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नई दिल्ली@कैबिनेट : चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील,जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी

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नई दिल्ली,10 मार्च 2026। केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को आसान बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
कैबिनेट ने 8.8 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी दी हरी झंडी : देश में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इन फैसलों में रेलवे, हाईवे, एविएशन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
जल जीवन मिशन को दिसंबर
2028 तक बढ़ाने की मंजूरी

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये के फंड में से सबसे बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है। सरकार ने ‘जल जीवन मिशन’ के विस्तार के लिए 8.7 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। केन्द्र सरकार ने उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 3,839 करोड़ रुपये के 4-लेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज बैठक में उक्त आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बदनवार-पेटलावाड़-थंदला-तिमारवानी खंड (एनएच-752डी) के 4-लेन निर्माण को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर तैयार किया जाएगा।
इस परियोजना में 80.45 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। यह कॉरिडोर उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के तिमारवानी इंटरचेंज तक निर्बाध 4-लेन सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना का उद्देश्य यात्रा सुगम बनाना और इसमें लगने वाले समय में लगभग एक घंटे की कमी करना है।


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