- सीएमएचओ क्या एनएचएम विभाग को करेंगे कार्यवाही के लिए अनुशंसा?
- कार्यवाही की अनुशंसा को लेकर सीएमएचओ कोरिया की भूमिका संदिग्ध?


-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,23 मार्च 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में सोनहत में पदस्थ बीडीएम शिवम गौतम पर घूसखोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। दैनिक घटती-घटना अखबार में लगातार इनकी संदिग्ध गतिविधियों की खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया,लेकिन सूत्रों के अनुसार,सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) कार्यालय इस मामले को उलझाने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो भाजपा के बड़े नेता शिवम गौतम को बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। संविदाकर्मी होने के कारण शिवम गौतम के खिलाफ सीधी कार्यवाही कर उन्हें नौकरी से निकाला जाना चाहिए,लेकिन भाजपा के बड़े नेता कथित रूप से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें केवल सोनहत से हटाया जाए,लेकिन नौकरी से ना निकाला जाए। इस वजह से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
कंप्यूटर ऑपरेटर से बीडीएम बनने की कहानी भी संदिग्ध
शिवम गौतम पहले जिला अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। बाद में वे कब और कैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन एच एम) में भर्ती हुए और फिर सोनहत के बीडीएम बन गए,यह एक जांच का विषय है। बताया जाता है कि कांग्रेस शासनकाल में उनकी बीएमओ से टकराव की स्थिति बनी थी,लेकिन तत्कालीन सीएमएचओ ने बीडीएम का पक्ष लिया था। यह दर्शाता है कि शिवम गौतम स्वास्थ्य विभाग में काफी प्रभावशाली रहे हैं।
भ्रष्टाचार की गहराई:सबको मिलता था हिस्सा?
शिकायतों के अनुसार,शिवम गौतम अपने इन्सेंटिव का 65 प्रतिशत अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर करवाते थे। यह भी सामने आया है कि यह रकम बीएमओ की जानकारी में थी,जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसका हिस्सा सीएमएचओ तक भी पहुंचता होगा। यही कारण है कि इस मामले की जांच में काफी देरी हुई है। आमतौर पर प्रशासन एनएचएम से जुड़ी शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करता,जिससे संदेह होता है कि भ्रष्टाचार के तार उच्च स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
ईमानदार कलेक्टर की चुप्पी पर सवाल
कोरिया जिले में पिछले 8 महीनों से पदस्थ कलेक्टर अपनी निष्पक्ष और तेज़ कार्यवाही के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने धान खरीदी समिति के एक प्रबंधक पर तत्काल एफआईआर दर्ज करवाई थी और खबर को रातोंरात प्रमुख समाचार-पत्रों में प्रकाशित करवा दिया था। लेकिन केंद्रीय योजनाओं में रिश्वतखोरी के इस बड़े मामले में अब तक उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की है। आखिर कलेक्टर की चुप्पी के पीछे क्या कारण है? यह एक बड़ा सवाल बन गया है। क्या उन्हें भी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है,या फिर स्वास्थ्य विभाग का भ्रष्टाचार इतना गहरा है कि इस पर कार्यवाही करना आसान नहीं? बीडीएम शिवम गौतम के खिलाफ घूसखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर हैं। भाजपा ने बड़े नेता के कथित हस्तक्षेप और सीएमएचओ की संदिग्ध भूमिका से यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। प्रशासन की निष्कि्रयता और कलेक्टर की चुप्पी से जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि क्या निष्पक्ष जांच होगी या यह मामला भी राजनीतिक संरक्षण के चलते ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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