- भरतपुर-सोनहत विधानसभा में भाजपा को किसने किया कमजोर,वर्तमान साा दल के विधायक को हराने की काबिलियत किस्में?
- वर्तमान में पूर्व विधायक व उनका एक समर्थक कर रहा टिकट की दावेदारी कैसे होगी इसकी नैया पार?
- विधानसभास्तरिय संयुक्त मोर्चा सम्मेलन में कई पार्टी पदाधिकारियों की हुई उपेक्षा,नहीं दिखा प्रोटोकॉल?
–रवि सिंह –
कोरिया सोनहत,06 जून 2023 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले के तीनों विधानसभा में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था और सबसे बड़ी हार भरतपुर सोनहत में भाजपा को देखनी पड़ेगी, वहां पर सबसे ज्यादा मतों से भाजपा प्रत्याशी को हारना पड़ा था, भाजपा प्रत्याशी को सबसे ज्यादा मतों से हराने वाले प्रत्याशी कांग्रेस के गुलाब कमरों थे, गुलाब कमरों भरतपुर सोनहत से सत्ता दल के विधायक हैं और 2023 विधानसभा चुनाव में उन्हें हराने के लिए भाजपा को बहुत मजबूत प्रत्याशी उतारना पड़ेगा, ऐसे में क्या पूर्व विधायक व उनका एक समर्थक सत्ता दल के विधायक से मजबूत हो पाएंगे यह बड़ा सवाल है? क्या पूर्व विधायक को 2023 में भाजपा की तरफ से प्रत्याशी बनाया जाएगा इसे लेकर सुगबुगाहट सुनाई तो दे रही है पर यह भाजपा है जिसे लेकर पूर्व विधायक की टिकट फाइनल मानना बड़ा मुश्किल है, जब तक कि प्रत्याशी की घोषणा ना हो जाए। खैर चुनाव आते ही पूर्व विधायक की सक्रियता बढ़ गई है और अपने सक्रियता के भरोसे टिकट पाने की लालसा भी लगा बैठी हैं।
बिते कुछ दिनों से भाजपा का विधानसभा क्षेत्र भरतपुर सोनहत के संयुक्त मोर्चा सम्मेलन का कार्यक्रम सोनहत में आयोजित था। इस बैठक के मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता जोगेश लांबा थे उनके साथ में पूर्व विधायक चंपा देवी पावले का भी आगमन हुआ था, यह बैठक सभी मोर्चों के कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव व संगठन को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया था. लेकिन सूत्रों के अनुसार इस कार्यक्रम में अपेक्षित कई पार्टी पदाधिकारी उपस्थित नहीं रहे, हालांकि की कार्यक्रम में दो तीन सौ की संख्या में भीड़ जूटा ली गई थी लेकिन जिन कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य थे वें नहीं पहुंच पाए जिससे आगामी समय में भाजपा की क्या स्थिति होगी स्पष्ट है।
क्या सिर्फ फूल माला पहनकर स्वागत करने या करवाने से बनेगी भाजपा की विधायक?
भरतपुर सोनहत विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा है, चुनाव हारने के बाद से अनेकों ऐसे अवसर विपक्षी दल भाजपा को मिला जहां से वर्तमान विधायक को बैक फुट में रखा जा सकता था लेकिन इस विधानसभा में लीडरशिप की कमी लगातार साढ़े चार सालों से देखने को मिली। जहां इस विधानसभा क्षेत्र के चाहे भाजपा कार्यकर्ताओं के उपर सत्तापक्ष द्वारा गलत तरीके से परेशान करने की बात हो या सत्तापक्ष के गलत कार्यों का विरोध करने वाले विपक्षी कार्यकर्ताओं पर दबाव वाली राजनीतिक जूल्म या प्रशासनिक कार्रवाई या फिर आमजनता की समस्याओं को लेकर लड़ाई लड़ने की बात हो ऐसे अनगिनत मौके पर देखा गया कि कोई बड़ा नेता ऐसे मामलों पर आगे नहीं आया तथा नहीं सत्तापक्ष का विरोध कर पाया। जबकि वर्तमान समय में भारी अंतर से हार के बाद भी पूर्व विधायक टिकट की दावेदारी कर रही तथा अपने सोनहत क्षेत्र के एक चहेते समर्थक को भी टिकट की दावेदारी करवा रही है। लेकिन अनेकों अवसर विपक्ष की भूमिका में सत्ता पक्ष से आमजनता या कार्यकर्ताओं के लिए साकारात्मक लड़ाई लड़ कर नेतृत्वकर्ता बनने का अच्छा मौका लेकिन उस समय अपने को किनारे कर लगातार बैठे देखे गए। सूत्रों के अनुसार पूर्व विधायक के कार्यकाल से कार्यकर्ताओं व आमजनता में भारी नाराजगी है जिसका परिणाम पिछले चुनाव में मिल चुका है वर्तमान समय में भी पूर्व विधायक काफी निष्कि्रय है, क्षेत्र में अगर यह निकलती भी है तो या किसी मण्डल में दौरा भी करती हैं तो सिर्फ फूल माला पटाखों से स्वागत करवाने के लिए विधानसभा के किसी भी मण्डल की बात हो पूर्व विधायक आमजनता या आम कार्यकर्ता से मिलने नहीं जाती सिर्फ गिने चुने एक दो समर्थकों के यहां चाय पीकर लौट जाती है ऐसी स्थिति में पूर्व विधायक को टिकट मिलने के बाद पार्टी की क्या स्थिति होगी या टिकट मिलने के बाद कैसे चुनाव जीत पायेगी यह भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है?
