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अम्बिकापुर@अम्बिकापुर अग्निकांड : 4 घंटे धमाके होते रहे,सिस्टम देखता रहा…क्या इस बार भी बच जाएंगे जिम्मेदार ?

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। राम मंदिर रोड स्थित श्रीराम मंदिर के सामने तंग गली में 23 अप्रैल को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को हिला दिया। जिस दुकान और गोदाम को शहर वर्षों से मुकेश फटाखा और प्लास्टिक दुकान के नाम से जानता था,वहां लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के बाद लगातार 3 से 4 घंटे तक धमाकों की आवाजें आती रहीं। लोग घर छोड़कर भागते रहे,बच्चे और महिलाएं दहशत में रातभर सड़कों पर रहे। सबसे राहत की बात यह रही कि आग आगे की ओर नहीं बढ़ी। यदि लपटें सामने की आबादी की तरफ फैलतीं,तो पूरा मोहल्ला चपेट में आ सकता था। दमकल,पुलिस, बिजली विभाग और प्रशासनिक अमले ने करीब 25 से 30 घंटे तक लगातार मशक्कत कर हालात पर काबू पाया। जनहानि नहीं होना इस पूरे हादसे की सबसे बड़ी राहत रही। लेकिन हादसे के बाद अब शहर में सिर्फ एक सवाल गूंज रहा है—क्या इस बार भी जिम्मेदार बच जाएंगे?
राख हटने लगी,सबूत
कौन बचाएगा?

घटना के बाद प्रशासन ने जांच समिति बनाई है। नगर निगम की ओर से भी टीम गठित की गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मलबा हटाया जा रहा है,राख समेटी जा रही है, तब आखिर जांच किस आधार पर होगी?कितना बारूद था,कितना प्लास्टिक था, कितने सिलेंडर थे,कितने फटे,लाइसेंस किस नाम पर था,भवन किसके नाम पर है—इन तमाम सवालों के जवाब अब भी अस्पष्ट हैं।
घनी आबादी में इतना
बड़ा खतरा कैसे चलता रहा?

