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संपादकीय

लेख @ घरेलू हिंसा का घेरा कहां तक?

महिलाओं के लिए उनका घर-आंगन सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। परिवार और परिवेश में अपनों का संबल मिलना चाहिए। मान-सम्मान की रक्षा होनी चाहिए। दुखद है कि भारत ही नहीं, कमोबेश हर देश में घरेलू हिंसा का दंश महिलाओं के हिस्से है । मन और मान को ठेस पहुंचाने वाले इस बर्ताव के रंग-ढंग भले अलग हों, वैश्विक स्तर पर …

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सम्पादकीय @ तथ्यों को दबाकर रखना संभव नहीं

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को सिंगापुर में जो कहा है वह सबकी आंखें खोल देने वाला है। इससे साबित होता है कि जब दो देशों के बीच छिटपुट सैन्य संघर्ष की स्थिति हो तो ऐसे में असत्य अवधारणाओं और समर्थक मीडिया के सहारे ही बढ़त नहीं ली जा सकती। तथ्यों को दबाना संभव नहीं होता …

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कविता @ पेड लगाबो…

आवव एकक पेड़ लगाबो,महतारी के नाव में।मया अउ दुलार हम पाबो,जेखर कोंवर छाँव में।पेड़ लगा के निसदिन करबो,हम ओखर निगरानी।जरूरत परे मा देवत रहिबो,सरलग खातू पानी।मया अउ दुलार ल पाके,ओ रुख ह जब बाड़ जाही।कोवर कोवर छाँव दिही अउ,सुघ्घर फूल फर आही।दाई के अंचरा कस छाँव म,अपन थकान ल मिटाबो।ओखर परोसे कस गुरतुर,फल फलहारी खाबो।हर मइनखे ल तइयार करन,जम्मो शहर …

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कविता @ बाल श्रमिक…

आज एक नए युग,भारत का उदय हो रहा।देश में बहुत से, बालयुवा अंधेरों में जी रहा।अपने जिंदगी तंग आकर, होटलढाबा कारखाना में काम कर रहा।हालात और गरीबी से मजबूर,श्रमिकों के समक्ष गहरा रहा।जिनके हाथों में कलम किताब,वो मजदूरी दिहाड़ी कर रहा।बच्चे देश का निर्माण भविष्य,भारत का संविधान भी कह रहा।गरीबी की खातिर पेट के लिए,दो वक्त रोटी कमाने निकल रहा।पढ़ने …

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लेख @ पृथ्वी की उष्णता और जटिल समाधान, भविष्य ऑक्सीजन के बगैर ?

आजादी हमें मिली है यानी कि मानव को परंतु प्रकृति आजादी से अछूती रही है। अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी कि हमको उद्योग धंधे का विकास तीव्र गति से करना पड़ा। मशीनें जितनी बड़ी से बड़ी होती गई आदमी उतना ही बौना होता गया। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता …

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लेख @ अब यही मेरी दुनिया है: एक स्त्री की चुपचाप क्रांति

कुछ औरतें मायके के बिना जीना सीख जाती हैं-न माँ की गोद,न भाई का कंधा, फिर भी हर रिश्ता निभाती हैं। दुख पी जाती हैं, आँसू अपने आँचल से पोंछ लेती हैं। कोई नहीं कहता बेटी थक गई होगी, पर वह खुद को समझा लेती है कि यही अब उसकी दुनिया है। यह कोई हार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की चुपचाप …

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लेख @ शादी अब बहुत सोच समझ कर करें अन्यथा कुंवारा रहें

हाल ही एक न्यूज टीवी पर जोरों से चल रहा है। बेवफा सोनम ने रची पति राजा की हत्या की साजिश, मेघालय में हनीमून मर्डर केस पर गाइड ने कहा-मुझे खुशी है कि सलाखों के पीछे हैं अपराधी। मेघालय में पिछले महीने लापता हुए नव विवाहित दंपती राजा और सोनम रघुवंशी के साथ तीन अज्ञात व्यक्तियों की मौजूदगी के बारे …

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सम्पादकीय @ देश की मौजूदा राजनीति में न्यायपालिका की भूमिका महत्त्वपूर्ण

प्रधान न्यायाधीश बीआर गंवई ने कहा है कि न्यायपालिका व विधायिका का मौलिक कर्तव्य है, देश के उस आखिरी नागरिक तक पहुंचना जिसे न्याय की जरूरत है। उन्होंने कहा, जब भी संकट आया, भारत एकजुट रहा। इसका श्रेय संविधान को दिया जाना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता चैंबर भवन व मल्टीलेवल पार्किग के उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, संविधान …

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कविता @ जलने लगा है पर्यावरण…

मचा हुआ है हाहाकार, इस भीषण गर्मी के कारणधरती अम्बर धधक रहा है, जलने लगा है पर्यावरण।जीव-जगत हैं,त्राहि-त्राहि, हरियाली भी है हलाकानपेड़-पौधे ये झूलस रहे है,और झूलसे हैं सारा जहान।पेड़-पौधे बिलख रहे हैं,और ये छाया भी है परेशानपेड़ों की कोई दर्द न जाने अनजां बना है यह‌ इंसान।एक पेड़ कोई, लगाता नही, सैकडों उजाड़ जाता हैयह इंसान अपने पैरों पर …

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कविता @ एक पेड़ काटा अगरतो सौ पेड़ लगाना…

मानवता खतरे में पड़ी है यह सबको है समझानाप्रकृति से खिलवाड़ नही करना पर्यावरण है बचानाउन्नति के नाम पर जो हमने काट डाले जंगलएक पेड़ काटा अगर तो सौ पेड़ है लगानापेड़ भी काट दिए काट दी छोटी झाडि़यांमैदान बना डाली वह सुंदर दिखती पहाडि़यांछाया के लिए ढूंढता फिर रहा कोई घना पेड़चुकानी तो पडेगी तुझे यह सब देनदारियांलगा दी …

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