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लेख@वर्तमान परीक्षा प्रणाली की परीक्षा…

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कोई जमाना था जब विद्यार्थी लोग गुरुकुल में जाकर शिक्षा प्राप्त करते थे। विद्यार्थी लोग अपने गुरुजनों की देखरेख तथा मार्गदर्शन में सब प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे। गुरुकुलों में कहीं भी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता था। जब वह गुरुकुलों से शिक्षा प्राप्त करके बाहर निकलते थे तो वह आदर्श व्यक्ति के तौर पर ही निकलते थे।
तब की तथा अब की शिक्षा प्रणाली में जमीन आसमान का फर्क आ गया है। आजकल गुरुकुलों का स्थान स्कूलों, कॉलेजों तथा यूनिवर्सिटियों ने ले लिया है।डॉक्टर,वकील,इंजीनियर,प्रशासनिक अधिकारियों आदि उच्च पदों के लिए कोटा,दिल्ली,प्रयागराज आदि महानगरों में कोचिंग सेंटर खुल गए। इन कोचिंग सेंटरों में दाखिला अधिकतम अंकों वाले विद्यार्थियों को ही दिया जाता है। अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए 12 वीं पास विद्यार्थी शुरू से ही पब्लिक स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ ट्यूशन पर भी हजारों रुपया खर्च करते हैं ताकि उपर्युक्त कोचिंग सेंटर में दाखिला ले सके। इन कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई के दौरान लाखों रुपया खर्च होता है। एक डॉक्टर बनने के लिए कम से कम एक करोड़ रुपया लगता है। आईआईटी, आई आईएम आदि में दाखिले के लिए बहुत नंबर और पैसा फीस के तौर पर खर्च करना पड़ता है। अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मां बाप को अपना पेट काट कर बचत करनी पड़ती है,उधार लेना पड़ता है,मकान जायदाद बेचनी या गिरवी रखनी पड़ती है ताकि उनके बच्चे ऊंची पढ़ाई पूरी करके ऊंचे पदों पर आसीन होने के अपने सपने पूरे कर सके। यहां यह बात स्पष्ट कर देनी चाहिए कि बड़ी-बड़ी डिग्री दिलवाने वाले कोचिंग सेंटर अमीर लोगों के द्वारा शिक्षा के लिए नहीं बल्कि धन कमाने के लिए ही चलाए जाते हैं। बेशक यह कोचिंग सेंटर अपने यहां दाखिल बच्चों को कठिन परिश्रम से शिक्षा देते हैं,बड़ी-बड़ी डिग्रियां प्राप्त करने में सहायता भी करते हैं। लेकिन इन इन कोचिंग केंद्र वालों का संबंध उन लोगों से भी होता है जो की डॉक्टरी या इंजीनियर की डिग्री के लिए परीक्षा पत्र लाखों रुपया लेकर लीक करवाते हैं। जिनके पास लीक किया हुआ प्रश्न पत्र पहले आ जाता है वह उसी के मुताबिक पहले तैयारी कर लेता है और अधिकतम अंक प्राप्त करके ऊंची डिग्री प्राप्त करके उच्च पद पर असीन हो जाता है। लेकिन बहुत बार विद्यार्थी लोग जब प्रतियोगी परीक्षा के लिए अपने-अपने सेंटर में जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक होने की वजह से पेपर कैंसिल हो गया है,उन्हें निराशा होती है,दिल टूट जाता है,मां बाप के द्वारा उधार लेकर उन पर किया हुआ खर्च बेकार जाता हुआ लगता है और उन्हें लगता है कि वह लोग दोबारा पेपर की तैयारी नहीं कर सकेंगे। उनके सपने टूट जाते हैं। अभी कुछ समय पहले नीट की परीक्षा का पेपर लीक हो गया। लाखों विद्यार्थियों के सपना चकनाचूर हो गए। कुछ विद्यार्थियों ने आत्महत्या भी कर ली। देश में विद्यार्थियों ने रोश प्रदर्शन किया। सरकार ने नीट की परीक्षा के लिए इंमरी कमिटी भी नियुक्त की गई।नीट की परीक्षा दोबारा बिना कोई फीस लिए कराने का आश्वासन दिया। यह पहली बार है कि किसी परीक्षा के लिए प्रश्न पत्रों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों का प्रयोग किया गया।