राम मंदिर रोड का यह इलाका घनी आबादी वाला क्षेत्र है। संकरी गलियां,आसपास मकान,दुकानों की कतार और बीच में ज्वलनशील सामग्री का कथित भंडारण—लोग पूछ रहे हैं कि आखिर वर्षों तक यह सब कैसे चलता रहा? यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हादसे के बाद जांच बैठाना आसान है,हादसे से पहले रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी थी।
पहले भी उठते रहे सवाल…
शहर में यह पहला मामला नहीं है जब हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी बाजार क्षेत्रों में आगजनी,अवैध भंडारण, यातायात अव्यवस्था और संकरी गलियों में सुरक्षा संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे उठते रहे हैं। हर बार कुछ दिन चर्चा होती है, फिर मामला ठंडा पड़ जाता है।
पीडि़तों की नजर राहत पर…
इस हादसे में कई घरों की दीवारें क्षतिग्रस्त हुईं,खिड़कियां टूटीं,घरेलू सामान खराब हुआ। प्रभावित परिवार अब राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी मुआवजा अक्सर वास्तविक नुकसान की तुलना में बहुत कम होता है, इसलिए लोग त्वरित राहत की मांग कर रहे हैं।
अब शहर जानना चाहता है…
अम्बिकापुर अब सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जवाब चाहता है।
– घनी आबादी में ऐसा कारोबार किसकी अनुमति से चल रहा था?
– अगर पटाखे नहीं थे तो धमाके किसके थे?
– पिछली कार्रवाई में जिम्मेदार कौन था?
– इस बार असली दोषी पर कार्रवाई होगी या फिर कोई और बलि चढ़ेगा?
हर बड़े हादसे के बाद वही क्रम दोहराया जाता है…
निरीक्षण,बयान,जांच,रिपोर्ट…फिर सन्नाटा। इस बार शहर देख रहा है कि सिर्फ आग लगी थी या पूरे सिस्टम की पोल खुली है।
अगर पटाखे नहीं थे,तो धमाके किसके थे?
घटना के बाद कई जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रारंभिक बयान में कहा कि वहां मुख्य रूप से प्लास्टिक का सामान रखा था,पटाखे बहुत कम या नहीं के बराबर थे। लेकिन इलाके के लोगों का सवाल है कि यदि ऐसा था,तो फिर घंटों तक धमाके कैसे होते रहे? आसमान में आतिशबाजी जैसी आवाजें किस चीज की थीं? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से यह प्रतिष्ठान पटाखा और प्लास्टिक दोनों कारोबार के रूप में जाना जाता रहा है। दीपावली के दौरान भी यहां बड़े स्तर पर पटाखों का व्यापार होता था। ऐसे में अचानक यह कहना कि वहां पटाखे नहीं थे,कई सवाल खड़े कर रहा है।
पुराना मामला भी चर्चा में…
शहरवासियों को पिछली दीपावली का मामला भी याद है,जब कुछ मात्रा में अवैध पटाखा जब्त किए जाने की कार्रवाई हुई थी। चर्चा यह भी रही कि कार्रवाई तो हुई,लेकिन जिम्मेदार कौन था,किस पर केस दर्ज हुआ और कौन जेल गया—यह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया। लोगों का आरोप है कि हर बार असली संचालक बच जाता है और कार्रवाई किसी कर्मचारी,रिश्तेदार या नाममात्र के व्यक्ति पर होती है। यही वजह है कि इस बार भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अगर पटाखे नहीं थे,तो धमाके किसके थे?
घटना के बाद कई जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रारंभिक बयान में कहा कि वहां मुख्य रूप से प्लास्टिक का सामान रखा था,पटाखे बहुत कम या नहीं के बराबर थे। लेकिन इलाके के लोगों का सवाल है कि यदि ऐसा था,तो फिर घंटों तक धमाके कैसे होते रहे? आसमान में आतिशबाजी जैसी आवाजें किस चीज की थीं? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से यह प्रतिष्ठान पटाखा और प्लास्टिक दोनों कारोबार के रूप में जाना जाता रहा है। दीपावली के दौरान भी यहां बड़े स्तर पर पटाखों का व्यापार होता था। ऐसे में अचानक यह कहना कि वहां पटाखे नहीं थे,कई सवाल खड़े कर रहा है।
पुराना मामला भी चर्चा में…
शहरवासियों को पिछली दीपावली का मामला भी याद है,जब कुछ मात्रा में अवैध पटाखा जब्त किए जाने की कार्रवाई हुई थी। चर्चा यह भी रही कि कार्रवाई तो हुई,लेकिन जिम्मेदार कौन था,किस पर केस दर्ज हुआ और कौन जेल गया—यह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया। लोगों का आरोप है कि हर बार असली संचालक बच जाता है और कार्रवाई किसी कर्मचारी,रिश्तेदार या नाममात्र के व्यक्ति पर होती है। यही वजह है कि इस बार भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अम्बिकापुर अग्निकांड : जनता के दबाव के बाद आधी रात एफआईआर मुकेश अग्रवाल समेत दो नामजद…अब क्या होगी बड़ी कार्रवाई?
राम मंदिर रोड स्थित श्रीराम मंदिर के सामने तंग गली में 23 अप्रैल को हुए भीषण अग्निकांड के मामले में आखिरकार जनता के दबाव और लगातार उठते सवालों के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार देर रात 12ः20 बजे पुलिस ने घटना से जुड़े दो आरोपियों मुकेश अग्रवाल और प्रवीण अग्रवाल उर्फ पम्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह वही मामला है,जिसमें आग लगने के बाद लगातार 3 से 4 घंटे तक धमाके होते रहे,पूरा मोहल्ला दहशत में रहा और कई परिवारों को नुकसान झेलना पड़ा।
रात 10 बजे उठा सवाल,
2 घंटे बाद एफआईआर

