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बलरामपुर/राजपुर@सोशल मीडिया पर पत्रकार का कथित अपमानजनक वीडियो वायरल, आहत पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

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  • “मीडिया मैनेजमेंट” वाली खबर प्रकाशित होने के बाद माहौल बनाने का आरोप
  • वायरल वीडियो डिलीट, लेकिन तब तक हजारों लोगों तक पहुंच चुका था मामला

बलरामपुर/राजपुर,22 मई 2026 (घटती-घटना)। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अब व्यक्तिगत छवि और सम्मान को लेकर विवाद के मामले भी तेजी से सामने आने लगे हैं। बलरामपुर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक पत्रकार ने फेसबुक पर कथित रूप से अपमानजनक वीडियो वायरल किए जाने की शिकायत पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के नाम थाना प्रभारी राजपुर को ज्ञापन सौंपकर की है।
शिकायतकर्ता पत्रकार का आरोप है कि वर्ष 2022 में एक त्यौहार के दौरान उनकी नशे की अवस्था का वीडियो बिना अनुमति के बनाया गया था। अब उसी पुराने वीडियो को राजपुर निवासी दो वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से वायरल किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि वीडियो वायरल करने का उद्देश्य उनकी सामाजिक छवि धूमिल करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना था।
“मीडिया मैनेजमेंट” वाली खबर के बाद शुरू हुआ विवाद?
शिकायतकर्ता पत्रकार ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि हाल ही में उनके द्वारा राजपुर जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवों द्वारा कथित रूप से “मीडिया मैनेजमेंट” के नाम पर पांच-पांच हजार रुपए विज्ञापन के रूप में लिए जाने संबंधी खबर प्रकाशित की गई थी। उनका आरोप है कि इसी खबर के बाद उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश शुरू हुई।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वह भारत सरकार से पंजीकृत संस्थाओं में प्रदेश, संभाग एवं जिला स्तर के पदाधिकारी होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि दोनों पत्रकारों ने योजनाबद्ध तरीके से एक राय होकर उक्त वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया ताकि उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम किया जा सके।
शिकायत की भनक लगते ही हटाया गया वीडियो
मामले की शिकायत किए जाने की जानकारी मिलते ही कथित रूप से वायरल करने वाले पत्रकारों द्वारा वीडियो फेसबुक से डिलीट कर दिया गया। हालांकि तब तक वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच चुका था। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणियां भी की थीं, जिनमें कुछ हास्यास्पद और आपत्तिजनक कॉमेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं।
“लगातार आ रहे फोन, मानसिक आघात पहुंचा”
शिकायतकर्ता पत्रकार का कहना है कि वीडियो वायरल होने के बाद लगातार परिचितों और अन्य लोगों के फोन आ रहे हैं तथा उनका उपहास उड़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और मानसिक रूप से भी गहरा आघात लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन संस्थाओं से वे जुड़े हुए हैं, वहां भी इस घटना को लेकर चर्चा हो रही है, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई है।
पत्रकारिता और सोशल मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पत्रकारिता और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। कभी पत्रकारिता को समाज का आईना माना जाता था, लेकिन सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा और वायरल संस्कृति के दौर में कई बार संवेदनशीलता और नैतिकता पीछे छूटती दिखाई देती है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या किसी पत्रकार की निजी और कमजोर स्थिति का वीडियो सार्वजनिक करना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के अनुरूप माना जा सकता है? पत्रकारिता का उद्देश्य समाज के मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ सामने लाना होता है, न कि किसी की व्यक्तिगत परिस्थिति को सार्वजनिक उपहास का विषय बनाना।
क्या कहता है कानून?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत किसी व्यक्ति का निजी या अपमानजनक वीडियो बिना अनुमति सोशल मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर मामला माना जा सकता है। यदि किसी सामग्री को जानबूझकर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से साझा किया जाता है, तो यह मानहानि, निजता के उल्लंघन और साइबर उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी सीख
यह घटना सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ती है। किसी का निजी वीडियो या फोटो बिना अनुमति साझा करना, किसी की व्यक्तिगत स्थिति का मजाक बनाना या वायरल संस्कृति के नाम पर सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है।
फिलहाल शिकायतकर्ता पत्रकार ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित फेसबुक आईडी संचालकों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही वायरल वीडियो को पूरी तरह हटाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह भी किया है। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या यह प्रकरण सोशल मीडिया पर बढ़ती डिजिटल मानहानि की प्रवृत्ति के खिलाफ कोई सख्त संदेश दे पाएगा।


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