
- नौगई हत्याकांड में सीबीआई की एंट्री तेज, केस डायरी सौंपते ही स्थानीय पुलिस की भूमिका पर बढ़ी नजर
- केस डायरी सौंपते ही स्थानीय पुलिस की भूमिका पर बढ़ी नजर…
- सीबीआई ने संभाली नौगई हत्याकांड की कमान…14 जून की शिकायत से पुलिस की कार्यप्रणाली तक होगी नए सिरे से जांच…
- नौगई तिहरे हत्याकांड : अब सीबीआई खंगालेगी पुलिस की कार्रवाई, केस डायरी सौंपने के बाद जांच का नया अध्याय शुरू…
- केस डायरी सीबीआई को सौंपते ही बढ़ीं उम्मीदें,क्या अब खुलेंगे नौगई हत्याकांड के अनसुलझे राज?
- नौगई हत्याकांड : सीबीआई की जांच में पुलिस की भूमिका भी बनेगी बड़ा सवाल?
- 14 जून की शिकायत,16 जून की एफआईआर और फिर तिहरा हत्याकांड… अब हर कड़ी जोड़ेगी सीबीआई
- सीबीआई के हाथों में नौगई हत्याकांड की पूरी फाइल,अब जांच के दायरे में आएंगे पुलिस के फैसले भी?
- नौगई तिहरे हत्याकांडः सात सदस्यीय सीबीआई टीम ने संभाली जांच,पुलिस की विवेचना का होगा परीक्षण…
- क्या 14 जून की शिकायत दबाना बनी नौगई हत्याकांड की सबसे बड़ी चूक? अब सीबीआई तलाशेगी हर जवाब
-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,15 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश को झकझोर देने वाले नौगई तिहरे हत्याकांड की जांच अब पूरी तरह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में पहुंच चुकी है, सूत्रों से मिली जानकारी कोरिया पुलिस ने इस बहुचर्चित प्रकरण की संपूर्ण केस डायरी,विवेचना से जुड़े दस्तावेज, घटनास्थल का रिकॉर्ड तथा अब तक की जांच संबंधी सामग्री सीबीआई को सौंप दी है,इसके साथ ही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही विवेचना का अध्याय लगभग समाप्त हो गया है और अब पूरे मामले की दिशा तथा जांच का स्वरूप सीबीआई तय करेगी। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन छह सदस्यीय दल के साथ कोरिया पहुंची सीबीआई ने अगले ही चरण में अपनी टीम का विस्तार कर दिया, अब जांच दल में एक अतिरिक्त एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी को भी शामिल किया गया है,जिससे टीम की संख्या सात हो गई है,पहले दिन कोरिया पहुंची सीबीआई की टीम में एक डीएसपी,एक एडिशनल एसपी,दो निरीक्षक और दो आरक्षक शामिल थे, अब टीम में एक और एडिशनल एसपी को शामिल किया गया है,जिससे जांच दल की संख्या सात हो गई है,इससे यह संकेत भी माना जा रहा है कि एजेंसी इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेकर बहुआयामी जांच की तैयारी कर रही है,सूत्रों का मानना है कि यह संकेत है कि सीबीआई इस मामले को केवल एक हत्या के प्रकरण के रूप में नहीं,बल्कि उससे जुड़े सभी परिस्थितिजन्य तथ्यों,पुलिस की भूमिका,पूर्व शिकायतों,प्रशासनिक निर्णयों तथा पूरे घटनाक्रम की श्रृंखला के रूप में देख रही है,सीबीआई के कोरिया पहुंचते ही पूरे जिले का ध्यान इस जांच पर केंद्रित हो गया,मीडिया लगातार एजेंसी की गतिविधियों पर नजर बनाए रही,जबकि मृतकों के परिजनों ने भी उम्मीद जताई कि अब उन्हें निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच के माध्यम से न्याय मिल सकेगा।
घटनास्थल से शुरू हुई जांच,थाने पहुंचकर देखे दस्तावेज और जली गाडि़यां-सीबीआई की टीम सबसे पहले चरचा स्थित विश्रामगृह पहुंची,जहां प्रारंभिक बैठक के बाद अधिकारियों ने सीधे नौगई घटनास्थल का रुख किया,टीम ने उस स्थान का बारीकी से निरीक्षण किया जहां चार लोगों को जिंदा जलाने की वारदात हुई थी,अधिकारियों ने घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति, पहुंच मार्ग, संभावित घटनाक्रम तथा उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों का अध्ययन किया,इसके बाद टीम थाना सोनहत पहुंची,जहां उन्होंने घटना से संबंधित अभिलेख,केस डायरी,जब्ती पंचनामा, बरामदगी रिकॉर्ड,एफआईआर,बयान तथा अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया, थाने परिसर में रखी गई जली हुई गाडि़यों का भी निरीक्षण किया गया, बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि स्थानीय पुलिस ने किन परिस्थितियों में विवेचना की दिशा तय की थी।
