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सूरजपुर@ ‘सुशासन’ का महा शो से रामपुर में घोषणाओं की बारिश

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योजनाओं की बहार और उम्मीदों का बाजार
रामपुर बना सत्ता का दरबार,मुख्यमंत्री ने बांटी सौगातें,जनता ने मांगा जवाब
सुशासन तिहार या विकास महोत्सव? सूरजपुर में 66 करोड़ की घोषणाओं से गरमाई राजनीति
मंच पर योजनाएं,भीड़ में उम्मीदें,रामपुर शिविर में सरकार का शक्ति प्रदर्शन
‘सरकार आपके द्वार’ का बड़ा इम्तिहान : रामपुर में घोषणाएं खूब,अब निगाह क्रियान्वयन पर
रामपुर में विकास की बरसात,मुख्यमंत्री ने खोला योजनाओं का पिटारा,जनता बोली—काम भी दिखना चाहिए
व्हील चेयर से लेकर करोड़पति दीदी तकः सुशासन तिहार में संवेदना,राजनीति और घोषणाओं का संगम
तेंदूपत्ता,आलू चिप्स और करोड़ों की सौगात : रामपुर में मुख्यमंत्री का जनसंवाद बना चर्चा का केंद्र
सूरजपुर ,22 मई 2026 (घटती-घटना)।
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम रामपुर में गुरुवार को आयोजित सुशासन तिहार 2026 केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था,बल्कि यह सत्ता, योजनाओं,घोषणाओं,जनसंवाद और राजनीतिक संदेशों का ऐसा संगम बन गया,जिसने पूरे इलाके को प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में ला खड़ा किया,मंच पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद थे,सामने हजारों ग्रामीणों की भीड़ थी,विभागीय स्टॉलों की कतार थी, लाभार्थियों की सूची थी और सरकारी मशीनरी अपने पूरे तामझाम के साथ यह साबित करने में जुटी थी कि सरकार अब गांव की चौपाल तक पहुंच चुकी है।
भीषण गर्मी के बावजूद रामपुर में लोगों की भीड़ यह दिखा रही थी कि गांवों में अब भी सरकार से उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं,लोग राशन कार्ड की आस लेकर आए थे,कोई पेंशन की उम्मीद में बैठा था, कोई किसान क्रेडिट कार्ड की प्रतीक्षा कर रहा था,तो कोई केवल यह देखने आया था कि आखिर सुशासन तिहार नाम की यह सरकारी अवधारणा जमीन पर कैसी दिखती है,मुख्यमंत्री ने मंच से 66 करोड़ 99 लाख 53 हजार रुपये की लागत वाले 87 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया,साथ ही 116 हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता सामग्री,स्वीकृति पत्र और आर्थिक लाभ प्रदान किए गए। कार्यक्रम में भाषण भी थे,भावनाएं भी थीं, घोषणाएं भी थीं और वह राजनीतिक संदेश भी, जो हर चुनावी लोकतंत्र में जनता तक पहुंचाना जरूरी माना जाता है—सरकार आपके साथ है।
सरकार आपके द्वार और जनता की असली अपेक्षाएं
मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि सरकार स्वयं गांवों में पहुंचकर यह देख रही है कि योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं,उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण किया जाए, यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ी शिकायत सरकारी दफ्तरों की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर रहती है,आय,जाति,निवास प्रमाण-पत्र,पेंशन,भूमि रिकॉर्ड और राशन कार्ड जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए लोगों को महीनों कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं,मुख्यमंत्री ने ई-डिस्टि्रक्ट प्रणाली और प्रस्तावित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की बात भी कही। डिजिटल सेवाओं को गांव तक पहुंचाने का दावा किया गया। लेकिन ग्रामीण भारत की वास्तविकता यह है कि इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच चौपाल राजनीति
