Breaking News

कविता@असहजता…

Share


संघर्ष है तो हारने के डर सेफिर विराम क्यों?
राम है तो औरों से फिर काम क्यों?
ज्ञान है तो फिर अज्ञानता का भार क्यों?
जीत की तलब है तो फिर हार का खौफ क्यों?
अजनबी हूँ तो फिर इतना अपनापन क्यों?
अहम है तो फिर वहम भरी बातें क्यों?
सहज हो तो फिर व्यवहार में असहजता क्यों?
ज्ञात है सब तो फिर अज्ञात का बोध क्यों?
जीवंत हो तो फिर मरण से भय क्यों?


Share

Check Also

संपादकीय@क्या चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री तय?

Share जमानत के बाद बढ़ी लोकप्रियता, सोशल मीडिया से सड़कों तक गूंजते नारेछत्तीसगढ़ की राजनीति …

Leave a Reply