विधानसभा भरतपुर सोनहत में भाजपा को किसने किया कमजोर?
विधानसभा भरतपुर सोनहत में पिछले 10 वर्षों से भाजपा का कब जा रहा है लेकिन पिछले चुनाव में भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था जिसका कहीं ना कहीं मुख्य कारण टिकट ना बदलने को लेकर था क्योंकि तत्कालीन विधायक के कार्यकाल से पार्टी के कार्यकर्ता वह आम जनता भारी असंतुष्ट थी जहां प्रदेश नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक इस सीट को जीतने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं वही इस विधानसभा में अभी तक पूर्व विधायक ने कोई नया लीडर नहींआने दिया है। जबकि दो नये चेहरे लगातार सक्रिय हैं तथा जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि भी है। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों नेताओं को भी साईड लगाने का प्रयास पूर्व विधायक द्वारा लगातार किया गया है। क्यों कि यह नये चेहरे विधानसभा के प्रबल दावेदार व भारी जनाधार वाले दिग्गज नेता हैं। लेकिन इस विधानसभा में अभी भी पूर्व विधायक अपने चहेते समर्थकों को पद दिलवाकर उन्ही के भरोसे कजा जमा कर बैठी जबकि पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता दबी जुबान से लगातार विरोध कर रहे है व चुनाव में नये प्रत्याशी की मांग भी कर रहे है जिसका कारण पूर्व विधायक द्वारा विपक्ष में भी कार्यकर्ताओं का सहयोग ना करना कार्यकर्ताओं से ठीक ठाक तालमेल न बनाना उनका हालचाल ना जानना या सत्ता पक्ष के गलत कार्यों का मुखरता से विरोध ना करना और कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध करने पर उनका साथ ना देना है ऐसे स्थितियों में यह देखने को मिल रहा है कि पूर्व की भांति वर्तमान समय में इस विधानसभा को कमजोर करने में पूर्व विधायक की मुख्य भूमिका रही है।
वर्तमान में पूर्व विधायक व उनका एक समर्थक कर रहा टिकट की दावेदारी कैसे होगी इसकी नैया पार?
वर्तमान में भरतपुर सोनहत में विधानसभा सीट में टिकट के लिए लगभग पांच दावेदार सामने आ रहे है। जिसमें पूर्व विधायक व दो जिपं सदस्य तथा एक पूर्व विधायक का समर्थक तथा एक अन्य. भाजपा को विपक्ष में आए साढ़े 4 साल हो गए ऐसे में ना कार्यकर्ताओं के लिए कुछ कर पाना ना पार्टी का क्षेत्र में नेतृत्व कर पाना ना आम जनता की समस्याओं के लिए मुखरता से समाधान करवाना ऐसी परिस्थिति में पूर्व विधायक व समर्थक दावेदार कैसे चुनाव जीतेगा यह सबसे बड़ा सवाल है क्योंकि पूर्व विधायक से पार्टी कार्यकर्ताओं सहित आमजनता काफी नाराज़ हैं, पूर्व विधायक को भाजपा ने पहली बार 2013 में चुनाव लड़ाया जब रमन सिंह के नाम पर चुनाव जीत गए, लेकिन आगे कैसे राजनीति सफर में बढ़ना है इसपर ध्यान नहीं दिया और जनता से दुरी बना ली जिससे पिछले चुनाव में अपने ग्रह ग्राम से भी हार गई इससे पता चलता है कि पूर्व विधायक का जनाधार कितना कम है व इनका समर्थक दावेदार का भी कोई जनाधार नहीं है अपने गांव में कार्यकर्ता व अन्य जनता से भी इनका कोई अच्छा संबंध नहीं है, पार्टी के कार्यक्रमों में मण्डल स्तर पर लगातार कार्यकर्ताओं से खींचातानी करते नजर आते है।
विधानसभा स्तरीय संयुक्त मोर्चा सम्मेलन में कई पदाधिकारियों की हुई उपेक्षा नहीं दिखा प्रोटोकोल?
विधानसभा स्तरीय समस्त मोर्चा सम्मेलन कार्यक्रम में पूर्व विधायक के चहेते ने प्रोटोकॉल का कोई पालन नहीं किया और जिले के महामंत्री तथा मंडल के दो महामंत्रियों की उपस्थिति में खुद मंच का संचालन करने लगे इस बीच कई पदाधिकारी व महामंत्री सिर्फ मूंह ताकते रहे. संचालन के दौरान अतिथियों के स्वागत के समय अपना मनमर्जी लगातार मंच पर करते रहे और कई पदाधिकारियों और जिले के पदाधिकारियों को अतिथियों के स्वागत करने नहीं बुलाया गया जिससे कई कार्यकर्ता नाराज हो गए नाराजगी ऐसी थी की एक युवा नेता कार्यक्रम छोड़ चले गए जिसके बाद दर्जनों की संख्या में अन्य कार्यकर्ता भी कार्यक्रम को छोड़कर चले गए चुनाव से ठीक पहले कार्यकर्ताओं का ऐसे नाराज होना क्या भाजपा के लिए सही साबित होगा? कुल मिलाकर अनुशासन के लिए जाने जानी वाली पार्टी में अनुशासन देखने को नहीं मिला और सिर्फ पूर्व विधायक के चहेते होने के नाते एक व्यक्ति ने अपनी मनमर्जी के मुताबिक कार्य किया व कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी।
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