दो घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित उतारा गया
बच्चों की कस्टडी मां को मिलने से दुखी युवक ने उठाया कदम,पुलिस और प्रशासन की समझाइश से टली बड़ी घटना
चिरमिरी,26 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक युवक अदालत के फैसले से आहत होकर हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया, मामला पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे घरेलू विवाद से जुड़ा है, जो अंततः कुटुंब न्यायालय मनेंद्रगढ़ तक पहुंचा था, शुक्रवार को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों बच्चों की अभिरक्षा मां को सौंपने का आदेश दिया, आदेश के पालन में युवक ने अपने दोनों बच्चों को पत्नी के हवाले कर दिया, लेकिन इस फैसले से वह मानसिक रूप से काफी आहत हो गया।
कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार, एमसीबी जिले के पोड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम साजापहाड़ निवासी बलराम सिंह और उसकी पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था, मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों की प्राथमिक अभिरक्षा मां को दी जाए, प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पुलिस और राजस्व विभाग की मौजूदगी में बच्चों को मां को सौंप दिया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद युवक की मानसिक स्थिति बिगड़ गई और उसने एक खतरनाक कदम उठा लिया।
हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक,गांव में हड़कंप
शाम करीब 6 बजे युवक गांव के पास स्थित 132 केवी हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया, यह दृश्य देखते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, मौके पर पोड़ी थाना की टीम पहुंची और हालात को नियंत्रित करने में जुट गई, सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल बिजली आपूर्ति भी बंद करवाई गई, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
प्रशासन की सूझबूझ से टली बड़ी घटना- घटना की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार समीर शर्मा और सीएसपी दीपिका मिंज भी मौके पर पहुंचे,करीब दो घंटे तक लगातार समझाइश और बातचीत का दौर चलता रहा। अंततः युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया,पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस, प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने संयम और सतर्कता का परिचय दिया, जिससे एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।
क्षणिक आवेश में उठाया कदम
पुलिस के अनुसार,युवक कोर्ट के फैसले से मानसिक रूप से व्यथित था और उसी आवेश में उसने यह कदम उठाया,फिलहाल उसे समझाइश देकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है, यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं,बल्कि मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन का उदाहरण भी है, समय रहते पुलिस और प्रशासन की सक्रियता से एक बड़ी अनहोनी टल गई, लेकिन यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में काउंसलिंग और सहारा कितना जरूरी होता है।
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