- एक पत्रकार संगठन के मंच से विधायक ने कहा था कि पत्रकार भी उनके क्षेत्र के मतदाता है
- मतदाताओं का मदद करना विधायक का कर्तव्य है पर किन मतदाताओं का मदद करना विधायक का कर्तव्य है?
- पत्रकार आर्थिक कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें मदद की जरूरत है इसलिए मैंने मदद की थी, पर सवाल क्या मदद मांगी गई थी?
- यदि नहीं मांगी गई थी तो क्या जिले के सारे पत्रकारों की मदद की गई थी?
–रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़ 02 फरवरी 2023 (घटती-घटना)। दिवाली त्योहार के मौके पर मनेन्द्रगढ़ विधायक द्वारा अनुदान राशि का चेक पत्रकारों को सहयोग के तौर पर बाटा गया था पर यह सहयोग सही में सहयोग था या फिर पत्रकार उनके लिए चुनाव में सहयोग करें यह उनकी सोच थी? कुछ पत्रकारों को यह चेक लेना गवारा ना लगा और वह इस चेक को वापस कर कलेक्टर को पत्र लिख अनुदान राशि के सूची से नाम विलोपित करने की मांग की पर लंबे समय बीतने के बाद भी जिन पत्रकारों ने चेक वापस किया उनका नाम आज तक विलोपित नहीं हुआ और सूची में दिख रहा है जिसे लेकर एक बार फिर से मामला उठ खड़ा हुआ है कि आखिर सूची से नाम क्यों विलोपित नहीं किया जा रहा? वही कुछ दिन पहले एक पत्रकार संगठन के समारोह में विधायक ने बिना अनुदान राशि की बात छेड़े ही उन्होंने स्वयं से ही उस मामले को उठाया और कहने लगे कि पत्रकार उनके क्षेत्र के मतदाता हैं और मतदाता का मदद करना चाहिए पर सवाल यह है कि पत्रकार के अलावा भी 2 लाख मतदाता है क्या सब की मदद इसी प्रकार अनुदान से होना संभव है? उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें मदद करने की आवश्यकता है मैंने इस सोच के साथ मदद की थी पर सवाल यह है क्या जिले के सारे पत्रकारों कि आपने आर्थिक मदद की? क्या पत्रकारों ने आपसे मदद की गुहार लगाई तो आपने उनकी मदद की या फिर उस राशि से पत्रकारों का विज्ञापन का राशि समझ कर दिया? वैसे तमाम तरह के सवाल आज भी खड़े हैं विधायक ऐसे तो चिकित्सक हैं पर ना जाने इनके अंदर दिमाग में क्या चलता है और कब यह क्या बोलते हैं कि इन्हीं की फजीहत हो जाती है उस दिन पत्रकार के कार्यक्रम में बिना बात को छेड़े ही बात कहीं और अपने ही फजीहत कराई थी, पर विधायक जी पत्रकारों को आपके अनुदान राशि की जरूरत नहीं आप ही के सरकार में सुरक्षा की जरूरत है, क्योंकि पत्रकार इस समय सच्चाई दिखा कर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, क्योंकि सच्चाई पचती नहीं और नेताओं में पत्रकार के प्रति द्वेष आ जाता है कृपया कर अपने द्वेष को कम करें और जनता के लिए अच्छा सा अच्छा काम करें जनता ही आपकी मतदाता है और आप जितना अच्छा काम करेंगे मतदाता आपको इतनी बार विधायक बनने का मौका देगा, अनुदान राशि उनको दें जो पैसे के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं और अपनी जान गवा रहे हैं वही खबर लिखने वाले पत्रकारों को आपके ही लोग आंख दिखा रहे हैं उस पर अब गौर करें पत्रकारों को सच दिखाने से रोकने का प्रयास ना करें।
विधायक विनय जयसवाल पर अनुदान राशि का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लग रहा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी विनय जयसवाल पर लोग तरह-तरह के तंज कसते हुए नजर आ रहे हैं। पत्रकार को दी गई कर अनुदान राशि का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। दरअसल विधायक विनय जायसवाल बिन बोले, बिना आवेदन दिए ही पत्रकार पर मेहरबान हो गए और अपनी स्वेच्छा अनुदान राशि से 5 हजार रुपए का चेक पत्रकार के नाम पर काट दिया। हालांकि पत्रकार ने तुरंत चेक वापस कर दिया। अब ये मामला दोबारा उठा है क्योंकि पत्रकार ने कलेक्टर को आवेदन देकर शिकायत की है कि जब उसने स्वेच्छानुदान का चेक लौटा दिया और स्वेच्छानुदान मांगा नहीं तो फिर स्वेच्छानुदान प्राप्त करने वालों की लिस्ट से नाम क्यों नहीं हट रहा है।
दिवाली मिलन समारोह की घटना
ये पूरा मामला मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र का है। जहां महीनों पहले विधायक विनय जयसवाल दिवाली मिलन समारोह का आयोजन किया था। बताया जा रहा है कि इस दौरान विनय जायसवाल ने स्वेच्छानुदान से चेक दिए। वे 5-5 हजार रुपए के चेक का वितरण कर रहे थे। पत्रकार रविकान्त का दावा है कि विधायक बिना बोले ही या बिना आवेदन लगाए ही स्वेच्छा अनुदान राशि का वितरण करने लग गए। इस दौरान ही इसका विरोध करते हुए तत्काल ही उन्होंने स्वेच्छा अनुदान राशि का चेक वापस कर दिया।
कलेक्टर के पास दिया आवेदन
कोरिया कलेक्टर के पास भी आवेदन दिया। आवेदन में पत्रकार ने अपना पूरा परिचय दिया। इसके साथ ही बताया कि उसने किसी भी तरीके से विधायक से अनुदान राशि की मांग नहीं की थी। फिर भी विधायक विनय जायसवाल ने उसे अनुदान राशि का चेक दे दिया था। वो चेक पत्रकार ने तुरंत ही विधायक को वापस कर दिया था। पत्रकार ने कलेक्टर से अनुरोध किया था कि उसके नाम पर जारी चेक को निरस्त कर दिया जाए और अनुदान राशि की सूची से पत्रकार का नाम भी विलोपित किया जाना चाहिए।
चेक पर मेरा हक नहीं कहते हुए लौटाया
पत्रकार ने कहना कि दिवाली मिलन समारोह का आयोजन कर विधायक विनय जायसवाल ने सभी पत्रकारों को अपने कार्यालय में बुलाया था और वहां पर पत्रकारों को 5 हजार का स्वेच्छा अनुदान राशि का चेक वितरण किया गया था। जब मुझे ये चेक मिला तो मैंने ये चेक यह कहते हुए लौटा दिया था कि इस चेक पर मेरा हक नहीं है। विधानसभा के उन लोगों का हक है जो पढ़ाई से और अन्य चीजों से वंचित है।
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