-संवाददाता-
अम्बिकापुर,07 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के झिक्की गांव में मध्यप्रदेश की शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब की सप्लाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आबकारी विभाग की संभागीय उड़नदस्ता टीम ने सुदर्शन गुप्ता के घर के पीछे बरामदे में तिरपाल से छिपाकर रखी गई 35 पेटी यानी 1,750 नग गोवा व्हिस्की बरामद की। जब्त शराब की मात्रा करीब 315 लीटर और अनुमानित कीमत 2.50 लाख रुपये बताई गई है।
जानकारी के मुताबिक 6 अक्टूबर की रात सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता को मुखबिर से सूचना मिली थी कि झिक्की निवासी सुदर्शन गुप्ता के घर दूसरे राज्य की विदेशी शराब की बड़ी खेप रखी गई है। सूचना के आधार पर 7 अक्टूबर की सुबह टीम ने घर पर दबिश दी। तलाशी में घर के पीछे बरामदे में तिरपाल के नीचे शराब की 35 पेटियां मिलीं। मौके पर सुदर्शन गुप्ता मौजूद था, जिसे आबकारी अधिनियम की धाराओं 34(1), 34(2), 36 और 59(क) के तहत गिरफ्तार कर जेल दाखिल की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई बड़ी, लेकिन सवाल उससे भी बड़ा : आबकारी विभाग की टीम लगातार अवैध शराब और नशे के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है। पिछले महीनों में भी उड़नदस्ता टीम ने नशीले इंजेक्शन, कैप्सूल, अवैध महुआ शराब और मिलावटी शराब से जुड़े मामलों में कार्रवाई की है। इसके बावजूद सवाल यह है कि मध्यप्रदेश से शराब की 35 पेटियां आखिर झिक्की तक कैसे पहुंचीं? यदि शराब को बिक्री या खपाने के लिए लाया गया था तो इसका सप्लायर कौन है? परिवहन किस माध्यम से हुआ? रास्ते में कितने चेकिंग प्वाइंट पार हुए? और सबसे अहम—क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का स्टॉक था या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क काम कर रहा है?
सिर्फ घर का ‘स्टॉकिस्ट’ या
बड़े नेटवर्क की कड़ी?
35 पेटियां कोई छोटी मात्रा नहीं है। इतनी बड़ी खेप को घर के पीछे तिरपाल से ढककर रखना इस बात की ओर इशारा करता है कि मामला केवल अवैध रूप से कुछ बोतलें रखने तक सीमित नहीं हो सकता। हालांकि इसका अंतिम सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। आबकारी विभाग के लिए अब असली चुनौती आरोपी को गिरफ्तार करने से आगे बढ़कर शराब की सप्लाई चेन तक पहुंचना होगी। खास तौर पर यह पता लगाना जरूरी होगा कि मध्यप्रदेश की यह शराब झिक्की तक किस रास्ते से पहुंची और इसे आगे किन इलाकों में खपाया जाना था। यदि जांच केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित रही तो असली सप्लायर और नेटवर्क पर्दे के पीछे ही रह जाएगा।
‘ऑपरेशन’ की सफलता का पैमाना नेटवर्क तक पहुंचना होगा
संभागीय उड़नदस्ता पहले भी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और अवैध शराब पकड़ चुका है। अप्रैल में 396 नशीले इंजेक्शन तथा जुलाई में 3,528 नशीले कैप्सूल की कार्रवाई का भी विभागीय टीम ने खुलासा किया था। अगस्त में अवैध महुआ शराब की कथित मिनी फैक्ट्री पर कार्रवाई और सितंबर में मिलावटी शराब से जुड़े मामले भी सामने आए।ऐसे में झिक्की की यह कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी असली सफलता तभी मानी जाएगी जब एमपी शराब की खेप के स्रोत, परिवहनकर्ता, सप्लायर और संभावित खरीदारों तक जांच पहुंचे। वरना हर बार एक आरोपी जेल जाएगा और कुछ समय बाद उसी रास्ते से नशे का नया माल पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। फिलहाल आबकारी विभाग ने सुदर्शन गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच 35 पेटियों पर खत्म होती है या इसके पीछे छिपे पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।
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