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सूरजपुर@गणित शिक्षक को जन शिक्षक बनाए जाने पर अभिभावकों में नाराजगी

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करंजी हायर सेकेंडरी स्कूल में गणित की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा,पिछले परीक्षा परिणाम को लेकर भी उठे सवाल…


-संवाददाता-
सूरजपुर,07 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करंजी में पदस्थ गणित विषय के शिक्षक महेंद्र राजवाड़े को जन शिक्षक के कार्य में लगाए जाने को लेकर अभिभावकों में नाराजगी सामने आ रही है,अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बेहतर होने के बावजूद गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक को नियमित शिक्षकीय कार्य से अलग कर जन शिक्षक की जिम्मेदारी दिए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों के अनुसार, गणित ऐसा विषय है जिसमें विद्यार्थियों को नियमित अध्यापन,अभ्यास और विषय शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, खासकर बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए गणित की तैयारी परीक्षा परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में विद्यालय के गणित शिक्षक को अन्य दायित्व में लगाए जाने को लेकर अभिभावक सवाल उठा रहे हैं।
नियमित गणित की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा-बताया गया है कि महेंद्र राजवाड़े को जन शिक्षक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद विद्यालय में गणित विषय की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की बात अभिभावकों द्वारा कही जा रही है। उनका कहना है कि विद्यालय में यदि विषय शिक्षक उपलब्ध है तो उसका प्राथमिक दायित्व विद्यार्थियों को नियमित रूप से अध्यापन कराना होना चाहिए,अभिभावकों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आगामी परीक्षाओं को देखते हुए विद्यार्थियों को अभी से विषयवार तैयारी की जरूरत है। उनका कहना है कि गणित में नियमित अभ्यास और शिक्षक की निगरानी नहीं होने से विद्यार्थियों की तैयारी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जन शिक्षक की जिम्मेदारी पर भी जांच की मांग- अभिभावकों का कहना है कि शासन स्तर पर व्याख्याता एवं विषय शिक्षकों को जन शिक्षकीय कार्य में लगाए जाने को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं, यदि संबंधित निर्देशों में विषय शिक्षकों को ऐसे कार्यों से अलग रखने अथवा विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को प्राथमिकता देने का प्रावधान है,तो करंजी हायर सेकेंडरी स्कूल में गणित शिक्षक को जन शिक्षक बनाए जाने की प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए,हालांकि, इस संबंध में संबंधित आदेश अथवा विभागीय निर्देश की प्रति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, इसलिए इस बिंदु पर अंतिम स्थिति संबंधित शिक्षा विभाग के आदेश और अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की-अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने तथा विद्यालय में गणित विषय की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित कराने की मांग की है, उनका कहना है कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे विषय शिक्षकों की कमी अथवा अन्य प्रशासनिक दायित्वों के कारण नियमित अध्यापन प्रभावित न हो, अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी,विषय संबंधी कठिनाइयों को दूर करने और कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है,इसलिए विषय शिक्षक की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रशासनिक निर्णय का असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
पिछले परीक्षा परिणाम को लेकर भी चिंता
अभिभावकों ने विद्यालय के पिछले परीक्षा परिणाम को लेकर भी सवाल उठाए हैं, उनके अनुसार,पिछले वर्ष कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम करीब 17 प्रतिशत रहा था,ऐसे में विद्यालय में उपलब्ध विषय शिक्षकों का नियमित अध्यापन में उपयोग और विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है,अभिभावकों का कहना है कि कमजोर परीक्षा परिणाम के बाद विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए,ताकि विद्यार्थियों की शैक्षणिक कमियों को दूर किया जा सके और आगामी बोर्ड परीक्षा में परिणाम बेहतर हो।


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