अब सीबीआई दर्ज करेगी अपना अलग मामला-सूत्रों के अनुसार सीबीआई अब इस पूरे प्रकरण को अपने रिकॉर्ड में दर्ज करेगी,इसके बाद मामले को एक स्वतंत्र सीबीआई केस नंबर आवंटित किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की विवेचना संचालित होगी, इस प्रक्रिया के बाद सीबीआई स्थानीय पुलिस की विवेचना से स्वतंत्र होकर अपनी जांच करेगी,यदि आवश्यक हुआ तो पूर्व में दर्ज बयान,जब्ती,फोरेंसिक रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
16 जून की शिकायत पर तत्काल अपराध दर्ज,यही सबसे बड़ा सवाल-पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है,14 जून को मयंक सिंह की शिकायत पर अपराध दर्ज नहीं हुआ,जबकि 16 जून को दूसरे पक्ष की शिकायत पर तत्काल अपराध दर्ज कर लिया गया,इसी दिन शाम और रात के बीच घटनाक्रम तेजी से बदला और नौगई का वह जघन्य तिहरा हत्याकांड सामने आया जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया,अब यह अंतर भी जांच का विषय बन सकता है कि दोनों शिकायतों के साथ पुलिस का रवैया अलग-अलग क्यों रहा।
मृतकों के परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर लगाए थे गंभीर आरोप-मृतकों के परिजनों का आरोप था कि स्थानीय पुलिस ने प्रारंभिक जांच में निष्पक्षता नहीं बरती,परिजनों ने यह भी कहा था कि घटना के बाद पुलिस के कुछ प्रारंभिक बयान ऐसे थे,जिनसे उन्हें लगा कि पूरे मामले को अलग दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है,इन्हीं आरोपों के बाद परिजनों ने राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग की थी, सरकार द्वारा अनुशंसा के बाद अब सी बी आई आधिकारिक रूप से जांच कर रही है।
सीबीआई की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय-कोरिया जिले में पहली बार इतने चर्चित मामले में सीबीआई की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिली है, स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि एजेंसी अत्यंत व्यवस्थित तरीके से प्रत्येक तथ्य का सत्यापन कर रही है,पूछताछ के दौरान अधिकारियों द्वारा घटनाक्रम को समय-श्रंखला में समझने,दस्तावेजों का मिलान करने तथा पुलिस की विवेचना के प्रत्येक चरण को समझने का प्रयास किया जा रहा है,इसी कारण स्थानीय पुलिस अधिकारियों के लिए भी यह जांच प्रक्रिया एक अलग अनुभव मानी जा रही है।
क्या पुलिस की भूमिका भी होगी जांच के दायरे में?-अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या सीबीआई केवल आरोपियों की भूमिका की जांच करेगी या फिर पुलिस की कार्रवाई भी जांच के दायरे में आएगी, विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर नजर रहेगी 14 जून की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस को पहले से संभावित विवाद की जानकारी थी? क्या समय रहते सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती थी? क्या दोनों पक्षों के बीच तनाव को देखते हुए पर्याप्त पुलिस व्यवस्था की गई थी? क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई? क्या किसी अधिकारी ने अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया? इन प्रश्नों के उत्तर अब सीबीआई जांच के बाद ही सामने आएंगे।
