- केंद्र और राज्य सरकार के महत्वाकांछी प्रोजेक्ट पर पी एच ई विभाग लगा रहा पलीता
- सफेद हाथी साबित हो रही भारी भरकम लागत की पानी टँकीया
- कही एक तो कही दो साल से टँकी निर्माण पूर्ण लेकिन नही मिल रहा पानी
- पानी मिलने से पहले टूटने लगे नल कनेक्शन अब दुबारा उन्हें कौन रिपेयर करेगा बना अहम सवाल?
- सोनहत में आज तक नही है पी एच ई का कार्यालय, ग्रामीणों को होती है परेशानी

-राजन पाण्डेय-
कोरिया 31 मई 2025 (घटती-घटना)। जल ही जीवन है, जल है तो कल है… ये स्लोगन चर्चित है और जब भी जल की बात आती है, ये लाइन की चर्चा जरूर होती है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन भी लगातार सुर्खियों में है, वजह, योजना की बदहाली और योजना में भ्रष्टाचार. केंद्र सरकार ने जिस अच्छी मंशा के साथ योजना की शुरुआत की थी, उस मंशा पर पलीता लग गया है और अधिकतर जगहों पर जल जीवन मिशन योजना ने दम तोड़ दिया है, इसलिए ऐसा लग रहा है मानो जल जीवन मिशन को ‘जेब भरो मिशन’ बना दिया गया है।
2023 विधानसभा चुनाव के पहले छग में जल जीवन मिशन योजना का मुद्दा खूब गरमाया था और विपक्ष में रहते बीजेपी ने सरकार बनने पर गड़बड़ी पर कार्रवाई की बात कही थी. जल जीवन मिशन योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा शुरू से सुर्खियों में रहा है. योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा आज भी गरमाया हुआ है. प्रदेश में सरकार बदल गई और विपक्षी बीजेपी, सााधारी बन गई है, लेकिन जल जीवन मिशन की गड़बडि़यों पर कुछ नहीं हुआ. नतीजा, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और लोगों का जीवन बदलने वाली योजना का दावा खोखला साबित हुआ है, गांवों में जल की समस्या खत्म करने की मंशा थी, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंस गई है। कोरिया जिले में भी जल जीवन मिशन की बदहाली छिपी नहीं है, सोनहत और बैकुंठपुर लॉक में गांव-गांव में करोड़ों खर्च कर टंकी बनाई गई है, लेकिन घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, ज्यादातर जगहों में पानी का सोर्स नहीं है, ऐसे में करोड़ों की पानी टंकी, सफेद हाथी साबित हो रही है, योजना में गड़बड़ी का आलम यह है कि गांवों में 100 फीसदी ‘हर घर जल’ देना है, किंतु घरों तक पाइप लाइन तक नहीं पहुंची है और वहां के रहवासियों को एक बूंद पानी का इंतजार है, जल जीवन मिशन योजना के क्रियान्वयन में बड़ी लापरवाही बरती गई है, जल के सोर्स की व्यवस्था के बिना, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के लिए योजना के तहत कार्य कराया गया है और करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों को जल उपलध नहीं है।
सोनहत क्षेत्र में जल जीवन मिशन का हाल
ग्राम पंचायत सोनहत में जल जीवन मिशन का बुरा हाल है पहले नल का ठीहा बनाया गया और पूर्ण कर दिया गया इसके बाद धीरे धीरे पानी टँकी का काम शुरू हुआ, पानी की टँकी बनते आधे से ज्यादा नल के ठीहे टूट गए, पाइप लाइन खराब हो गई। टँकी बनी तो कनेक्शन नही हुआ आलम यह हो गया कि अभी भी पुरानी पानी टँकी से महज दो से तीन वार्डो में पानी आ रहा जबकि यहाँ 20 वार्ड है नई टँकी में जहां नल है वहां जल नही और जहाँ जल है वहां नल नही की स्थिति है, वह बगल के ग्राम ओर्गाई और कैलाशपुर में पानी टँकी शो पीस खड़ी है पानी की एक बूंद इतनी भारी भरकम टँकी से लोगो को नही मिल रहा है लोग पानी के लिए हलकान हो गए हैं। सलगवां पोड़ी केशगवां बलिया का हाल भी कुछ ऐसा ही है नल है जल नही और जल है तो नल
रामगढ़ क्षेत्र की सात पंचायतो का बुरा हॉल
