शाम 4:47 बजे दर्ज हुई मारपीट की रिपोर्ट, कुछ घंटे बाद जलती गाड़ी में मिली लाशें
- नौगई की जलती रात…रेत के वर्चस्व की लड़ाई में तीन जिंदगियां राख…पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर गया कोरिया का हत्याकांड
- दिन में मारपीट और एफआईआर, रात में आग और मौत का तांडव
- वाहन में आग लगने से तीन की मौत, घायल अस्पताल में
- जिंदगी की जंग लड़ रहे
- नौगई हत्याकांड ने खड़े किए दर्जनों सवाल, रेत
- कारोबार की रंजिश में तीन की मौत,पूरा प्रदेश स्तब्ध
- रेत के वर्चस्व की लड़ाई या पूर्व नियोजित साजिश?
- पुलिस जांच के केंद्र में पूरा घटनाक्रम
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले-गुनहगारों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा…


कोरिया/सोनहत,17 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के नौगई गांव में मंगलवार की रात जो कुछ हुआ, उसने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया है, रेत कारोबार को लेकर लंबे समय से चल रही तनातनी आखिरकार ऐसी खूनी परिणति तक पहुंच जाएगी,इसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी,दिन में थाने में दर्ज हुई मारपीट की शिकायत और उसी रात तीन लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे घटनाक्रम को रहस्य,साजिश और कई अनुत्तरित सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है,घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं पूरे जिले में लोग यह पूछ रहे हैं कि आखिर कुछ घंटों के भीतर ऐसा क्या हुआ कि विवाद सीधे मौत और आग की लपटों तक पहुंच गया।
तीन मौतें…दो जिंदगी की जंग लड़
रहे- पूरे परिवार पर टूटा कहर
नौगई की इस भयावह घटना में भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह,वीरेंद्र सिंह और शिक्षक नागेंद्र सिंह की दर्दनाक मौत हो गई,वहीं मयंक सिंह और योगेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में उपचाराधीन हैं,घायलों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सक लगातार निगरानी बनाए हुए हैं,जांच एजेंसियों की नजर भी विशेष रूप से घायलों के बयानों पर टिकी हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि उनके बयान इस पूरे हत्याकांड की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
एफआईआर की
टाइमिंग ने बढ़ाया रहस्य
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वह एफआईआर है जो घटना वाले दिन ही थाना सोनहत में दर्ज हुई,दर्ज शिकायत में रास्ता रोकने,गाली-गलौज,मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं, एफआईआर के अनुसार शिकायत शाम 4ः47 बजे दर्ज की गई थी,यहीं से पूरे मामले में एक नया सवाल जन्म लेता है,यदि दिन में विवाद और तनाव की जानकारी पुलिस को थी,तो क्या रात में होने वाली संभावित हिंसा को रोका जा सकता था? क्या दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जानी चाहिए थी?
मनोज त्रिपाठी समेत कई नामजद, फिर भी कई आरोपी रहे पुलिस की पकड़ से दूर-पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण में मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी,विशाल त्रिपाठी,अमन त्रिपाठी,अक्षय त्रिपाठी,सत्य कुमार त्रिपाठी, गौरव त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी और महेंद्र त्रिपाठी के नाम शामिल किए गए हैं,जबकि अन्य आरोपियों की पहचान ‘अन्य’ के रूप में दर्ज की गई है, घटना के बाद पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया,लेकिन लंबे समय तक कई नामजद आरोपियों के संबंध में पुलिस के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं होने की चर्चा भी क्षेत्र में होती रही।
रेत का कारोबार और बढ़ती वर्चस्व की लड़ाई- स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं था,क्षेत्र में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर लंबे समय से प्रतिस्पर्धा और तनाव की स्थिति बनी हुई थी, करोड़ों रुपये के इस कारोबार में प्रभाव,क्षेत्र और नियंत्रण को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं,नौगई की घटना ने पहली बार इस संघर्ष को इतनी भयावह तस्वीर के साथ प्रदेश के सामने ला खड़ा किया है,कहा जाता है कि लल्ला सिंह का पक्ष क्षेत्र में रेत कारोबार से जुड़ा हुआ था,जबकि मनोज त्रिपाठी परिवार भी ठेकेदारी व्यवसाय में सक्रिय था,रेत परिवहन और उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद और तनाव की स्थिति बनी हुई थी, यह विवाद पहले थाने तक भी पहुंच चुका था, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा रहा है।
कुछ घंटों बाद बदल गया पूरा मंजर
दिन में थाने तक सीमित दिख रहा विवाद रात होते-होते खूनी संघर्ष में बदल गया,आरोप है कि वाहन रोके गए, टक्कर मारी गई और उसके बाद वाहन में आग लग गई,इस आग में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, घटनास्थल का दृश्य इतना भयावह था कि जिसने भी देखा,सिहर उठा। जली हुई गाडि़यां,राख में तब्दील सामान और चारों तरफ पसरी खामोशी इस बात की गवाही दे रही थी कि नौगई ने उस रात एक ऐसा मंजर देखा जिसे लोग वर्षों तक भूल नहीं पाएंगे।
पेट्रोल का सवाल जांच का सबसे बड़ा बिंदु
पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा उस पेट्रोल को लेकर हो रही है जिससे वाहन में आग लगाए जाने की बात कही जा रही है,यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होता है,तो सबसे बड़ा प्रश्न यही होगा कि पेट्रोल वहां संयोग से मौजूद था या पहले से तैयारी के तहत लाया गया था,कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी घटना में ज्वलनशील पदार्थ का पूर्व प्रबंध पाया जाता है तो यह जांच को सीधे पूर्व नियोजित साजिश की दिशा में ले जाता है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष केवल फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।
क्या दोनों पक्षों का रसूख बना लोगों की चुप्पी का कारण?
