पैतृक संपति का बंटवारा? क़ानूनी अधिकार अपनी जगह हैं,लेकिन रिश्तों की अहमियत भी समझें। पहले के समय में भाई-बहन का रिश्ता बहुत भावनात्मक और अपनापन भरा होता था। त्योहार,पारिवारिक मिलन और आपसी सहयोग रिश्तों को मज़बूत बनाते थे। लेकिन आज के दौर में, समाज और परिवार की संरचना में कई बदलाव आए हैं। आजकल लोग अपने करियर,निजी जीवन और स्वतंत्रता …
Read More »संपादकीय
लेख@‘सिन्दूर’ अब श्रृंगार ही नहीं,शौर्य का प्रतीक
सिन्दूर,जो प्राचीन काल से भारतीय नारी के वैवाहिक जीवन का प्रतीक रहा है,आज एक नए अर्थ में उभर रहा है। यह केवल सुहाग का प्रतीक नहीं,बल्कि नारी शक्ति, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बनता जा रहा है। यह बदलाव केवल एक सांस्कृतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। भारतीय समाज में सिन्दूर का स्थान अत्यंत पवित्र माना …
Read More »कविता@घाम…
अड़बड़ हावय घाम जी,चट ले जरथे चाम।आगी उगलत हे सुरुज,का करिहव गा काम।।का करिहव गा काम,देंह हा जी अगियाथे।तात-तात हे झाँझ,भोंभरा घलो जनाथे।।आन-तान झन खाव,पेट हो जाथे गड़बड़।रखव गोंदली संग,घाम हावय जी अड़बड़।।अइसन गरमी आय हे,देख चाम जर जाय।चटचट तीपय घाम मा,देंह घलो करियाय।।देंह घलो करियाय,धरे अब्बड़ गा झोला।ककड़ी खीरा खाव,जुड़ालव संगी चोला।।घाम हवय गा पोठ, बरत आगी के जइसन।छुटय …
Read More »कविता @ भीत…
एक आदमी दब गया,दीवार के नीचेजैसे चूहे आ गए हो,विशाल मतंग के नीचेउच्च ध्वनि की गूँज,मृत्तिका की ऊँची पुंजकराहें निकल पड़ीरोदन चित्कार सुनाई पड़ीकाल कलवित बेचारा,अपार दुःखों का माराकही नही शोर-शराबेंशोक सभाओं की गाजे-बाजेन कही कवरेज मिला,न मीडिया में सेज मिलाइस विशाल देश में एक परिंदा मरा हैजो नही नामी चेहरा हैकीट-पतंगों की कोई बिसात नहीदरिद्रों की यहाँ कोई जात …
Read More »लेख@महान परमाणु वैज्ञानिक डॉ. एमआर श्रीनिवासन नहीं रहें
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. एमआर श्रीनिवासन का मंगलवार,20मई 25 को 95 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। डॉ. श्रीनिवासन सितंबर 1955 में परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) में शामिल हुए और उन्होंने भारत के पहले परमाणु अनुसंधान रिएक्टर, अप्सरा के निर्माण पर डॉ. …
Read More »लेख@गद्दारी का साया:जब अपनों ने ही बेचा देश
मुठ्ठी भर मुगल और अंग्रेज देश पर सदियों राज नहीं करते यदि भारत में गद्दार प्रजाति न होती। यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी कुछ गद्दारों ने दुश्मन को भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी बेची,जिससे हमारे सैनिकों की जान खतरे में पड़ी। आज भी, जब लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए राष्ट्रीय …
Read More »लेख@समूची मानवता का शत्रु है आतंकवाद
आतंक को हर हाल में करना होगा परास्त जम्मू-कश्मीर दशकों से आतंक के खौफनाक साये में जी रहा है। बीते कुछ दशकों में आतंकियों ने देश के अन्य हिस्सों में भी कभी किसी भरे बाजार में तो कभी किसी बस या ट्रेन में आतंकियों ने निर्दोषों के लहू से होली खेली है। यह एक ऐसी विकराल समस्या है,जिसने न केवल …
Read More »लेख@मेरी माँ-तेरी माँ
माँ है तो हम है,माँ हैं तो जहान हैं। माँ की छाव से बड़ी कोई दुनिया नहीं। माँ के चरणों में जन्नत हैं और उस जन्नत की मन्नत सदा-सर्वदा हम पर आसिन हैं। मॉं की बरकत कभी भेदभाव नहीं करती वह समान रूप से सभी बच्चों पर बरसती हैं। माँ के लिए कोई औलाद तेरी-मेरी नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ …
Read More »लेख@सैन्य टकराव रुकने को किस तरह देखा जाए?
भारत-पाकिस्तान के बीच सैनिक संघर्ष रु कने पर हम देश की प्रतिक्रिया देखें तो बड़ा वर्ग,जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,मोदी सरकार और भाजपा के समर्थक कार्यकर्ता शामिल हैं नाखुश दिखाई देते हैं।इन्हें लगता है कि भारत के पास पाकिस्तान को धूल चटाकर, ऐसा पंगु बना देने का अवसर था जिससे वह लंबे समय तक भारत को घाव देने की सोचे भी …
Read More »लेख@अद्भुत और अनोखा भोपाल का राष्ट्रीय मानव संग्रहालय
18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस मनाया जाता है,जिससे संग्रहालयों के महत्व को रेखांकित किया जा सके। भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर अद्वितीय है। खजुराहो के मंदिरों में उकेरी नृत्य-संगीत और दार्शनिक मूर्तियाँ,साँची का बौद्ध स्तूप जो शांति और स्थापत्य का प्रतीक है, और भीमबेटका की गुफाएँ जो मानव सभ्यता के प्रारंभिक चित्रों को समेटे हुए हैं-ये सभी स्थल …
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