मुख्यमंत्री ने अपने प्रवास के दौरान रामानुजनगर के तेंदूपत्ता संग्रहण फड़ पटना का भी दौरा किया,यहां संग्राहकों ने तेंदूपत्ता और तेंदू फल की माला पहनाकर उनका स्वागत किया,सरकार ने बताया कि इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा तय की गई है,लक्ष्य से अधिक संग्रहण को बड़ी उपलब्धि बताया गया,मुख्यमंत्री महुआ पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर संग्राहकों से बातचीत करते नजर आए,उन्होंने राशन,पेयजल,शिक्षा और महतारी वंदन योजना की जानकारी ली,चरण पादुका योजना के तहत जूते भी वितरित किए गए,वनाधारित क्षेत्रों में ऐसी चौपाल राजनीति का बड़ा महत्व होता है,क्योंकि यहां आजीविका सीधे जंगल से जुड़ी होती है, तेंदूपत्ता संग्रहण हजारों परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। इसलिए सरकार इस वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती।
पारंपरिक भोजन और सादगी का राजनीतिक संदेश
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री किसान रघुनंदन सिंह के घर पहुंचे और वहां पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन किया,सरई पत्ते के दोना-पत्तल में परोसी गई कोयलार भाजी,ईढ़र और आम की चटनी के साथ मिट्टी के गिलास में पानी पीते हुए मुख्यमंत्री ने स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव का संदेश दिया,राजनीति में ऐसे दृश्य केवल भोजन नहीं होते,बल्कि प्रतीकात्मक संदेश होते हैं,यह बताने का प्रयास होता है कि सत्ता केवल मंच पर भाषण देने तक सीमित नहीं, बल्कि गांव की परंपराओं और जीवनशैली से भी जुड़ी हुई है।
घोषणाओं की चमक के पीछे असली सवाल
रामपुर का यह आयोजन प्रशासनिक दृष्टि से सफल और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जरूर रहा, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी, क्या जिन लोगों को आज स्वीकृति पत्र मिला,उन्हें समय पर राशि भी मिलेगी? क्या जिन परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ,वे तय समय में पूरी होंगी? क्या किसानों को खाद और बीज समय पर मिलेगा? क्या जल जीवन मिशन के नल सालभर पानी देंगे? क्या महिलाओं के समूहों को स्थायी बाजार मिलेगा? क्योंकि गांवों में अब जनता केवल मंचीय घोषणाओं से प्रभावित नहीं होती। लोग परिणाम देखना चाहते हैं, रामपुर में सुशासन तिहार ने सरकार की मंशा,राजनीतिक सक्रियता और प्रशासनिक ताकत का प्रदर्शन जरूर किया है,लेकिन आने वाले महीनों में यही जनता इन घोषणाओं की असली रिपोर्ट तैयार करेगी,फिलहाल इतना तय है कि सूरजपुर का रामपुर एक दिन के लिए प्रदेश की राजनीति,प्रशासन और जनसंपर्क का सबसे बड़ा मंच बन गया—जहां योजनाओं की फाइलें चौपाल तक उतरीं, घोषणाओं की बारिश हुई,उम्मीदों के सपने दिखाए गए और जनता ने एक बार फिर सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखा।
योजनाओं का ऐसा प्रदर्शन,मानो पूरा सचिवालय गांव में उतर आया हो…
रामपुर शिविर में अलग-अलग विभागों के स्टॉल देखकर ऐसा लग रहा था मानो जिला मुख्यालय का पूरा प्रशासनिक ढांचा गांव में स्थानांतरित कर दिया गया हो,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग,खाद्य विभाग, समाज कल्याण विभाग,कृषि विभाग,राजस्व विभाग,वन विभाग, आजीविका मिशन,मत्स्य पालन विभाग—हर विभाग अपने-अपने उपलब्धि मॉडल के साथ मौजूद था,प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पांच हितग्राहियों को पक्के मकान की स्वीकृति मिली,मंच पर लाभार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए और यह संदेश देने की कोशिश हुई कि सरकार गरीबों को छत देने के अपने वादे पर गंभीर है, हालांकि ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी सुनाई देती रही कि कई गांवों में आज भी अधूरे आवास और किश्तों के इंतजार में लोग परेशान हैं, मनरेगा के तहत श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए गए, खाद्य विभाग ने राशन कार्ड बांटे। समाज कल्याण विभाग ने बुजुर्गों को पेंशन स्वीकृति पत्र दिए,दिव्यांगजनों को व्हील चेयर, ट्राइसाइकिल और छड़ी वितरित की गई,राजस्व विभाग ने आबादी पट्टा बांटकर वर्षों पुराने भूमि विवादों को सुलझाने का दावा किया, मंच से बार-बार यह कहा गया कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन गांवों में बैठे लोग यह भी जानते हैं कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने से पहले योजनाएं कई बार फाइलों, सत्यापन, दस्तावेज और कार्यालयी प्रक्रियाओं के जंगल में उलझ जाती हैं।