ग्रामीणों के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि इतनी बड़ी घटना के दौरान बचाव के लिए कोई आगे क्यों नहीं आया, कुछ लोगों का मानना है कि दोनों पक्ष प्रभावशाली और रसूखदार थे, इसलिए लोग हस्तक्षेप करने से बचते रहे, वहीं कुछ का कहना है कि पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला, यह पहलू भी जांच का हिस्सा बन सकता है कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने क्या देखा और क्या परिस्थितियां थीं।
घायल प्रत्यक्षदर्शी खोल सकते हैं पूरे राज
जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी उम्मीद अब उन घायलों से है जो घटना के समय मौके पर मौजूद थे,अस्पताल में उपचाराधीन लोगों के बयान पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल सकते हैं,पुलिस सूत्रों का मानना है कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान,कॉल डिटेल रिकॉर्ड,फोरेंसिक जांच और तकनीकी साक्ष्य मिलकर यह तय करेंगे कि यह अचानक भड़की हिंसा थी या पहले से तैयार किया गया कोई खतरनाक प्लान।
राख के ढेर में तब्दील हो गया लल्ला
सिंह का शव,घटना की नृशंसता से दहला इलाका
करीब 58 वर्षीय लल्ला सिंह की मौत के बाद सामने आई तस्वीरों ने पूरे कोरिया जिले को झकझोर दिया है,आग इतनी भीषण थी कि उनका शव लगभग राख में तब्दील हो गया और पहचान करना भी मुश्किल हो गया,घटना की क्रूरता और वीभत्सता ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है,स्थानीय लोग इसे जिले के इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बता रहे हैं।
जेसीबी, हाईवा और टिपर से रास्ता
रोकने की जनचर्चा,जांच के केंद्र में पूरी वारदात
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि घटना वाली रात लल्ला सिंह अपने साथियों के साथ लौट रहे थे,तभी रास्ते को जेसीबी, हाईवा और टिपर जैसे भारी वाहनों से अवरुद्ध किया गया,जनचर्चा के अनुसार वाहन रुकने के बाद विवाद बढ़ा और फिर हिंसक घटनाक्रम सामने आया, कुछ लोगों का दावा है कि वाहन को टक्कर मारकर आग लगाई गई, जबकि कुछ अन्य अलग घटनाक्रम बताते हैं। हालांकि इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन है,लेकिन पूरा घटनाक्रम अब पुलिस,फोरेंसिक टीम और जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच बिंदु बन गया है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मामला प्रदेश स्तर तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जांच के आधार पर कठोर कार्रवाई की जाएगी,मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है…
नौगई की उस रात की आग बुझ चुकी है,लेकिन सवाल अभी भी धधक रहे हैं, क्या दिन में दर्ज हुई एफआईआर और रात का हत्याकांड एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं? क्या वाहन में आग लगना अचानक हुई घटना थी या किसी पूर्व तैयारी का हिस्सा? क्या रेत कारोबार की प्रतिस्पर्धा ने तीन जिंदगियां निगल लीं? और सबसे महत्वपूर्ण— क्या अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे घायल इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा पाएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में पुलिस जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और न्यायालयीन प्रक्रिया से सामने आएंगे,लेकिन फिलहाल नौगई की जलती रात ने पूरे छत्तीसगढ़ को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कानून के डर से बड़ी कौन सी ताकत थी जिसने कुछ घंटों के भीतर विवाद को मौत के तांडव में बदल दिया।
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