- दुर्घटनाग्रस्त हुई दुर्गा बस, परमिट उल्लंघन और फर्जी बिलिंग के आरोप
- मनेन्द्रगढ़ में हादसे का शिकार हुई दुर्गा बस, ग्रामीण बस योजना की निगरानी पर उठे सवाल
- परमिट एक रूट का, दौड़ दूसरे मार्ग पर! दुर्घटना के बाद दुर्गा ट्रेवल्स पर घिरे सवाल
- दीवार से टकराई दुर्गा बस, ग्रामीण बस योजना में अनियमितताओं की जांच की मांग तेज
- ग्रामीणों की सुविधा या सरकारी सब्सिडी का खेल? हादसे के बाद दुर्गा ट्रेवल्स चर्चा में
- मनेन्द्रगढ़ बस स्टैंड के पास बड़ा हादसा टला, दुर्गा बस के संचालन पर उठे गंभीर सवाल
- विशेष परमिट, विशेष सब्सिडी और विशेष रूट का खेल! दुर्घटना ने खोली ग्रामीण बस योजना की पोल
- जनकपुर-मलकडोल के नाम पर दूसरी लाइन में दौड़ रही थी बस? हादसे के बाद मचा हड़कंप
- दुर्घटना ने खोली ग्रामीण बस योजना की परतें, परमिट नियमों की अनदेखी पर प्रशासन मौन
- दुर्गा बस हादसा या ग्रामीण बस योजना के ‘सब्सिडी सिंडिकेट’ का पर्दाफाश?
मनेन्द्रगढ़ 16 जून 2026 (घटती-घटना)। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित दुर्गा ट्रेवल्स की बस मंगलवार दोपहर मनेन्द्रगढ़ बस स्टैंड के समीप अचानक अनियंत्रित होकर एक दीवार से जा टकराई, घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस हादसे ने ग्रामीण बस सेवा के संचालन, परिवहन विभाग की निगरानी और शासन की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय बस में कोई यात्री मौजूद नहीं था, वहीं सड़क पर भी भीड़भाड़ कम होने के कारण कोई राहगीर इसकी चपेट में नहीं आया, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह दुर्घटना कुछ मिनट पहले या बाद में होती, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी, बस स्टैंड क्षेत्र में दिनभर यात्रियों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
निर्धारित मार्ग छोड़ दूसरे रूट पर चल रही थी बस?-
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल बस के संचालन को लेकर उठ रहा है, जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत उक्त बस को जनकपुर-मलकडोल मार्ग पर संचालन की अनुमति प्रदान की गई है, लेकिन स्थानीय बस संचालकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का आरोप है कि बस पिछले कई महीनों से निर्धारित मार्ग छोड़कर मनेन्द्रगढ़-जनकपुर रूट पर नियमित लाइन बस की तरह संचालित की जा रही थी, यदि यह आरोप सही हैं, तो यह सीधे-सीधे परमिट की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा, सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि बस लंबे समय से दूसरे रूट पर चल रही थी, तो संबंधित विभाग और परिवहन अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?
ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य हो रहा प्रभावित-
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ और परिवहन सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों को जिला एवं विकासखंड मुख्यालयों से जोड़ना है, योजना के तहत ऐसे रूटों पर बस संचालन के लिए विशेष परमिट जारी किए जाते हैं, जहां निजी परिवहन सेवाएं लाभ के अभाव में नहीं पहुंचतीं, शासन द्वारा बस संचालकों को निर्धारित रूट पर संचालन के एवज में प्रति किलोमीटर अनुदान दिया जाता है। साथ ही विभिन्न करों में भी छूट प्रदान की जाती है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा मिल सके, लेकिन यदि स्वीकृत बसें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन के बजाय अधिक लाभ वाले मार्गों पर चलाई जा रही हैं, तो योजना का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है, इसका सीधा नुकसान उन ग्रामीणों को उठाना पड़ता है, जिनके लिए यह योजना शुरू की गई थी।
फर्जी बिलिंग और अनुदान में गड़बड़ी के आरोप-
मामले में केवल परमिट उल्लंघन ही नहीं, बल्कि फर्जी बिलिंग और अनुदान में कथित गड़बड़ी के आरोप भी सामने आ रहे हैं, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का दावा है कि कुछ बस संचालक निर्धारित मार्गों पर बस संचालन नहीं करने के बावजूद कागजों में संचालन दर्शाकर शासन से अनुदान राशि प्राप्त कर रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं तो यह शासन की योजना के साथ बड़ा आर्थिक धोखा साबित हो सकता है, स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिले के विभिन्न हिस्सों में भी कुछ ग्रामीण बसें विशेष परमिट लेकर दूसरे मार्गों पर संचालित की जा रही हैं। ऐसे में पूरे जिले में ग्रामीण बस योजना की समीक्षा और भौतिक सत्यापन की मांग उठने लगी है।
‘रसूख’ के दम पर नियमों की अनदेखी?-
स्थानीय परिवहन जगत में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ संचालक राजनीतिक संरक्षण और प्रभावशाली लोगों की नजदीकियों का लाभ उठाकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल जरूर उठ रहा है कि आखिर लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, कई बस संचालकों का कहना है कि यदि किसी सामान्य ऑपरेटर द्वारा परमिट नियमों का उल्लंघन किया जाता, तो तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन कुछ मामलों में विभागीय उदासीनता दिखाई देती है।
परिवहन विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल-
इस पूरे मामले में जिला परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है, यदि बस लंबे समय से स्वीकृत मार्ग के बजाय अन्य मार्ग पर संचालित हो रही थी, तो इसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? क्या नियमित जांच की जा रही थी? क्या अनुदान भुगतान से पहले वास्तविक संचालन का सत्यापन किया गया? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब अब प्रशासन और परिवहन विभाग को देना होगा।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज-
दुर्घटना के बाद बस संचालकों, स्थानीय नागरिकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है, मांग की जा रही है कि संबंधित बस के परमिट, संचालन रजिस्टर, जीपीएस रिकॉर्ड, अनुदान भुगतान और रूट संचालन की विस्तृत जांच कराई जाए, साथ ही जिले में संचालित सभी ग्रामीण बसों का भौतिक सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे वास्तव में उन्हीं मार्गों पर संचालित हो रही हैं, जिनके लिए उन्हें अनुमति और अनुदान दिया गया है।
अब कार्रवाई का इंतजार-
मनेन्द्रगढ़ बस स्टैंड के पास हुई यह दुर्घटना भले ही बिना जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन इसने ग्रामीण बस योजना के संचालन में संभावित अनियमितताओं की परतें खोल दी हैं, अब लोगों की नजर जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और शासन पर टिकी हुई है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक सड़क दुर्घटना थी या फिर इसके बहाने ग्रामीण बस योजना में चल रहे संभावित खेल का पर्दाफाश हुआ है? इसका जवाब अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई ही दे पाएगी।
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