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नई दिल्ली@पेपर लीक के विरोध में आज संसद मार्च करेगा सीजेपी

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अभिजीत दीपके ने समर्थकों से की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील

नई दिल्ली,19 जुलाई 2026। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रस्तावित मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए समर्थकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील करते हुए आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने का आह्वान किया है। दीपके ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी संदेश में कहा कि सभी समर्थक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या उकसावे से दूर रहें। उन्होंने कहा कि पार्टी का विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा, ‘मैं सभी समर्थकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील करता हूं। हमारा विरोध प्रदर्शन और मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी प्रकार की गड़बड़ी करता है या नकारात्मक नारेबाजी करता है, तो वह न तो सोनम सर (सोनम वांगचुक) का समर्थक है और न ही सीजेपी का। ‘ गौरतलब है कि पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। शनिवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।
इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर जारी धरना-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग है। पार्टी का आरोप है कि लगातार हो रही परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने में विफल रही है।
अस्पताल से देश के नाम सोनम वांगचुक का संदेश,कहा…आज आजादी का दूसरा आंदोलन प्लीज…’
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने शनिवार को उनके प्रदर्शन स्थल से हिरासत में ले लिया था, इस समय सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। अपनी भूख हड़ताल और आज प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ के संदर्भ में वांगचुक ने अपनी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो के माध्यम से देशवासियों के लिए एक भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश साझा किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस आंदोलन को ‘आजादी का दूसरा आंदोलन’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष भय मुक्त और अन्याय मुक्त भारत के निर्माण के लिए है। वांगचुक ने अपने संदेश में पेपर लीक जैसी समस्याओं को ‘अन्याय से आजादी’ और अपनी हिरासत को ‘डर से आजादी’ के रूप में परिभाषित करते हुए नागरिकों से इस संसद मार्च को बड़ी कामयाबी दिलाने का आग्रह किया है।
हिरासत और चिकित्सा प्रबंधन पर विवाद
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मों ने अस्पताल प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गीतांजलि का कहना है कि उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने नहीं दिया गया और पुलिस ने अस्पताल के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर भी रोक लगा दी, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक ने अस्पताल के भीतर से ही यह संदेश भेजा है, जो यह दर्शाता है कि वे अपनी हिरासत के बावजूद अपने आंदोलन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की विपक्षी दलों और नागरिक समाज द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है, जिसे वे असहमति को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
डॉक्टरों की निगरानी में सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य
सोनम वांगचुक वर्तमान में सफदरजंग अस्पताल की इमरजेंसी बिल्डिंग के 8वीं मंजिल पर कड़ी सुरक्षा के बीच भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा रविवार (19 जुलाई) की सुबह जारी किए गए मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि, लंबी भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर के अंगों और चयापचय पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के साथ-साथ एम्स (्रढ्ढढ्ढरूस्) दिल्ली के विशेषज्ञों की एक टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए 24 घंटे क्लिनिकल मॉनिटरिंग और निरंतर चिकित्सा हस्तक्षेप की अत्यंत आवश्यकता है। उनके रक्त पैरामीटर्स की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य जटिलता को रोका जा सके।
संसद मार्च और भविष्य की रणनीति
सोनम वांगचुक की हिरासत के बावजूद उनके समर्थकों और विभिन्न प्रदर्शनकारी समूहों ने अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया है। 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने का कार्यक्रम अभी भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है, जिसमें विभिन्न वर्ग और संगठन शामिल हो रहे हैं। वांगचुक का यह आह्वान कि यह ‘आजादी का दूसरा आंदोलन’ है, युवाओं और आम जनता में नई ऊर्जा भर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को किस तरह संभालता है और सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य उनके आगामी संघर्ष को किस दिशा में ले जाता है। पूरे देश की निगाहें दिल्ली की इस स्थिति और 20 जुलाई की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट बोला…वांगचुक को इलाज के लिए उठाना गलत नहीं…
सरकार और पुलिस से 3 दिन में मांगा जवाब,अंतरिम राहत देने से किया इनकार,गुरुवार को अगली सुनवाई होगी…
पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर कहा कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत गंभीर हो और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाए, तो इसे प्रथम दृष्टया गलत नहीं कहा जा सकता। हालांकि अदालत ने मामले के सभी तथ्यों पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा है। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक समेत विभिन्न मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले गई थी।


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