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कोरिया/सोनहत@ नौगई तिहरा हत्याकांड:सभी आरोपी गिरफ्तार,लेकिन तीन मौतों के पीछे की पूरी सच्चाई की अब भी तलाश!

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  • पुलिस ने नौ नामजद आरोपियों को भेजा जेल, परिजनों की सीबीआई जांच, सीडीआर जांच और कठोर कार्रवाई की मांग बरकरार
  • नौ आरोपी गिरफ्तार,लेकिन जनता अब भी मांग रही पूरी सच्चाई और निष्पक्ष न्याय
  • नौगई हत्याकांड:गिरफ्तारी पूरी,लेकिन न्याय की राह में अब भी कई अनुत्तरित सवाल
  • नौगई तिहरा हत्याकांड में पुलिस का दावा पूरा,लेकिन संदेहों का सिलसिला जारी
  • गिरफ्तारी,आत्मसमर्पण और उठते सवाल: नौगई हत्याकांड की जांच नए मोड़ पर, आरोपी जेल में, लेकिन जवाब अभी भी बाकी हैं
  • प्रभारी मंत्री पहुंचे पीडç¸त परिवार के घर,परिजनों ने कठोर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई


-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,21 जून 2026 (घटती-घटना)।
सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई में हुए तिहरा हत्याकांड की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है, नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर से घटनाक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई हैं, वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिजन, सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक अब भी पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, घटना को लेकर पुलिस के विभिन्न बयानों, आरोपियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारियों ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है, इस हत्याकांड में तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, घटना की भयावहता को देखते हुए यह मामला प्रदेश स्तर तक चर्चा में रहा, अब जबकि अधिकांश नामजद आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं, लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ पाती है।
16 जून की रात क्या हुआ था?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 16 जून की रात नौगई गांव में आपसी रंजिश के चलते हिंसक घटनाक्रम हुआ,आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि एक वाहन को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई, घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा, प्रार्थी आदित्य सिंह की शिकायत पर थाना सोनहत में अपराध क्रमांक 66/2026 दर्ज किया गया और मामले की विवेचना प्रारंभ हुई, शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे गंभीर आपराधिक षड्यंत्र और सामूहिक हिंसा का मामला मानते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की।
जनता की निगाहें अब विवेचना पर…
नौगई तिहरा हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है,यह कानून व्यवस्था,प्रशासनिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन चुका है,तीन लोगों की मौत के बाद उठे सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही दे सकती है,फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू हो चुका है,अब पूरे जिले की निगाहें विवेचना पर टिकी हैं,लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इस जघन्य घटना के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है,किन परिस्थितियों में यह वारदात हुई और क्या जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को समान गंभीरता से जांच के दायरे में लाएंगी, आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान होता है या नहीं।
सीडीआर जांच और तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी उम्मीद…
पूरे मामले में अब सीडीआर जांच की मांग प्रमुख विषय बन गई है,सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य इस मामले की कई परतें खोल सकते हैं,उनका मानना है कि मोबाइल संपर्क,लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच से घटनाक्रम को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।


