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नई दिल्ली@जब तक भारत विकसित नहीं हो जाता,तब तक न थकूंगा,न रुकूंगा : प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली,07 अक्टूबर 2026। ‘वी विल डू इट…हम करके दिखाएंगे।’ पीएम मोदी ने बुधवार को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में इस नारे का 19 बार जिक्र किया। उन्होंने एक घंटे की स्पीच में कहा, ‘जब तक भारत विकसित नहीं होता, तब तक न थकूंगा, न रुकूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन के लिए जीता हूं। जिसने मुझे गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया। जिसने मेरा विरोध किया, उसने लोकतंत्र की शक्ति समझाई।’ उन्होंने कहा कि 25 साल पीछे मुड़कर देखने पर उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव आता है।
25 साल में देश कहां
पहुंचा, यह देखना जरूरी

मोदी ने कहा…हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है, ये एहसास ही अमृत है। इसके सामने सत्ता सुख कुछ नहीं है। पद-प्रतिष्ठा तो कहीं भी मिल सकती है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिलेगी। 25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा,बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा। पीएम ने कहा, ‘हमारे दिल की हर धड़कन में क्या एक ही संकल्प नहीं गूंजना चाहिए कि हमें प्राचीन भारत के गौरव को पुनर्जीवित करना है। कभी भारत विश्व की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था। समय का चक्र बदला,गुलामी का कालखंड आया,भारत को लूटकर तबाह कर दिया गया। जो भारत दुनिया को दिशा दिखाता था,उसके पुस्तकालय जला दिए गए। छोटे-छोटे संकट विकराल होने लगे। अकाल,कई विभीषिकाएं,लेकिन तब भी मां भारती की संतानों का साहस नहीं टूटा।
मोदी बोले…2015-25 के दशक में खेती की वृद्धि दर सबसे ज्यादा : पीएम मोदी ने कहा, ‘आज मेड इन इंडिया फोन का जलवा है। कभी भारत में ब्लैकआउट हेडलाइन बनती थी, आज सोलर पावर के चर्चे होते हैं। आज खेती का उदाहरण भी है। आजादी के बाद खेती के बढ़ने की दर किसी दशक में रही तो 2015-25 के दशक में सबसे ज्यादा रही। ‘पीएम मोदी ने कहा, ‘जब गुजरात पहुंचा तो प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब सिर्फ जनशक्ति का भरोसा था। इसी विश्वास को मैंने अपना सामर्थ्य बनाया। मैंने जनता को साथ लेकर निर्णय लिए,नीतियां बनाई और इन्हें लागू किया। यही मंत्र- वी विल डू इट…जब जनता साथ हो तो परिणाम ही आते हैं। गुजरात ने करके दिखाया। पीएम मोदी ने कहा…‘तब विकराल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं। देश का हर नागरिक नया रास्ता खोज रहा था। भारत की इकोनॉमी को लेकर दुनिया कहने लगी थी- इट्स अ गॉन केस। तब कोई ज्योत दिखती नहीं थी। निराशा में डूबे देश को आशा की जरूरत थी। उन्होंने कहा, ‘मैंने वही काम किया, जो मुझे आता था। मैंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और उनके साथ मिलकर फिर दोहराया- वी विल डू इट। अब तस्वीर बदल गई है। ‘
मोदी बोले- मैं मिशन के लिए जीने वाला इंसान
मोदी ने नारा लगवाया, ‘विकसित भारत बाय 2047, वी विल डू इट। तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी- वी विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत- वी विल डू इट, ओलिंपिक्स का आयोजन- वी विल डू इट, अंतरिक्ष में कदम- वी विल डू इट। ये ऊर्जा, ये आत्मविश्वास अद्भुत है। जहां ये बातें लहू बनकर दौड़ती हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। 25 वर्षों की ये यात्रा, लोग इसे उपलब्धि मानते हैं। ‘ उन्होंने कहा, ‘मेरे काम संगठन का काम करने वाले का ही था। मैंने चुनाव लड़ाए थे, लेकिन एक भी चुनाव लड़ा नहीं था। चुनावी राजनीति में चमकने की चाहत होती तो बहुत पहले ही मैदान में उतर सकता था, लेकिन ये मेरा मिजाज नहीं था। मेरा क्या होगा, ये सोचा ही नहीं। बाल्यकाल से जो शिक्षा मिली, मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान रहा हूं।
मोदी बोले- ये समय आराम का नहीं है
पीएम ने कहा, ‘हर चीज में भारत सिरमौर है। टेक्नोलॉजी, खेल, उद्योग में भारत का तिरंगा लहराए। आज पूरे विश्व में भारत के पायलट की चर्चा है। एक दिन वो भी आएगा, जब दुनिया मेड इन इंडिया प्लेन की चर्चा करेगी। ये लक्ष्य तभी पूरे होंगे, जब हम दूरदर्शी नीतियां बनाएं और परिश्रम की पराकाष्ठा करें। ‘ उन्होंने कहा, ’ अब ये समय आराम का नहीं है। ये समय सोच के साथ आगे बढ़ने का है। देश के लिए खुद को खपा देने का है। आज भारत में जितने युवा हैं, वो इतिहास से मिला बहुत बड़ा मौका है, जिसे हमें गंवाना नहीं है। ‘
मोदी बोले- 25 साल में
देश कहां पहुंचा,ये अहम…

