Breaking News

सोनहत/बैकुंठपुर@आग से धधक उठा ‘कैलाशपुर-घुघरा का जंगल’

Share

खाक हुई करौंदे की खुशबू…वन विभाग की सुस्ती पर सुलगते सवाल
मुख्य सड़क किनारे के जंगल नही बचा पा रहा विभाग तो दुरस्त अंचल के जंगल कैसे होगी सुरक्षा?
राजन पाण्डेय
सोनहत/बैकुंठपुर,26 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
विकास की अंधी दौड़ और प्रशासनिक लापरवाही ने अब प्रकृति के फेफड़ों पर भी हमला करना शुरू कर दिया है, सोनहत-बैकुंठपुर मुख्य मार्ग पर स्थित कैलाशपुर-घुघरा का जंगल पिछले दिनों भीषण आग की चपेट में आ गया। धधकती लपटों ने न केवल बेशकीमती वन संपदा को राख कर दिया, बल्कि राहगीरों के सफर को महकाने वाली उस प्राकृतिक विरासत को भी उजाड़ दिया, जो इस मार्ग की पहचान थी।
भीनी खुशबू की जगह अब धुएं का गुबार
कभी इस मार्ग से गुजरते वक्त राहगीरों का स्वागत ‘करौंदे के फूलों’ की भीनी-भीनी खुशबू किया करती थी, हरे-भरे करौंदे के कुंज न केवल आँखों को सुकून देते थे, बल्कि पर्यावरण को भी जीवंत रखते थे। लेकिन आज मंजर बदल चुका है, आग की विभीषिका ने उन तमाम हरे-भरे पेड़ों को जलाकर काला कर दिया है, अब वहां खुशबू की जगह धुएं का कड़वा अहसास और हरियाली की जगह राख का सन्नाटा पसरा है, जंगल अब किसी वीराने की तरह उजाड़ नजर आने लगा है।
वन विभाग की मुस्तैदी पर ‘सुलगते’ सवाल
यह आग महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वन विभाग की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जब विभाग मुख्य मार्ग के किनारे स्थित जंगल को आग से नहीं बचा पा रहा, तो घने और दूरस्थ अंचलों के जंगलों की सुरक्षा कैसे होगी? क्या फायर वॉचर्स और वन अमला केवल कागजों पर ही मुस्तैद है? मुख्य सड़क पर लगी आग को बुझाने में हुई देरी यह बताने के लिए काफी है कि वनों को बचाने के लिए किए जाने वाले तमाम दावे ‘हवा-हवाई’ हैं।
बेजुबानों का आशियाना और जैव-विविधता का नुकसान
जंगल की इस आग ने केवल पेड़ों को ही नहीं जलाया, बल्कि उन अनगिनत पक्षियों और नन्हे जीवों के आशियानों को भी राख कर दिया, जो इन करौंदे की झाडि़यों और पेड़ों पर पल रहे थे। वन विभाग द्वारा समय रहते फायर लाइन की सफाई न करना और निगरानी में ढिलाई बरतने का खामियाजा आज पूरी प्रकृति भुगत रही है।
ग्रामीणों और राहगीरों में भारी नाराजगी
कैलाशपुर क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि आग धीरे-धीरे फैली, लेकिन वन विभाग की टीम समय पर सक्रिय नहीं हुई। यदि समय रहते सुध ली जाती, तो जंगल को इस कदर उजाड़ होने से बचाया जा सकता था, अब जब जंगल का एक बड़ा हिस्सा खाक हो चुका है, तब विभाग की चुप्पी लोगों को और भी अखर रही है।
मुख्य बिंदु…
उजाड़ मंजरः मुख्य मार्ग की खूबसूरती हुई खत्म, अब सिर्फ जली हुई लकडि़यां शेष।
लापरवाहीः मुख्य सड़क के पास की आग नहीं बुझना विभाग की विफलता।
पारिस्थितिकीय क्षति : करौंदे के पेड़ों के साथ-साथ कई छोटे पौधे और वन्यजीव प्रभावित।


Share

Check Also

बालोद@ एक ही फंदे पर झूलती मिली महिला और युवक की लाश

Share क्षेत्र में मचा हड़कंपबालोद,26 अप्रैल 2026 । जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया …

Leave a Reply