2012 में क्रूर निर्भया कांड ने देश की अन्तरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा में भारत के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे की गहरी कमियों को भी उजागर कर दिया था। अपर्याप्त पुलिस व्यवस्था, धीमी न्यायिक प्रक्रिया, पुराने पड़ चुके कानून और पीडि़तों के ना-काफी सहायता इंतजाम निराशाजनक तस्वीरें पेश कर रहे थे। 2014 …
Read More »संपादकीय
लेख @ ऑपरेशन सिंदूर को लेकर देश के दो परस्पर विरोधी दृश्य
हमारे सामने ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर देश के दो परस्पर विरोधी दृश्य हैं। विदेश गए सर्वदलीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने इस तरह भारत का पक्ष प्रस्तुत किया जैसे देश पाकिस्तान केंद्रित सीमा पार आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर तथा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पूरी तरह एकजुट है और कोई विपक्ष है ही नहीं। दूसरी ओर आप पहलगाम हमले से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और …
Read More »लेख @ घरेलू हिंसा का घेरा कहां तक?
महिलाओं के लिए उनका घर-आंगन सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। परिवार और परिवेश में अपनों का संबल मिलना चाहिए। मान-सम्मान की रक्षा होनी चाहिए। दुखद है कि भारत ही नहीं, कमोबेश हर देश में घरेलू हिंसा का दंश महिलाओं के हिस्से है । मन और मान को ठेस पहुंचाने वाले इस बर्ताव के रंग-ढंग भले अलग हों, वैश्विक स्तर पर …
Read More »सम्पादकीय @ तथ्यों को दबाकर रखना संभव नहीं
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को सिंगापुर में जो कहा है वह सबकी आंखें खोल देने वाला है। इससे साबित होता है कि जब दो देशों के बीच छिटपुट सैन्य संघर्ष की स्थिति हो तो ऐसे में असत्य अवधारणाओं और समर्थक मीडिया के सहारे ही बढ़त नहीं ली जा सकती। तथ्यों को दबाना संभव नहीं होता …
Read More »कविता @ पेड लगाबो…
आवव एकक पेड़ लगाबो,महतारी के नाव में।मया अउ दुलार हम पाबो,जेखर कोंवर छाँव में।पेड़ लगा के निसदिन करबो,हम ओखर निगरानी।जरूरत परे मा देवत रहिबो,सरलग खातू पानी।मया अउ दुलार ल पाके,ओ रुख ह जब बाड़ जाही।कोवर कोवर छाँव दिही अउ,सुघ्घर फूल फर आही।दाई के अंचरा कस छाँव म,अपन थकान ल मिटाबो।ओखर परोसे कस गुरतुर,फल फलहारी खाबो।हर मइनखे ल तइयार करन,जम्मो शहर …
Read More »कविता @ बाल श्रमिक…
आज एक नए युग,भारत का उदय हो रहा।देश में बहुत से, बालयुवा अंधेरों में जी रहा।अपने जिंदगी तंग आकर, होटलढाबा कारखाना में काम कर रहा।हालात और गरीबी से मजबूर,श्रमिकों के समक्ष गहरा रहा।जिनके हाथों में कलम किताब,वो मजदूरी दिहाड़ी कर रहा।बच्चे देश का निर्माण भविष्य,भारत का संविधान भी कह रहा।गरीबी की खातिर पेट के लिए,दो वक्त रोटी कमाने निकल रहा।पढ़ने …
Read More »लेख @ पृथ्वी की उष्णता और जटिल समाधान, भविष्य ऑक्सीजन के बगैर ?
आजादी हमें मिली है यानी कि मानव को परंतु प्रकृति आजादी से अछूती रही है। अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी कि हमको उद्योग धंधे का विकास तीव्र गति से करना पड़ा। मशीनें जितनी बड़ी से बड़ी होती गई आदमी उतना ही बौना होता गया। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता …
Read More »लेख @ अब यही मेरी दुनिया है: एक स्त्री की चुपचाप क्रांति
कुछ औरतें मायके के बिना जीना सीख जाती हैं-न माँ की गोद,न भाई का कंधा, फिर भी हर रिश्ता निभाती हैं। दुख पी जाती हैं, आँसू अपने आँचल से पोंछ लेती हैं। कोई नहीं कहता बेटी थक गई होगी, पर वह खुद को समझा लेती है कि यही अब उसकी दुनिया है। यह कोई हार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की चुपचाप …
Read More »लेख @ शादी अब बहुत सोच समझ कर करें अन्यथा कुंवारा रहें
हाल ही एक न्यूज टीवी पर जोरों से चल रहा है। बेवफा सोनम ने रची पति राजा की हत्या की साजिश, मेघालय में हनीमून मर्डर केस पर गाइड ने कहा-मुझे खुशी है कि सलाखों के पीछे हैं अपराधी। मेघालय में पिछले महीने लापता हुए नव विवाहित दंपती राजा और सोनम रघुवंशी के साथ तीन अज्ञात व्यक्तियों की मौजूदगी के बारे …
Read More »सम्पादकीय @ देश की मौजूदा राजनीति में न्यायपालिका की भूमिका महत्त्वपूर्ण
प्रधान न्यायाधीश बीआर गंवई ने कहा है कि न्यायपालिका व विधायिका का मौलिक कर्तव्य है, देश के उस आखिरी नागरिक तक पहुंचना जिसे न्याय की जरूरत है। उन्होंने कहा, जब भी संकट आया, भारत एकजुट रहा। इसका श्रेय संविधान को दिया जाना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता चैंबर भवन व मल्टीलेवल पार्किग के उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, संविधान …
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