घटनाक्रम ने तब तेजी पकड़ी जब गुरुवार रात करीब 10 बजे एक लाइव वीडियो के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अकिल अहमद ने कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल से सीधा सवाल पूछा गया कि क्या यह सही है कि आगजनी से जुड़े व्यापारी मुकेश अग्रवाल ने चुनाव में आर्थिक सहयोग किया था, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं हो रही थी? इस सवाल के बाद महज दो घंटे में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। शहर में अब यह चर्चा तेज है कि यदि जनता का दबाव न बनता तो क्या कार्रवाई होती?
3 दिन बाद एफआईआर,
सवाल बरकरार

23 अप्रैल को हुए हादसे के बाद से लगातार सवाल उठ रहे थे कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? घनी आबादी वाले क्षेत्र में ज्वलनशील सामग्री का कथित भंडारण, घंटों तक धमाके, कई घरों को नुकसान—इन सबके बावजूद देरी ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब एफआईआर होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी।
अगर पटाखे नहीं थे,
तो धमाके किसके थे?

घटना के बाद कुछ अधिकारियों द्वारा यह कहा गया कि परिसर में मुख्य रूप से प्लास्टिक सामग्री थी, पटाखे बहुत कम मात्रा में थे। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि 3 से 4 घंटे तक लगातार धमाके होते रहे। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पटाखे नहीं थे तो धमाके किस चीज के थे?
पुराने मामलों की भी चर्चा
शहरवासियों को पिछली दीपावली के दौरान अवैध पटाखा जब्ती की कार्रवाई भी याद है। उस समय भी कार्रवाई हुई थी,लेकिन असली जिम्मेदार कौन था, यह सवाल दब गया। लोगों का आरोप है कि हर बार कर्मचारी या नाममात्र के लोगों पर कार्रवाई होती है,बड़े लोग बच निकलते हैं।
प्रभावित परिवारों को न्याय कब?
इस अग्निकांड में कई मकानों को नुकसान पहुंचा,दीवारें फटीं,खिड़कियां टूटीं और परिवारों को रातभर घर छोड़ना पड़ा। प्रभावित लोग अब मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं।
अब जनता की नजर जांच पर…
एफआईआर दर्ज होना पहला कदम माना जा रहा है,लेकिन शहर अब आगे की कार्रवाई देखना चाहता है—
– क्या उचित धाराएँ जोड़ी जाएंगी?
– क्या असली जिम्मेदारों तक जांच पहुंचेगी?
– क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी उजागर होगी?
– क्या पीडि़त परिवारों को राहत मिलेगी?
जनता की आवाज़ का असर
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि जब जनता सवाल पूछती है, तब सिस्टम को जवाब देना पड़ता है।
अब अम्बिकापुर इंतजार कर रहा है…
क्या यह सिर्फ एफआईआर तक सीमित रहेगा, या सच में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
भावुक पोस्ट के बाद एफआईआर : अम्बिकापुर अग्निकांड में मुकेश
और प्रवीण अग्रवाल पर केस,सिर्फ मामूली धाराओं में कार्रवाई से उठे सवाल

राम मंदिर रोड स्थित भीषण अग्निकांड मामले में सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट कर माफी मांगने के बाद आखिरकार मुकेश अग्रवाल और प्रवीण अग्रवाल पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125,270 और 287 के तहत मामला कायम किया है। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद अब धाराओं को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है,वे ज़मानती श्रेणी की बताई जा रही हैं और इनमें अधिकतम 6 माह तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में शहर में चर्चा है कि इतने बड़े अग्निकांड,घंटों धमाकों,जान-माल के भारी खतरे और कई परिवारों को नुकसान के बाद क्या इतनी हल्की धाराएं पर्याप्त हैं?
पहले माफी फिर केस
घटना के बाद पहली बार मुकेश अग्रवाल की ओर से सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट सामने आई थी,जिसमें शर्मिंदगी जताते हुए माफी मांगी गई थी। इसके कुछ समय बाद अब एफआईआर दर्ज होने से मामला और गरमा गया है।


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