बिलासपुर,25 अप्रैल 2526। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य खनन के खिलाफ अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और जयनंदन सिंह पोर्ते ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें कहा था कि, ग्राम घठबार्रा के लोगों को वन अधिकार कानून, 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार मिले थे। जिन्हें साल 2016 में जिला समिति ने रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने 2022 में फेज-2 कोल ब्लॉक की मंजूरी को भी चुनौती दी थी। उनका कहना था कि ग्रामसभा की सहमति लिए बिना खनन की मंजूरी दी गई, जो अवैध है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति कोई वैधानिक संस्था नहीं है, इसलिए वह ग्रामसभा या ग्रामीणों की ओर से सामुदायिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के साल 2012 और 2022 के आदेशों को सही ठहराते हुए कहा कि पारसा ईस्ट और केते बासन कोल ब्लॉक के फेज-1 और फेज-2 में खनन की प्रक्रिया वैध है। कोर्ट ने माना कि खनन की मंजूरी के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताओं और नियमों का पालन किया गया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी थी।
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