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संपादकीय

लेख@संविधान के असली हत्यारे कौन?

जब अवसरवाद शर्मको भी खा जाता हैआपातकाल:लोकतंत्र पर लगापहला आधिकारिकताला…जनता ने विरोधकिया, फिर क्षमाभी दी…बदले हुए चेहरे,वही मौकापरस्तीआज की सत्ता क्यासच में लोकतांत्रिक है?संविधान की हत्याके असलीअपराधी कौन? राजनीति में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन चरित्रहीनता नहीं। आज जो नेता इंदिरा गांधी को कोसते हुए ‘संविधान बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं, कल को वही सत्ता में बने रहने के लिए …

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लेख@बेटियों के लिये मोह बढ़ना संतुलित समाज का आधार

दुनियाभर में माता-पिता आमतौर पर अब तक बेटियों की तुलना में बेटों को ज्यादा पसंद करते आ रहे हैं, लेकिन प्राथमिकताओं को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण में एक सूक्ष्म,महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अब लड़के की तुलना में लड़कियों को अधिक पसंद किया जाने लगा है। ऐसा इसलिए हो …

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@कविता @ज्ञान समन्दर..

लगा किताबों का मेला है, ज्ञान समन्दर जैसा।देख-देख कर सिर चकराता, है अथाह ये ऐसा।।सबसे प्यारी भाषा लगती,राजदुलारी हिन्दी।बात-बात पर मुँह लटकाती,नहीं लगे जब बिंदी।।नदी पहाड़ी जंगल घाटी,सबका नाम बताते।गोल-गोल भूगोल पढ़ें तो,चक्कर खा गिर जाते।।कभी भाग अरु गुणा करें हम,कभी घटा कर जोड़ें।अमरबेल सा उलझे दिनभर,माथा कितना फोड़ें।।अपनी धाक जमा कर बैठी,अंग्रेजों की भाषा।पढ़ ना पाओ कक्षा में तब,बनता …

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@कविता @मदिरापान…

एक मदिरापान करने वालाकेवल मद्य ही नहीं पीतापी जाता है घर के सुकूनबच्चों के सपने,माता-पिता के अरमानखुद की सम्मान,इसके अलावा भीगृह के बर्तन-भाड़ा,घर को बनाकर अखाड़ाछीन लेता है सुख-शांति कोमिलकियत,शोहरत भांति-भांति कोजो बिखेर देता है परिवार कोभर देता है..आँसू जार-जार कोअसीम-असीम कर्ज में डूबाकरकुल-कुटुम्ब को जीवन से उबाकरसबके जीवन को नरक बना देता हैबच्चों के भाग में कीचड़ समा देता …

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लेख@अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं मादक पदार्थ निषेध दिवस 26 जून पर विशेष@चिंता का सबब बनता युवा सोच पर नशे का ग्रहण

नशा मुक्त भारत बनाने की बड़ी चुनौतीविश्व के अनेक देशों में लोगों में और खासकर युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए ही हर साल 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं मादक पदार्थ निषेध दिवस’ मनाया जाता है। जहां तक भारत …

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@लेख@ आपातकाल में प्रतिबंध के बावजूद और सशक्त होकर उभरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

आपातकाल नाम सुनते ही शरीर में एक अलग ही झनझनाहट शुरू हो जाती है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे चर्चित और विवादित रहे आपातकाल को 50 वर्ष बीत चुके हैं। हर वर्ष जून मास आते ही घाव पुनः गहरे हो जाते है। आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी काफी प्रभावी रही है। संघ ने आपातकाल का …

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@कविता@यही है प्रेम…

चातक का स्वाति नक्षत्र की बूॅंद की तलाश से,रात में पतंगे का दीपक की लौ के प्रकाश से,भंवरों का भोर की पहली किरण के इंतजार से,तितलियों का उपवन में छाई चटक बहार से,अनवरत अनंत अशेष आनंद प्रवाह यही है प्रेमसूरजमुखी का प्रभाकर के उतार चढ़ाव से,नदी का सिंधु की ओर उठते गिरते बहाव से,कृषकों का खेतों में महकती सौंधी मिट्टी …

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@कविता@आपसे क्या मांगू

प्रभु दुःख आपने दिया है आपसे सुख क्या मांगू।प्रभु भोग आपने दिया है आपसे तृप्ति क्या मांगू।प्रभु ज्ञान आपने दिया है आपसे चेतना क्या मांगू।प्रभु साहस आपने दिया है आपसे शक्ति क्या मांगू।प्रभु प्रेम आपने दिया है आपसे वैराग्य क्या मांगू।प्रभु चिंतन आपने दिया है आपसे चिंता क्या मांगू।प्रभु मिलन आपने दिया है आपसे बिछोह क्या मांगू।प्रभु जब पर्दा आपने …

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@लेख@ क्रॉस वोटिंग:सपा में ‘पीडीए’ की रक्षा या अनुशासन का दिखावा?

समाजवादी पार्टी ने जिस अंदाज में अपने तीन बागी विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है,उसने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ यह अनुशासन का संदेश है, तो दूसरी ओर जातीय समीकरणों का राजनीतिक संतुलन भी। लेकिन बात सिर्फ निष्कासन की नहीं है,असली सवाल यह है कि सात में से केवल तीन पर ही …

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@लेख@ 2005 में अमेरिका के दबाव में झुकी कांग्रेस,अब ईरान पर नैतिकता की दुहाई क्यों?

पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई उथल-पुथल ला दी है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी द्वारा हाल ही में एक अंग्रेज़ी अख़बार में प्रकाशित लेख ने खासा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की …

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