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नई दिल्ली@वास्तविक विकास के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी : राष्ट्रपति मुर्मु

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नई दिल्ली,08 मार्च 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि सही अर्थों में विकास हासिल करने के लिए देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिलाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें हर कदम पर समर्थन देना भी जरूरी है। राष्ट्रपति रविवार को यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान करना तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और महिला सशक्तीकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराना था। राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और उद्यमिता जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। और पंचायतों में ग्रामीण विकास का नेतृत्व भी कर रही हैं। कई महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप और कॉरपोरेट जगत में भी अपनी क्षमता और योग्यता से नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। खेल जगत में भी बेटियां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण यह विश्वास पैदा करते हैं कि अवसर और समर्थन मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकती हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत तेजी से ‘वूमन-लेड डेवलपमेंट’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि देश में स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल कर ली गई है और उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात के आधार पर छात्राओं की संख्या अधिक है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे एसटीईएम क्षेत्र की छात्राओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की बेटियां ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं रोजगार देने वाली उद्यमी के रूप में भी उभर रही हैं। स्टार्ट-अप इंडिया योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले आधे से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है। उन्होंने बताया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर वर्तमान में दो लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सक्रिय हैं।


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