जांच का दायरा हो सकता है और व्यापक…– कानूनी जानकारों का मानना है कि सीबीआई किसी भी जांच को केवल उपलब्ध एफआईआर तक सीमित नहीं रखती,यदि जांच के दौरान नए तथ्य,नए दस्तावेज,अतिरिक्त साक्ष्य अथवा संभावित लापरवाही सामने आती है तो एजेंसी जांच का दायरा बढ़ा सकती है, यही कारण है कि 14 जून की शिकायत,दोनों पक्षों की एफआईआर,प्रारंभिक पुलिस बयान, घटनास्थल का निरीक्षण, जली गाडि़यां, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर),इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा पुलिस अधिकारियों के निर्णय—सभी अब संभावित जांच के विषय माने जा रहे हैं।
अब पूरे प्रदेश की नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई पर…– कोरिया पुलिस द्वारा केस डायरी सौंपे जाने के बाद अब नौगई तिहरे हत्याकांड की पूरी जिम्मेदारी सीबीआई के कंधों पर है,आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी किन अधिकारियों से पूछताछ करती है,किन दस्तावेजों को सबसे अधिक महत्व देती है और क्या वह इस पूरे घटनाक्रम की जांच केवल हत्या तक सीमित रखती है या फिर उन प्रशासनिक और पुलिसीय निर्णयों की भी समीक्षा करती है,जिन पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, फिलहाल इतना तय है कि यह जांच केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गई है,बल्कि अब यह उन सभी निर्णयों, शिकायतों,कार्रवाई और संभावित चूकों की भी परीक्षा होगी,जिन्होंने इस जघन्य तिहरे हत्याकांड से पहले और बाद में पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पहले चरण में पुलिस अधिकारियों से पूछताछ पर रहेगा जोर…-जानकारी के अनुसार प्रारंभिक चरण में सीबीआई का सबसे अधिक फोकस स्थानीय पुलिस की कार्यवाही को समझने पर रहेगा, जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि घटना से पहले पुलिस को क्या-क्या सूचनाएं मिली थीं,किन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, दोनों पक्षों की शिकायतों का परीक्षण किस प्रकार किया गया, किन आधारों पर अपराध दर्ज किए गए, क्या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी, संभावित विवाद को रोकने के लिए क्या पुलिस बल लगाया गया था, वरिष्ठ अधिकारियों को क्या जानकारी भेजी गई थी,बताया जा रहा है कि प्रारंभिक विवेचना करने वाले अधिकारियों से भी विस्तृत पूछताछ की जा सकती है।
14 जून की शिकायत बन सकती है जांच की सबसे अहम कड़ी…– पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में अब 14 जून 2026 का वह शिकायत पत्र सामने आया है,जिसे घायल मयंक सिंह ने थाना सोनहत में दिया था, इस शिकायत में उन्होंने कथित रूप से त्रिपाठी परिवार के सात लोगों के नाम लेकर अपनी तथा अपने साथियों की सुरक्षा को खतरा बताया था, शिकायत में यह भी उल्लेख था कि उनके साथ किसी भी समय गंभीर अप्रिय घटना हो सकती है,उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस आवेदन पर थाना की प्राप्ति पावती तो दी गई, लेकिन अपराध दर्ज नहीं किया गया, यहीं से कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं यदि शिकायत प्राप्त हुई थी तो प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं हुई? क्या शिकायत की जांच हुई? क्या शिकायतकर्ता को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई? क्या दोनों पक्षों को बुलाकर विवाद समाप्त कराने का प्रयास किया गया? क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना भेजी गई? अब माना जा रहा है कि सीबीआई इस शिकायत पत्र को जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देख सकती है।
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