- बैमा पंचायत में सड़क निर्माण पर ग्रामीणों का बड़ा आरोप,बोले…‘सड़क चोरी हो गई क्या?‘पांच महीने में उखड़ गई फेवर ईंट,घटिया निर्माण छुपाने सड़क पर डाल दी मुरुम
- ग्रामीणों ने जनपद पंचायत उपाध्यक्ष और तत्कालीन उपसरपंच पर लगाया सरकारी राशि में बंदरबांट का आरोप
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां/पोड़ी बचरा,18 मई 2026 (घटती-घटना)। विकासखंड जनपद पंचायत बैकुंठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बैमा में लगभग 15 लाख रुपए की लागत से बनाई गई इंटरलॉकिंग सड़क अब ग्रामीणों के गुस्से और भ्रष्टाचार के आरोपों के केंद्र में आ गई है,गांव के मुख्य मार्ग शिवलाल के घर से आंगनबाड़ी बेलघुटरी पहुंच मार्ग तक बनाई गई इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं,ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में शुरू से ही गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी की गई,जिसका नतीजा यह हुआ कि सड़क महज पांच महीने में ही उखड़कर बिखर गई,ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन उपसरपंच बैमा एवं वर्तमान जनपद पंचायत उपाध्यक्ष बैकुंठपुर द्वारा मनरेगा योजना के तहत लगभग 15 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति कराकर निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया।
‘मेरी पहुंच ऊपर तक है…’ विरोध करने पर ग्रामीणों को मिली धमकी?
ग्रामीणों का आरोप है कि जब सड़क निर्माण कार्य चल रहा था,तभी गांव के कई लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री और मानक विहीन कार्य को लेकर आपत्ति जताई थी,लेकिन विरोध करने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर धमकी दी गई कि ‘मेरी पहुंच ऊपर तक है, मेरा कुछ नहीं होगा, जहां शिकायत करना है कर दो, ग्रामीणों का कहना है कि उस समय शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और अब सड़क की हालत देखकर पूरा गांव आक्रोशित है।
सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ, अघोषित ठेकेदारी और बंदरबांट का आरोप-गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया गया, मनरेगा योजना के नाम पर लाखों रुपए स्वीकृत कराकर सड़क निर्माण कराया गया, लेकिन वास्तविक कार्य बेहद घटिया स्तर का किया गया,ग्रामीणों का कहना है कि पूरे निर्माण कार्य में अघोषित ठेकेदारी प्रणाली अपनाई गई और सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया,लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए और जिन लोगों ने घटिया निर्माण किया है, उनसे पूरी राशि की वसूली कर शासन के खाते में जमा कराई जाए।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश,बोले… ‘गांव के विकास के नाम पर लूट बर्दाश्त नहीं ‘- ग्रामीणों ने साफ कहा है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी धन की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में हुई गड़बड़ी ने पूरे गांव को परेशान कर दिया है, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य करने वाले जिम्मेदार लोगों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठाई गई है।
‘इंटरलॉकिंग सड़क ढूंढने पर नहीं
मिल रही’ सड़क उखड़ी तो ऊपर डाल दी मुरुम!
ग्रामीणों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि गांव में बनी इंटरलॉकिंग सड़क अब ‘ढूंढने पर भी नहीं मिल रही ‘,ऐसा लग रहा है जैसे सड़क चोरी हो गई हो, आरोप है कि जब सड़क की फेवर ईंटें उखड़ने लगीं और निर्माण की पोल खुलने लगी, तब आनन-फानन में सड़क के ऊपर मुरुम डाल दिया गया ताकि घटिया निर्माण को छुपाया जा सके, लेकिन हालत यह है कि सड़क पर डाली गई मुरुम को ठीक तरीके से फैलाया तक नहीं गया, जिससे पूरा मार्ग उबड़-खाबड़ हो गया है, राहगीरों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पांच महीने भी नहीं टिक पाई सड़क,जगह-जगह से उखड़ी फेवर ईंटें
ग्रामीणों ने बताया कि इंटरलॉकिंग सड़क बनने के कुछ ही महीनों बाद सड़क पर लगी फेवर ईंटें जगह-जगह से उखड़ने लगीं। कई ईंटें टूटकर बिखर गईं,जबकि सड़क की सतह धंसने लगी,ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया दर्जे की फेवर ईंट, गिट्टी और मसाले का इस्तेमाल किया गया,मानकों के अनुसार बेस तैयार नहीं किया गया और गुणवत्ता की पूरी तरह अनदेखी की गई,ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से किया गया होता, तो सड़क कम से कम कई वर्षों तक टिकती, लेकिन यहां तो सड़क एक वर्ष भी नहीं चल पाई।
बड़ा सवाल-सड़क बनी थी या सिर्फ भुगतान?
अब गांव में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर 15 लाख रुपए की लागत से बनी इंटरलॉकिंग सड़क इतनी जल्दी कैसे खत्म हो गई? क्या निर्माण सिर्फ कागजों में मजबूत था? क्या भुगतान पहले और गुणवत्ता बाद में देखी गई? और आखिर सड़क की हालत खराब होने के बाद उसकी मरम्मत के बजाय मुरुम डालकर मामला दबाने की कोशिश क्यों की गई?
जांच हुई तो खुल सकते हैं बड़े राज
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं, सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, भुगतान प्रक्रिया और कार्य की गुणवत्ता की जांच होने पर भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं, अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों को कितना गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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