रामगढ़ क्षेत्र में बड़ी टँकी तो नही बनाई गई है बिजली नही होने के कारण सौर संचालित प्लांट लगाया जा रहा रामगढ़ में आलम है कि स्टेडियम के सामने लगे प्लांट में टँकी नही लगी है इसके अलावा एक प्लांट सिंघाड़ी पारा में संचालित है जहां गिनती के 4 से 5 घरों को पानी मिल रहा है, अन्य मुहल्ले में कही कनेक्शन खराब हो गए कही मोटर नही लगाया गया है तो कही कनेक्शन ही नही हुआ है चुलदार नतवाही सिंघोर धनपुर सेमरिया अमृतपुर में बामुश्किल एकाद जगह कुछ घरों में पानी मिल रहा है बाकी सभी प्लांटों की स्थिति दयनीय है।
कटगोड़ी क्षेत्र में तो बदतर है हालत
कटगोड़ी के दमुज लजी में टँक बनाई गई पर पानी 2 साल से नही मिल रहा एक ग्रामीण ने आवेदन दिया तो विभाग ने आपके घर के सामने हैंड पम्प लगा है कहके आवेदन निराकरण कर दिया पर यह नही बताया कि पानी कब तक मिलेगा इसी तरह केराझरिया तर्रा बसेर रावत सरई लटमा सुंदरपुर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है कही नल नही लगा कही टँकी एकाद जगह जहां सोलर संचालित प्लांट लगे है वहां कुछ घरों को पानी मिलने की जानकारी मिली है। बाद बाकी जगहों का काफी बुरा हाल है।
भैसवार बंशीपुर में नही मिल रहा पानी
जल जीवन मिशन के तहत ग्राम भैसवार में भी पानी के लिए नल कनेक्सन बनाये गए है जो पूरी तरह फिलहाल शो पीस बने हुए हैं ग्रामीण बताते हैं कि भैसवार जामटिकरा में में जल जीवन मिशन के तहत पानी नही मिल पा रहा है, अन्य ग्रामो की तरह यहां भी यही नल है तो जल नही और जल है नल नही की स्थिति बनी हुई है। भैसवार के अलावा ग्राम बंशीपुर नवाटोला कचोहर इत्यादि में क्रेडा ने प्लांट लगा दिया है, पानी भी चालू है लेकिन पी एच ई में घर घर कनेक्शन नही किया है और नल भी नही लगाया गया है, गिधेर चंदहा कदना में कनेक्शन नही किया गया है, पाराडोल में बड़ी टँकी बन गई है लेकिन नल कनेक्शन नही हुआ है जिससे पिछले 2 साल से पानी नही मिल रहा है।
ब्लॉक स्तर पर नही है कोई कार्यालय,मुख्यालय में नही रहते अधिकारी
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का ब्लॉक स्तर पर कोई कार्यालय संचालित नही है इससे ग्राम जनों को भारी परेशानी होती है यदि किसी ग्रामीण को कोई काम हो या कोई आवेदन देना हो तो सीधे जिला मुख्यालय बैकुंठपुर जाना पड़ता है जिससे भारी परेशानी होती है । जबकि नियमानुसार खण्ड स्तर पर ग्रामीणों की सुविधानुसार पी एच ई का एक कार्यालय तो होना ही चाहिए लेकिन अभी तक कोई कार्यालय नही है, पी एचई के अधिकारी और कमर्चारी भी सोनहत मुख्यालय में निवास नही करते जिससे ग्राम वासी जाएं भी तो जाए कहाँ सिर्फ दो तीन हैंड तकनीशियन के मत्थे पूरा ब्लॉक निर्भर है और उनसे भी सम्पर्क ब मुश्किल ही हो पाता है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि सोनहत विकासखण्ड स्तर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का एक कार्यालय खोला जावे।
बंदरबाट करने की मंशा रखने वालों के आगे योजना ने दम तोड़ रही
योजना शुरू करने केंद्र सरकार की मंशा बेहद ही अच्छी रही है और ग्रामीणों के जीवन में बदलाव के लिए जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत की थी, लेकिन बंदरबाट करने की मंशा रखने वालों के आगे ‘योजना’ ने दम तोड़ दिया है, हर घर तक जल पहुंचाने की सोच को भ्रष्टाचार के दीमक ने खत्म कर दिया है, यह बात तय है कि जल जीवन मिशन योजना के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में सरकार सजग नहीं रही, स्थिति यह रही है कि एक तरफ करोड़ों खर्च होते रहे और दूसरी ओर बंदरबाट होती रही. इस वजह से योजना का वैसा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला,जिस उम्मीद के साथ सरकार ने योजना की शुरुआत की थी, अब देखने वाली बात होगी कि सरकार, आगे क्या कदम उठाती है? लाखो की पानी टंकी, सफेद हाथी बनेगी रहेगी या फिर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार सार्थक पहल करेगी?
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