आलू चिप्स बना राजनीति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य जागेश्वरी प्रजापति से उनके आलू चिप्स व्यवसाय की जानकारी ली,जागेश्वरी ने बताया कि उनके समूह ने अब तक 1 लाख 85 हजार रुपये की आय अर्जित की है। यह सुनते ही मुख्यमंत्री मुस्कुराए और बोले आलू चिप्स का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ रहा है,यह एक साधारण टिप्पणी जरूर थी,लेकिन राजनीतिक मंचों पर ऐसे संवाद बड़ी भूमिका निभाते हैं,इससे मंच का माहौल हल्का हुआ,महिलाएं उत्साहित हुईं और कैमरों ने उस दृश्य को तुरंत कैद कर लिया, मुख्यमंत्री ने महिलाओं को लखपति दीदी से आगे बढ़कर करोड़पति दीदी बनने का सपना दिखाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और सरकार अब 10 लाख महिलाओं को इस श्रेणी में लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, हालांकि जमीनी हकीकत यह भी है कि गांवों में छोटे स्वरोजगार समूहों को बाजार,पैकेजिंग,परिवहन और स्थायी बिक्री नेटवर्क जैसी चुनौतियों से लगातार जूझना पड़ता है,सरकारी मंच पर उत्पाद की तारीफ आसान है, लेकिन उसे बड़े बाजार तक पहुंचाना कहीं ज्यादा कठिन काम है।
रोशनी की व्हील चेयर और मां की आंखों में उतरती राहत
सरकारी आयोजनों में अक्सर आंकड़े और भाषण छा जाते हैं, लेकिन कुछ दृश्य ऐसे होते हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं,रामपुर शिविर में ऐसा ही दृश्य तब देखने को मिला जब सरईपारा की 17 वर्षीय दिव्यांग बालिका रोशनी को मुख्यमंत्री ने व्हील चेयर प्रदान की,रोशनी जन्म से दिव्यांग है,वह न ठीक से सुन पाती है और न बोल पाती है,उसकी मां अनीता कुर्रे वर्षों से बेटी को गोद में उठाकर अस्पताल,बाजार और दूसरे स्थानों तक ले जाने को मजबूर थीं,आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह संघर्ष किसी परीक्षा से कम नहीं था,जब मुख्यमंत्री ने रोशनी को व्हील चेयर सौंपी,तो अनीता कुर्रे की आंखों में राहत साफ दिखाई दी,वह दृश्य कार्यक्रम की औपचारिकता से अलग मानवीय संवेदना का प्रतीक बन गया,सरकारी योजनाओं की असली सफलता भी शायद ऐसे ही पलों में छिपी होती है,जब किसी परिवार की रोजमर्रा की पीड़ा थोड़ी कम हो जाती है।
66.99 करोड़ की सौगात और उम्मीदों का भारी बोझ
मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले के लिए जिन 87 विकास कार्यों की घोषणा की,उनमें सड़क,स्वास्थ्य,पेयजल,शिक्षा और नगरीय विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं,सबसे बड़ी परियोजना डुमरिया एनएच-43 से केवरा तक 20 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण और पुल-पुलिया निर्माण की रही, जिसकी लागत 32 करोड़ 48 लाख रुपये बताई गई,इस सड़क को जिले की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया,जिला अस्पताल में 32 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन का लोकार्पण किया गया, दावा किया गया कि अब मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों की ओर कम भागना पड़ेगा,जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में हर घर जल योजना का लोकार्पण हुआ। गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की बात कही गई,नगरीय प्रशासन विभाग ने मिनी स्टेडियम,सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीसी रोड,नाली,फुटपाथ और प्रशासनिक भवनों की लंबी सूची पेश की, लेकिन जिले के लोग यह भी जानते हैं कि कई परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं, शिलान्यास पट्टिकाएं धूल खाती रहती हैं और जनता उद्घाटन से ज्यादा निर्माण पूरा होने का इंतजार करती है,ऐसे में अब लोगों की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं,बल्कि उनके क्रियान्वयन पर होगी।


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