सोनम वांगचुक की अपील पर अभिजीत दीके ने खत्म किया अनशन,संसद मार्च के दौरान हंगामा
नई दिल्ली,20 जुलाई 2026। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग,जनपथ चौराहा,वॉर मेमोरियल,कर्तव्य पथ,विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे। संसद में घुसने की कोशिश की,जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई,मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोमवार को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अभिजीत दीपके से अनशन खत्म करने की अपील की,जिसके बाद उन्होंने जूस पीकर अपना उपवास समाप्त कर दिया।
सीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद नड्डा ने धरना खत्म करने का किया अनुरोध

सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से सोमवार को मुलाकात के बाद कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक उनका यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं,मंत्री नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया है। नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें। नड्डा ने ट्वीट किया, प्रदर्शनकारियों की ओर से आज सुबह पहली बार सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया और सुबह 11ः50 बजे से हमारी बातचीत चल रही है। बैठक अच्छे माहौल में हुई। उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ शुरुआती बातचीत विस्तार से हुई और शाम करीब 4 बजे उन्होंने मुझे एक लिखित ज्ञापन सौंपा। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपना धरना खत्म करने और हालात सामान्य करने में प्रशासन की मदद करने का आग्रह किया है। नड्डा से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल थे। उन्होंने नड्डा को तीन प्रमुख मांगों वाला अपना ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नड्डा ने उन्हें केवल इतना आश्वासन दिया है कि वे उचित मंच पर उनकी बात रखेंगे। दास ने कहा…‘मांगें पूरी होने तक प्रदर्शनकारी चैन से नहीं बैठेंगे। मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।’ हालांकि,पुलिस द्वारा रोके जाने की कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। दास ने कहा…’हमने जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। बैठक के दौरान हमने अपनी तीन मांगें रखीं। पहली, सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए। दूसरी, हमारी मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें,उन्हें या तो कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए या वे खुद इस्तीफा दें। जब तक उनका इस्तीफा नहीं हो जाता,तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। तीसरी मांग है कि नीट की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिनमें से 20 से ज़्यादा छात्रों की मौत हो चुकी है।’’
युवाओं पर कार्रवाई का हवाला देकर सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने का किया ऐलान
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हुई कथित बर्बरता को देखते हुए उन्होंने अनशन समाप्त नहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सरकार और पुलिस से छात्रों को संसद के समक्ष अपनी शिकायतें रखने की अनुमति देने की अपील की है। सोनम वांगचुक ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल से जारी हस्तलिखित संदेश में कहा कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें स्वयं अस्पताल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जाती। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इससे पहले सरकार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी। वांगचुक ने कहा कि उकसावे के बावजूद युवाओं ने जिस संयम और शांति का परिचय दिया है, उससे वे भावुक और प्रभावित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा प्रदर्शनकारी आगे भी धैर्य और सहनशीलता बनाए रखेंगे। उल्लेखनीय है कि वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में सुधार एवं अन्य मांगों को लेकर पिछले 23 दिनों से अनशन पर हैं। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि हमारी मांगों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, जंतर-मंतर (केरल हाउस के बाहर) पर विरोध प्रदर्शन जारी है।
मानसून सत्र के पहले दिन पेपर लीक और राम मंदिर चंदे का लेकर हंगामा…..
खरगे बोले…छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष सदन में जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और सरकार से जवाब मांगेगा। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकार, विश्वास और आवाज की रक्षा के लिए विपक्ष पूरी ताकत से अपनी बात रखेगा।
राम मंदिर चंदे की जांच की मांग…
खरगे ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं के दान में गड़बड़ी हुई है और इस मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि मंदिर निर्माण से जुड़े पूरे वित्तीय हिसाब को सार्वजनिक किया जाए,ताकि लोगों के मन में किसी तरह का संदेह न रहे।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने पेपर लीक के मामलों को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से अब तक देश में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘पेपर लीक के खिलाफ, बच्चे जंतर-मंतर पर बैठे हैं, लेकिन उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया जा रहा है। मोदी सरकार हमारे युवा की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला है। यह सरकार सत्ता में बने रहने के लायक नहीं है। हमने अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी का मुद्दा भी उठाया है। मोदी साहब को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि ट्रस्ट उन्होंने ही बनाया था।
छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र के खिलाफ : राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट-यूजी समेत विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और दोषियों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं। अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करना और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने सोमवार को एक वीडियो संदेश में कहा कि देश की सबसे बड़ी आबादी युवाओं की है, लेकिन सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का काम कर रही है। दिल्ली की सड़कों पर उतरे छात्र अपराधी नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें सम्मानजनक, निष्पक्ष और प्रभावी शिक्षा व्यवस्था मिले। कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन पूरी तरह जायज है।
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