


- कहा समस्या बताइए,समाधान यहीं होगा!
- सुशासन तिहार में अचानक बदला माहौल,गांव में उतरा सत्ता का हेलीकॉप्टर
- कुशहा चौपाल में अचानक उतरे मुख्यमंत्री,ग्रामीण बोले…पहली बार सरकार गांव में दिखी…
- समस्या बताइए,समाधान यहीं होगा,कुशहा में मुख्यमंत्री ने सुनी जनता की सीधी शिकायतें…
- सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री का सरप्राइज दौरा,हैंडपंप से आवास तक अधिकारियों की लगी क्लास
- लखपति दीदी अब बनेंगी करोड़पति,कुशहा चौपाल में महिलाओं का बढ़ाया हौसला
- कुशहा में मुख्यमंत्री का चौपाल मॉडल : जनता सामने,अधिकारी जवाब देने को मजबूर…
- पानी,बिजली और आवास पर मुख्यमंत्री सख्त,चौपाल में मौके पर दिया कार्रवाई के निर्देश…
- सुशासन तिहार में ग्रामीणों से सीधा संवाद,मुख्यमंत्री ने कहा…सरकार आपके द्वार
- बंद हैंडपंप,भारी बिजली बिल और अधूरे आवास,कुशहा चौपाल में खुलकर सामने आईं समस्याएं…
- चौपाल में जनता की शिकायतें सुन एक्शन मोड में मुख्यमंत्री,अधिकारियों को दिया सख्त निर्देश…
-रवि सिंह-
कोरिया ,22 मई 2026(घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुशहा में गुरुवार का दिन अचानक राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बन गया,सुशासन तिहार के तहत जहां ग्रामीण अगले दिन आयोजित होने वाले शिविर की तैयारी में जुटे थे,वहीं तय कार्यक्रम से एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हेलीकॉप्टर गांव में उतर गया। गांव के लोग पहले तो समझ ही नहीं पाए कि आखिर इतनी अचानक हलचल क्यों बढ़ गई,कुछ ही देर में खबर पूरे इलाके में फैल गई कि मुख्यमंत्री स्वयं चौपाल लगाने पहुंचे हैं। फिर क्या था—गांव की गलियों से लेकर चौपाल तक भीड़ उमड़ पड़ी,महिलाएं,बुजुर्ग,किसान, युवा और बच्चे मुख्यमंत्री को देखने और अपनी समस्याएं बताने के लिए पहुंचने लगे,कुशहा गांव कुछ देर के लिए प्रशासनिक मुख्यालय जैसा नजर आने लगा,अधिकारियों के चेहरे पर सतर्कता थी,जनप्रतिनिधियों में सक्रियता दिख रही थी और ग्रामीणों के बीच यह उत्सुकता थी कि शायद इस बार उनकी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच जाएगी।
कैसे हैं आप सब? से शुरू हुआ संवाद
मुख्यमंत्री ने चौपाल में पहुंचते ही मंचीय दूरी बनाने के बजाय सीधे ग्रामीणों के बीच बैठकर संवाद शुरू किया, उनका पहला सवाल था—कैसे हैं आप सब? कोई दिक्कत तो नहीं? इसके बाद उन्होंने एक-एक कर ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, बिजली, पानी, राशन और धान बोनस की स्थिति पूछी, मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं घोषित करना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि उनका लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, गांव के लोगों के लिए यह दृश्य असामान्य जरूर था। आमतौर पर शिकायतें आवेदन पत्रों और दफ्तरों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन यहां मुख्यमंत्री स्वयं सवाल पूछ रहे थे और अधिकारी जवाब देने की स्थिति में खड़े थे।
घोषणाओं से आगे,अब परिणाम की उम्मीद
कुशहा चौपाल ने गांव के लोगों को यह भरोसा जरूर दिया कि सरकार उनकी समस्याएं सुन रही है, लेकिन अब ग्रामीणों की असली उम्मीद यह है कि चौपाल में दिए गए निर्देश जमीन पर भी दिखाई दें, क्या बंद हैंडपंप सच में चालू होंगे? क्या कटगोड़ी में नियमित पानी पहुंचेगा? क्या अधूरे आवास पूरे होंगे? क्या बिजली बिल की समस्याएं कम होंगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा, फिलहाल कुशहा गांव ने एक ऐसा दिन देखा, जब सत्ता हेलीकॉप्टर से उतरकर सीधे चौपाल तक पहुंची और गांव की आवाज कुछ देर के लिए शासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई।
लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक का सपना
चौपाल के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा महिलाओं के साथ मुख्यमंत्री के संवाद की रही, मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं से बात की और पूछा कि लखपति दीदी बनीं कि नहीं? जब एक महिला ने मुस्कुराते हुए कहा हाँ सर,बन गई हूँ, तो मुख्यमंत्री भी उत्साहित हो गए,उन्होंने कहा अब मेहनत जारी रखो,जल्द करोड़पति बनोगी,यह संवाद केवल मजाक या उत्साहवर्धन नहीं था, बल्कि सरकार की उस रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार बनाने की कोशिश की जा रही है,हालांकि गांव की महिलाएं यह भी जानती हैं कि केवल प्रशिक्षण और छोटे ऋ ण से करोड़पति बनने का रास्ता आसान नहीं होता,बाजार, परिवहन,स्थायी खरीदार और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियां अब भी बड़ी हैं, फिर भी मुख्यमंत्री के शब्दों ने महिलाओं के बीच आत्मविश्वास जरूर बढ़ाया।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर सचिव की क्लास
