युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं,दोषी बख्शे नहीं जाएंगे : पीएम मोदी
नई दिल्ली,23 जुलाई 2026। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाए जाएंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम का यह ऐलान कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष के प्रदर्शन के बीच आया है। सीजेपी पिछले 34 दिन से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 26 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं उनका इलाज चल रहा है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पेपर लीक केस के लिए
पहली बार फास्ट ट्रैक कोर्ट
देश में अब तक पेपर लीक मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी,इसलिए फैसला आने में कई साल लग जाते थे। अब प्रधानमंत्री ने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है, ताकि फैसला तेजी से हो सके। भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इनका गठन 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर किया गया था। आयोग ने देशभर में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए स्पेशल फंड की अनुशंसा की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड भी बेहतर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार,रेप और पॉक्सो मामलों के लिए बनी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2019 से 2025 तक 3.06 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है। इन अदालतों में मामलों के निपटारे का रेट 96.28′ है, यानी जितने नए मामले आए,लगभग उतने ही मामलों का निपटारा भी हुआ। हालांकि, नए मामले लगातार दर्ज होने के कारण 2025 के अंत तक 2.45 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग थे,जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी।
पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को लेकर विपक्षी दलों ने जताया विरोध
पेपर लीक में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक्स पोस्ट पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सागरिका घोष ने संसद परिसर से बाहर मीडिया से कहा कि पहले इस्तीफ़ा, फिर चर्चा। हम सदन में नीट पर चर्चा की मांग कर रहे हैं,लेकिन चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम चर्चा नहीं करेंगे। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा क्यों नहीं देंगे? यह एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह विरोध सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा। हम सड़कों पर उतरेंगे। हमने तय किया है कि हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़े रहेंगे। हम जरा भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्हें इस्तीफ़ा देना ही होगा। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि उनके (धर्मेंद्र प्रधान) के कार्यकाल में कितने पेपर लीक हुए, इस पर एक श्वेत पत्र आना चाहिए। कितने लोगों पर मुकदमा चला, कितनों को सजा मिली, कितने जेल गए, कितनों को सज़ा सुनाई गई, अब तक कुछ नहीं हुआ है।
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