नीट जैसी परीक्षा का पेपर आउट होना यह कोई पहली बार नहीं हुआ इससे पहले भी कभी रेलवे की,कभी क्लर्कों की परीक्षा के पेपर लीक होते रहे हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई फूल प्रूफ सिस्टम नहीं बनाया गया के पेपर आउट ना हो। लेकिन परीक्षा व्यवस्था से संबंधित कर्मचारियों तथा अधिकारियों ने कोई सबक नहीं सीखा ना ही किसी को सजा मिली । पेपर आउट करने वाला माफिया कोई ना कोई तरीका ढूंढ ही लेता है। परीक्षा व्यवस्था से संबंधित कुछ समस्याएं हैं उनके बारे में किसी ने अभी तक समाधान नहीं किया। जैसे-4000 पदों के लिए दो दो लाख विद्यार्थी परीक्षा देने जाते हैं। विभिन्न परीक्षा सेंट्रो पर साथ आए अभिभाविकों के बैठने, पीने के पानी, पंखे आदि की कोई व्यवस्था नहीं होती। अपने घर से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए उन्हें बसों और रेलगाडि़यों की छत पर बैठकर जाना पड़ता है। किराया खर्च करके जब वह परीक्षा केंद्र में पहुंचते हैं तो उन्हें पता चलता है की पेपर लीक हो गया है। उनके अभिभावकों तथा बच्चों के सपने टूट जाते हैं क्योंकि इस पेपर की तैयारी के लिए उन्होंने जो परिश्रम किया था, लाखों रुपए खर्च किए थे,अब इस तरह से दोबारा प्रयास करना उनके बस की नहीं। पेपर लीक होने का पहले स्त्रोत वह व्यक्ति हो सकता है जो पेपर बनाता है, दूसरा स्त्रोत वह जगह हो सकती है जहां पेपर छपते हैं और तीसरा स्त्रोत वह होता है जो इनके पेपरों की चोरी करता है और पेपर लाखों रुपए में बेचता है। मैं शिक्षा जगत से लंबे समय से जुड़ा रहा हूं। मेरा अनुभव यह कहता है कि किसी न किसी लेवल पर मिली भगत के बिना पेपर लीक नहीं हो सकता। पहले समय में जब प्रश्न पत्र परीक्षा केंद्र में बांटा जाता था तो वहां से किसी चपरासी या क्लर्क के द्वारा पेपर बाहर फोटो स्टेट करा लिया जाता था और नकल करवाने वाले उन प्रश्नों के उत्तर संबंधित विद्यार्थी के पास पहुंचाते थे। लेकिन आजकल परीक्षा व्यवस्था बदल गई है। वर्तमान व्यवस्था में कई बार परीक्षा केंद्र में जितने कंप्यूटर होते हैं उनके मुकाबले में परीक्षा देने वाले विद्यार्थी बहुत ज्यादा होते हैं जिसकी वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ती है। एक तरफ उच्च शिक्षा प्राप्त करके युवा लोग डिग्रियां लिए करते हैं और दूसरी तरफ उनको उसके मुताबिक नौकरी नहीं मिलती। नए विद्यार्थियों को पेपर लीक का सामना करना पड़ता है। इन बातों को लेकर देश के विभिन्न नगरों के युवा लोग आक्रोश में है। बहुत साल पहले उपलब्ध नौकरियों को ध्यान में रखकर ही विभिन्न प्रकार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता था। आजकल शिक्षा के क्षेत्र में नैतिकता नाम की कोई चीज देखने को नहीं मिलती। जब कि शिक्षा का क्षेत्र गंगा की तरह पवित्र होना चाहिए। नीट की परीक्षा में जो पेपर लीक हुआ है उसको लेकर कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है और उन्होंने अपना अपराध स्वीकार भी कर लिया गया है। लेकिन इसके बावजूद भी समय-समय पर पेपर लीक होने,डिग्रियों के बावजूद रोजगार न मिलने के विरोध में युवा लोग विभिन्न शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी देश का भविष्य युवाओं पर निर्भर करता है। अगर हम अपने देश में डॉक्टर,इंजीनियर, वकील,प्रशासनिक अधिकारी ज्यादा से ज्यादा पैदा करना चाहते हैं तो उसकी पहली शर्त यह है कि इसकी तैयारी के लिए कोचिंग सेंटरों पर विद्यार्थियों का खर्चा कम होना चाहिए, विद्यार्थियों को वैकल्पिक व्यवसाय के बारे में जानकारी देनी चाहिए और कोचिंग सेंटर से संबंधित पेपर लीक करने वाले माफिया के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह परीक्षा प्रणाली की परीक्षा है कि क्या परीक्षाएं निर्विघ्नम तरीके से संपन्न हो पाती हैं। सरकारी तंत्र इस संदर्भ में ईमानदार,सख्त तथा निष्पक्ष है।
प्रो.शामलाल कौशल
रोहतक,हरियाणा


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