चौपाल के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति पूछी तो ग्रामीणों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी, कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें आवास मिल गया है, जबकि कई ग्रामीणों ने शिकायत की कि अब तक उनका मकान अधूरा है या स्वीकृति ही नहीं मिली,मुख्यमंत्री ने तुरंत पंचायत सचिव को बुलाया और लंबित आवासों की जानकारी मांगी, चौपाल का माहौल कुछ देर के लिए प्रशासनिक समीक्षा बैठक में बदल गया, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों को जल्द आवास उपलब्ध कराया जाए और अधूरे मकानों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना लंबे समय से चर्चा और शिकायत दोनों का विषय रही है, कई जगह लोगों को किश्तों में देरी, निर्माण सामग्री की महंगाई और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे हस्तक्षेप करना ग्रामीणों के लिए राहत का संकेत माना गया।
सर,हैंडपंप बंद हैं…और तुरंत शुरू हुआ एक्शन
गर्मी के मौसम में पानी सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया, मुख्यमंत्री ने जब पूछा कि गांव में पानी की व्यवस्था ठीक है या नहीं? तो ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा—सर,हैंडपंप बंद पड़े हैं। इतना सुनते ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा। सचिव और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को तत्काल निर्देश दिया गया कि बंद पड़े हैंडपंपों की सूची बनाकर उन्हें तुरंत चालू कराया जाए,ग्रामीणों ने बताया कि कई मोहल्लों में लोगों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है, मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की समस्या को किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
कटगोड़ी के लिए तुरंत टैंकर व्यवस्था
चौपाल में कटगोड़ी गांव के ग्रामीणों ने पेयजल संकट की गंभीर स्थिति मुख्यमंत्री के सामने रखी,लोगों ने बताया कि पानी की कमी इतनी बढ़ गई है कि रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है,मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटगोड़ी में टैंकर से जलापूर्ति शुरू की जाए,उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए परेशान नहीं होना चाहिए,राजनीतिक दृष्टि से देखें तो ऐसे त्वरित निर्णय संवेदनशील सरकार की छवि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं प्रशासन के लिए यह साफ संदेश था कि अब गांवों की शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री के सामने पहुंच रही हैं।
बिजली बिल पर भी खुली चर्चा
चौपाल के दौरान एक ग्रामीण ने खड़े होकर शिकायत की कि बिजली तो मिल रही है, लेकिन बिल बहुत ज्यादा आ रहा है,इस पर मुख्यमंत्री ने समाधान योजना की जानकारी दी और कहा कि सरकार बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर आयोजित कर रही है,उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांवों में विशेष शिविर लगाकर बिजली बिल से जुड़ी शिकायतों का निराकरण किया जाए, ग्रामीण इलाकों में बिजली बिल हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है, कई बार मीटर रीडिंग, गलत बिलिंग और बकाया राशि को लेकर विवाद होते रहते हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा इस विषय पर सीधे बात करना लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
कामयाबी वेन से डिजिटल शिक्षा का संदेश…
कुशहा चौपाल में मुख्यमंत्री ने कामयाबी वेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया,नीति आयोग समर्थित मिशन कामयाबी के तहत शुरू की गई यह डिजिटल शिक्षा वैन दूरस्थ गांवों तक आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा पहुंचाने का प्रयास है,इस वैन में वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक के माध्यम से बच्चों को विज्ञान और तकनीकी शिक्षा दी जाएगी, ग्रामीण बच्चों के लिए यह पहल नई और आकर्षक जरूर है, लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा की सफलता इंटरनेट,प्रशिक्षित शिक्षकों और नियमित तकनीकी समर्थन पर भी निर्भर करेगी।
चौपाल बनी अधिकारियों की मैदानी परीक्षा
कुशहा की यह चौपाल केवल जनसंवाद कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि अधिकारियों के लिए मैदानी टेस्ट भी बन गई, मुख्यमंत्री जहां-जहां सवाल पूछ रहे थे,वहां-वहां अधिकारी जवाब देने की स्थिति में दिखाई दिए,गांव के लोगों का कहना था कि पहली बार उन्हें लगा कि उनकी बात सीधे शासन तक पहुंच रही है, वहीं राजनीतिक जानकार इसे सुशासन तिहार के जरिए सरकार की मैदानी सक्रियता का प्रदर्शन मान रहे हैं।
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