प्रभारी मंत्री पहुंचे पीडि़त परिवार के घर…
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के प्रभारी मंत्री भी मृतकों के घर पहुंचे,उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया, परिजनों ने भावुक होकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई,मंत्री ने परिवार को आश्वस्त किया कि शासन इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महिलाओं की पीड़ा ने माहौल किया भावुक…
प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में परिवार की महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि घटना के बाद उन्हें अपेक्षित प्रशासनिक सहयोग नहीं मिला, उन्होंने कहा कि परिवार अब भी भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है,महिलाओं ने मांग की कि प्रशासन केवल जांच तक सीमित न रहे बल्कि पीडि़त परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा भी दिलाए।
पहले चार गिरफ्तार,फिर पांच और आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सत्य प्रकाश त्रिपाठी, अक्षय त्रिपाठी,विशाल त्रिपाठी और महेंद्र त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया,इसके बाद फरार पांच आरोपियों की तलाश के लिए कोरिया और एमसीबी पुलिस की संयुक्त टीम लगातार दबिश देती रही,पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन,एमसीबी पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोरिया डॉ. सुरेशा चौबे के मार्गदर्शन में विशेष अभियान चलाया गया,अंततः निशांत त्रिपाठी,मनोज त्रिपाठी,अमन त्रिपाठी,आशुतोष त्रिपाठी और गौरव त्रिपाठी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। इसके साथ ही एफआईआर में नामजद सभी नौ आरोपी गिरफ्तार हो गए, वही पूर्व में सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई तिहरा हत्याकांड में पुलिस ने अब सभी नौ नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि कर दी है,घटना के बाद पहले चरण में सत्य प्रकाश त्रिपाठी, अक्षय त्रिपाठी,विशाल त्रिपाठी और महेंद्र त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था,इसके बाद 19 जून की रात मनोज त्रिपाठी,निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी और आशुतोष त्रिपाठी के आत्मसमर्पण करने की जानकारी पुलिस द्वारा दी गई, वहीं 20 जून की देर शाम पुलिस ने खड़गवां क्षेत्र से गौरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी की पुष्टि की।
गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को लेकर बना भ्रम
पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बहस आरोपियों के पुलिस के समक्ष आने की परिस्थितियों को लेकर भी शुरू हुई,कुछ अधिकारियों के बयान में चार आरोपियों द्वारा आत्मसमर्पण करने की बात कही गई,जबकि बाद में गिरफ्तारी का उल्लेख भी सामने आया,इसी कारण क्षेत्र में चर्चा होने लगी कि आखिर आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया या उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया,यद्यपि पुलिस का आधिकारिक पक्ष यही है कि लगातार दबिश और बढ़ते दबाव के कारण आरोपी कानून के सामने झुकने को मजबूर हुए, लेकिन यह विषय अब भी जनचर्चा का हिस्सा बना हुआ है।
पुलिस का दावा…आरोपियों ने स्वीकार किया अपराध
पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की है,पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश थी और संभावित टकराव की आशंका के चलते आरोपियों ने पहले से तैयारी की थी,यदि पुलिस का यह दावा विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया में पुष्ट होता है,तो यह घटना को पूर्व नियोजित अपराध की श्रेणी में और गंभीर बना सकता है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष न्यायालय और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
पुलिस की शुरुआती भूमिका पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई प्रश्न उठे हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव था और घटना वाले दिन विवाद की जानकारी पुलिस को थी, तो समय रहते प्रभावी रोकथाम क्यों नहीं की गई, क्षेत्र में यह भी चर्चा रही कि घटना वाले दिन वाहनों की जांच की गई थी, ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि यदि संभावित टकराव की आशंका थी तो सभी पक्षों की गतिविधियों पर समान रूप से निगरानी क्यों नहीं रखी गई, हालांकि इन सवालों का उत्तर जांच के दौरान ही स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन यह विषय अब भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
परिजनों ने न्याय के साथ सीबीआई जांच की भी मांग की
घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने लगातार निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है,उनका कहना है कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच होनी चाहिए,परिजनों ने प्रभारी मंत्री के समक्ष सीबीआई जांच,कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच,गवाहों की सुरक्षा तथा मामले की स्वतंत्र पड़ताल की मांग रखी, उनका कहना है कि तीन लोगों की मौत के बाद न्याय केवल कार्रवाई नहीं बल्कि पूरी सच्चाई सामने आने से मिलेगा।
क्या केवल नौ आरोपी ही थे शामिल?
सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच केवल इन्हीं तक सीमित रहेगी या विवेचना के दौरान अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं,पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी,यही कारण है कि अब लोगों की नजर पुलिस की आगामी विवेचना पर है।
न्याय की राह अभी बाकी है…
नौगई तिहरा हत्याकांड में सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन यह केवल जांच का पहला चरण है,असली परीक्षा अब निष्पक्ष विवेचना,साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण और न्यायालयीन प्रक्रिया की है,तीन मौतों से दहले नौगई की जनता अब केवल गिरफ्तारी नहीं बल्कि सच्चाई,जवाबदेही और न्याय चाहती है,पूरे जिले की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इस मामले की हर परत को कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से सामने लाती हैं और क्या पीडि़त परिवार को वह न्याय मिल पाता है जिसकी मांग पूरे क्षेत्र में गूंज रही है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के बयानों पर भी चर्चा
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों को लेकर भी बहस जारी है,कुछ स्थानीय नागरिकों और परिजनों का कहना है कि शुरुआती चरण में घटना को लेकर जो आकलन सामने आए थे,वे बाद में सामने आई जानकारी से अलग दिखाई दिए। इसी कारण कुछ लोगों ने पुलिस के शुरुआती बयानों पर सवाल उठाए हैं,हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बड़ी घटना के शुरुआती चरण में उपलब्ध जानकारी सीमित होती है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, तथ्य अधिक स्पष्ट होते जाते हैं,फिर भी यह विषय अब भी चर्चा का हिस्सा बना हुआ है।
क्या जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहेगी?
अब जबकि नामजद आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं,लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच केवल उन्हीं तक सीमित रहेगी या फिर घटना की पृष्ठभूमि,तैयारी और अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी,सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो जांच एजेंसियों को उस दिशा में भी निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ना चाहिए, उनका मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आना भी आवश्यक है।
घटना सोनहत की,आत्मसमर्पण मनेन्द्रगढ़ में और जुलूस पटना में—आखिर संदेश क्या?
नौगई तिहरे हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है, घटना सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में हुई,जहां चार लोगों को वाहन सहित आग के हवाले किए जाने का आरोप है और तीन लोगों की मौत हुई,वहीं पुलिस के अनुसार आरोपी मनेन्द्रगढ़ में जाकर आत्मसमर्पण करते हैं, यहां पहला सवाल यह है कि यह वास्तव में आत्मसमर्पण था या गिरफ्तारी? क्योंकि पुलिस के बयानों में दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, सबसे अधिक चर्चा आरोपियों के जुलूस को लेकर है, जो नगर पंचायत पटना में निकाला गया,जबकि पटना न घटना स्थल है, न मृतकों का गृह क्षेत्र और न ही आत्मसमर्पण का स्थान, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस कार्रवाई का उद्देश्य क्या था? घटना सोनहत में,आत्मसमर्पण मनेन्द्रगढ़ में और जुलूस पटना में—पुलिस की इस पूरी कवायद का वास्तविक संदेश अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।


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