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कोरिया@पुलिस की कहानी में कई चेहरे..आखिर सच्चाई का चेहरा कौन सा?

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गैंगवार,आगजनी या सुनियोजित हत्याकांड,पुलिस के अलग-अलग बयानों से बढ़ रहा भ्रम…
रवि सिंह
कोरिया,21 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया नौगई तिहरा हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुलिस की कार्यप्रणाली और उसके आधिकारिक बयानों को लेकर नए सवाल खड़े होते जा रहे हैं, सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को किस रूप में देख रही है, कभी पुलिस के बयान में ‘गैंगवार’ की झलक दिखाई देती है, कभी इसे ‘आपसी रंजिश’ का परिणाम बताया जाता है और कभी ‘आगजनी की घटना’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, ऐसे में आम जनता और मृतकों के परिजनों के मन में यह स्वाभाविक संदेह उत्पन्न हो रहा है कि आखिर पुलिस स्वयं इस घटना की वास्तविक प्रकृति को लेकर कितनी स्पष्ट है।
यदि गैंगवार थी तो एक पक्ष ही क्यों हुआ तबाह?-घटनास्थल की परिस्थितियां, तीन लोगों की दर्दनाक मौत, दो लोगों का गंभीर रूप से घायल होना और आरोपियों द्वारा पूर्व तैयारी किए जाने की बात कई ऐसे संकेत देते हैं जो इस घटना को साधारण आगजनी या सामान्य विवाद से कहीं अधिक गंभीर बनाते हैं, यदि यह वास्तव में गैंगवार थी तो दोनों पक्षों में समान रूप से संघर्ष और क्षति के प्रमाण दिखाई देने चाहिए थे, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आमने-सामने की भिड़ंत हुई थी तो आरोपियों के शरीर पर भी गंभीर चोट या झुलसने के निशान मिलने चाहिए थे, लेकिन अब तक सामने आई जानकारी में नुकसान लगभग पूरी तरह एक ही पक्ष को हुआ दिखाई देता है, ऐसे में गैंगवार की थ्योरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आगजनी की घटना या पहले से बनाई गई रणनीति?- मामले में आरोपियों द्वारा पूर्व तैयारी किए जाने, संभावित हमले की आशंका के चलते योजना बनाने तथा बाद में हुई कार्रवाई को लेकर स्वयं पुलिस के बयानों में कई बातें सामने आई हैं, ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि तैयारी पहले से थी तो फिर यह केवल आगजनी की घटना कैसे मानी जा सकती है, घटनास्थल का दृश्य, वाहनों को घेरने की चर्चा और एक साथ कई लोगों को निशाना बनाए जाने की परिस्थितियां इस घटना को सामान्य आगजनी से कहीं अधिक गंभीर बनाती हैं, यही कारण है कि परिजन और सामाजिक संगठन इसे सुनियोजित सामूहिक हत्याकांड मानते हुए स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के बदलते बयान पैदा कर रहे संदेह- पूरे मामले में पुलिस के शुरुआती और बाद के बयानों को लेकर भी चर्चा जारी है, पहले घटना को बिजली के तार से लगी आग की संभावना से जोड़ने की बात सामने आई, बाद में गैंगवार, फिर आपसी रंजिश और आगजनी जैसे अलग-अलग पहलुओं पर जोर दिया गया, लोगों का कहना है कि यदि जांच स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ रही है तो घटना की प्रकृति को लेकर बार-बार अलग-अलग व्याख्या सामने क्यों आ रही है, यही कारण है कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं और मामले में पारदर्शी जांच की मांग तेज होती जा रही है।
कमजोर विवेचना आरोपियों के लिए बन सकती है राहत का आधार- किसी भी जघन्य अपराध में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विवेचना की होती है, यदि जांच मजबूत नहीं हुई, साक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से एकत्र नहीं किए गए या आरोप पत्र में कमियां रह गईं तो इसका लाभ आरोपियों को न्यायालय में मिल सकता है, मृतकों के परिजनों का कहना है कि इस मामले में न्याय केवल गिरफ्तारी से नहीं मिलेगा बल्कि ऐसी विवेचना से मिलेगा जो न्यायालय में टिक सके और दोषियों को सजा दिला सके,इसलिए पुलिस को अब बयानबाजी से अधिक साक्ष्य आधारित जांच पर ध्यान देना चाहिए।
न्याय की गुहार लेकर मंत्री के सामने हाथ जोड़कर खड़ा रहा पीडि़त परिवार-नौगई तिहरे हत्याकांड के बाद सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मृतकों के परिजन न्याय की उम्मीद लेकर प्रभारी मंत्री के सामने हाथ जोड़कर खड़े नजर आए, अपनों को खोने का दर्द झेल रहे परिवार की आंखों में आंसू थे और जुबान पर सिर्फ एक मांग—निष्पक्ष जांच और न्याय, परिजनों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की गुहार लगाई, हालांकि मंत्री ने परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या यह भरोसा न्याय में बदलेगा या केवल आश्वासन बनकर रह जाएगा, पीडि़त परिवार आज भी जवाबों और न्याय की प्रतीक्षा में है, उनके लिए यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि अपने खोए हुए परिजनों के लिए न्याय की लड़ाई है, अब यह आने वाला समय ही तय करेगा कि उनकी यह पुकार व्यवस्था तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है और न्याय का रास्ता किस दिशा में आगे बढ़ता है।
अब विवेचना ही तय करेगी न्याय की दिशा…
फिलहाल जिले की जनता,सामाजिक संगठन और मृतकों के परिजन इसी बात पर नजर लगाए हुए हैं कि पुलिस की आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है, विवेचना कितनी मजबूत होती है, आरोप पत्र कितना तथ्यपरक होता है और जांच कितनी पारदर्शी रहती है, यही तय करेगा कि नौगई तिहरे हत्याकांड में पीडि़त परिवार को न्याय मिलता है या नहीं,नौ नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब मामला पूरी तरह विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के चरण में पहुंच चुका है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस इस घटना को आखिर किस रूप में स्थापित करती है—गैंगवार, आगजनी, आपसी रंजिश या फिर एक सुनियोजित सामूहिक हत्याकांड। इसका उत्तर अब केवल निष्पक्ष और मजबूत जांच ही दे सकती है।


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