलती है, वहां सरकार के रिकॉर्ड में शायद मजदूरों का पूरा दिन सात रुपये में गुजर जाता होगा,किसी ने कहा कि यदि यही मजदूरी का नया मॉडल है तो आने वाले दिनों में शायद मजदूरों को मजदूरी के साथ धन्यवाद पत्र भी दिया जाए,वहीं कुछ लोग इसे गरीबों के साथ क्रूर मजाक बता रहे हैं।
जांच से ही सामने आएगा सच….
हालांकि पूरे मामले की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी,यह भी संभव है कि भुगतान प्रक्रिया में कोई तकनीकी त्रुटि या अधूरी एंट्री हुई हो,लेकिन जब तक संबंधित विभाग स्थिति स्पष्ट नहीं करता,तब तक मजदूरों की नाराजगी और सवाल दोनों बने रहेंगे,फिलहाल नौडिया गांव में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी सात रुपये कैसे हो गई,और यदि नहीं हुई तो फिर खातों में इतनी कम राशि क्यों पहुंची? अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं,क्योंकि यह मामला केवल 100 मजदूरों का नहीं,बल्कि उन सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता का भी है जिनके सहारे ग्रामीण गरीब अपने परिवार का जीवनयापन करते हैं।


Share

Check Also

सूरजपुर@ विश्व रक्तदाता दिवस : कलेक्टर ने किया रक्तदान 29 बार रक्तदान कर मिसाल बने महेश कुमार दोहरे

Share जिला अस्पताल में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित,जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा-संवाददाता-सूरजपुर,14 जून …

Leave a Reply