पीएम मोदी ने कहा…‘हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है,ये एहसास ही अमृत है। इसके सामने सत्ता सुख कुछ नहीं है। पद-प्रतिष्ठा तो कहीं भी मिल सकता है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिलेगी। वो भारत,जिसने अंधकार के युग में भी मानवता को ज्ञान दिया,मूल्यों का प्रकाश दिया, उसकी सेवा का मौका अमूल्य है। 25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा,बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा। ‘
कर्म देश के लिए साधना है…
पीएम ने कहा…‘जीवन का एक ही ध्येय था,देश के लिए निस्वार्थ कर्म। मेरे लिए कर्म ही सबकुछ है। कर्म ही मेरा धर्म है। गीता ने हमें सिखाया है कर्मण्ये वाधिकारस्ते,मैं कर्म को अपना धर्म मानता हूं। हर कर्म पूरी क्षमता से करता रहूं।
सपने बड़े और हौसले बुलंद होने चाहिए…
पीएम मोदी ने कहा,‘चंद्रयान ने मुझे असफलता से उठना सिखाया। कोरोना ने सामूहिक चेतना सिखाई। मीडिया ने मुझे खट्टे-मीठे अनुभव से आगे की बढ़ने की प्रेरणा दी। हर गांव,हर गरीब ने मुझे सिखाया कि साधन-संसाधन भले ही सीमित हो,लेकिन सपने बड़े होने चाहिए। हौसले बुलंद होने चाहिए। ‘मोदी ने कहा,‘मैंने ईश्वर से मांगा कि सीखना कभी कम न हो। आज जितना पीछे मुड़कर देखता हूं,उतना कृतज्ञता का भाव ही आता है। हर घटना ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है। मुझे नम्र होना सिखाया। जिसने मुझे गिराया,उसने मुझे खड़ा होना सिखाया। जिसने मेरा विरोध किया, उसने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई।
मोदी बोले…मेरे जीवन में सबसे
बड़ा योगदान जनता का

मोदी ने कहा…‘140 करोड़ भारतवासियों के लिए प्रार्थना की। प्रार्थना ये कि परमात्मा मुझे इतनी शक्ति दे कि मैं अपने देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकूं। देशवासियों की और सभी लोगों की दिन-रात सेवा कर सकूं। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता जनार्दन का है। ‘
मोदी बोले…मैंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के सीएम के रूप में शपथ ली
पीएम ने कहा…‘7 अक्टूबर 2001 को जब मैंने गुजरात के सीएम के रूप में शपथ ली थी तब सोचा नहीं था कि कभी ये पड़ाव भी आएगा। आज मुझे हेड ऑफ द गवर्नमेंट के तौर पर सेवा करते हुए 25 साल हो गए हैं। ये जनता के निरंतर आशीर्वाद का परिणाम है। ये भाजपा,एनडीए और लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा रखने वालों का मैं आभार व्यक्त करता हूं। ‘


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