Breaking News

नई दिल्ली@मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा : टीएमसी के 20 बागी सांसदों को बुलाने के विरोध में विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट

Share


नई दिल्ली,19 जुलाई 2026 । संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को संसद भवन की एनेक्सी बिल्डिंग में सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई। करीब तीन घंटे चली बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी,तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित करीब 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के समूह को आमंत्रित किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए बैठक से सांकेतिक वॉकआउट किया।
बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष ने जताई आपत्ति : विपक्षी दलों का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के समूह को लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अभी अलग राजनीतिक दल के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में उन्हें सर्वदलीय बैठक में अलग समूह के रूप में आमंत्रित करना उचित नहीं था। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब इन सांसदों की सदस्यता और दलगत स्थिति से जुड़ा मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है,तब सरकार ने उन्हें किस आधार पर बैठक में बुलाया।
उद्धव गुट के छह सांसदों का मामला भी चर्चा में : लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए छह सांसदों को शिंदे गुट के साथ बैठने की अनुमति दिए जाने का मामला भी राजनीतिक चर्चा में है। बताया गया कि ये सांसद 22 जून को उद्धव गुट छोड़कर शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए थे। अब उनकी बैठक व्यवस्था शिंदे गुट के सांसदों के साथ की गई है। बैठक के बाद किरण रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र में विधायी कामकाज और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने और बहस में सहयोग की अपील की। वहीं विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह पेपर लीक, बेरोजगारी,महंगाई, विदेश नीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाएगा।
महुआ मोइत्रा ने दी वॉकआउट की जानकारी
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस,समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा,आम आदमी पार्टी,नेशनल कॉन्फ्रेंस,वाम दलों और शिवसेना उद्धव गुट सहित विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा के रिकॉर्ड में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या अभी भी 28 दिखाई जा रही है। वहीं,नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया नामक समूह के 20 सांसदों के कथित विलय को स्पीकर की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं लंबित हैं।
अलग बैठने की अनुमति और मान्यता पर विवाद
एक दिन पहले तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति दिए जाने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि इन सांसदों ने 15 जून को नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का दावा किया था। हालांकि,विपक्ष का कहना है कि अलग बैठक व्यवस्था देना और किसी समूह को औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसीलिए बागी सांसदों की संवैधानिक और संसदीय स्थिति को लेकर विवाद बना हुआ है।
91 वें संविधान संशोधन का दिया हवाला
महुआ मोइत्रा ने कहा कि 91 वें संविधान संशोधन के बाद किसी दल से अलग होकर स्वतंत्र गुट बनाने की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में आमंत्रित करने का आधार क्या था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस समूह को बैठक में बुलाकर लंबित संसदीय और कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया है।
रिजिजू बोले…सदन सभी सांसदों का…
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि संसद सभी निर्वाचित सदस्यों की है और सरकार का दायित्व सभी समूहों से संवाद करना है। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हस्ताक्षरित आवेदन देकर नए दल के रूप में मान्यता और अलग बैठक व्यवस्था की मांग की है। मामला स्पीकर के विचाराधीन है, लेकिन सांसदों का समूह अस्तित्व में है,इसलिए उन्हें सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया गया। रिजिजू ने कहा कि सदन को सुचारु रूप से चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। बैठक में सभी दलों ने अपने मुद्दे रखे और सरकार सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है।


Share

Check Also

कोलकाता@भाषा किसी भी देश की संस्कृति व विरासत की पहचान होती : अमित शाह

Share कोलकाता,19 जुलाई 2026। सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता के नाम आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज …

Leave a Reply