रायपुर,25 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किफायती बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है किमान्यता प्राप्त सभी निजी स्कूलों में अब केवल एनसीआरटीई की पाठ्य पुस्तकों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य होगा।
निजी किताबों के दबाव पर सख्ती : जारी आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी निजी स्कूल छात्रों या अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यदि किसी स्कूल द्वारा ऐसा किया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पालकों को राहत देने का प्रयास : सरकार का उद्देश्य अभिभावकों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च को कम करना और सभी के लिए शिक्षा को सुलभ बनाना है। इस निर्णय से अब अभिभावकों को महंगी किताबों के बोझ से राहत मिलेगी।
सीबीएसई और सीजी बोर्ड दोनों के लिए नियम लागू :
निर्देशों के अनुसार सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में केवल एनसीआरटीई का पाठ्यक्रम लागू रहेगा। सीजी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में एसआरटीई द्वारा प्रकाशित किताबें निःशुल्क दी जाती रहेंगी। पहली से 8वीं तक शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हृष्टश्वक्रभ् किताबें अनिवार्य होंगी।
दुकानों और यूनिफॉर्म खरीद में भी स्वतंत्रता
स्कूल अब छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अभिभावकों को विकल्प मिलेगा।
शिकायतों के लिए पारदर्शी व्यवस्था
जिला स्तर पर शिकायतों के निपटारे के लिए पारदर्शी सिस्टम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षा का स्तर समान होगा बल्कि अभिभावकों को आर्थिक राहत भी मिलेगी। आने वाले समय में इस निर्णय का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
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