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बैकुंठपुर@ एयर कंडीशनर के कॉपर पाइप चोरी का खुलासा या अधूरी पटकथा?

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देवेन्द्र रजक से लेकर कबाड़ी नेटवर्क तक,कोरिया पुलिस की कहानी पर उठ रहे सवाल…
कोरिया पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उठे सवाल,आखिर असली कहानी क्या है?
जिला न्यायालय,बैंक और एसईसीएल तक पहुंचे चोर,लेकिन खुलासे के बाद भी जनता पूछ रही…असली खिलाड़ी कौन?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,08 जून 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले में एयर कंडीशनर के कॉपर पाइप चोरी मामले में पुलिस ने जिस आत्मविश्वास के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पीठ थपथपाई,उतनी ही तेजी से जिले में सवालों की आंधी भी उठ खड़ी हुई है, जिला एवं सत्र न्यायालय,यूनियन बैंक,छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक और एसईसीएल के साकेत सदन जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों से एसी के कॉपर पाइप चोरी होना कोई मामूली घटना नहीं थी, लेकिन अब चोरी से ज्यादा चर्चा उसके खुलासे की हो रही है। पुलिस के अनुसार 28 मई से 5 जून 2026 के बीच हुई चार अलग-अलग चोरी की घटनाओं में कुल 18 एसी के कॉपर पाइप चोरी किए गए थे,जिनकी कीमत लगभग 92 हजार रुपये बताई गई,पुलिस ने दावा किया कि आरोपी देवेन्द्र कुमार रजक उर्फ दीपू,एक अपचारी बालक, तथा चोरी का सामान खरीदने वाले नासिर खान, जय सिंह और मोहम्मद गफ्फार को पकड़ लिया गया है और पूरा माल बरामद कर लिया गया है, लेकिन जनता का सवाल है कि यदि कहानी इतनी सीधी और सरल थी तो फिर इतने दिनों तक जिले के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा आखिर किस भरोसे चल रही थी?
चोरों का निशाना कोई साधारण मकान नहीं था
आमतौर पर चोरी की घटनाएं सुनने में आती हैं तो लोग समझते हैं कि किसी बंद घर या दुकान को निशाना बनाया गया होगा, लेकिन यहां मामला अलग था,चोरों ने जिला न्यायालय को निशाना बनाया। बैंकों को निशाना बनाया। एसईसीएल के विश्रामगृह को निशाना बनाया,व्यंग्य यह है कि जहां आम आदमी न्याय मांगने जाता है,वहीं न्यायालय परिसर के एसी भी सुरक्षित नहीं रहे, जहां जनता अपनी जमा-पूंजी रखती है,वहां बैंकों के एसी भी चोरों की नजर से नहीं बच सके,और जहां सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है,वहां एसईसीएल का साकेत सदन भी चोरी का शिकार बन गया, ऐसे में लोग कह रहे हैं कि यदि सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों की यह हालत है तो आम नागरिकों को भगवान भरोसे ही रहना होगा।
देवेन्द्र रजक बना पूरी कहानी का नायक
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार देवेन्द्र कुमार रजक उर्फ दीपू को संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया गया, पूछताछ में उसने अपने एक अपचारी साथी के साथ मिलकर जिला न्यायालय और साकेत सदन से कॉपर पाइप चोरी करना स्वीकार कर लिया,इसके अलावा उसने बैंकों में हुई चोरी की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले ली, अब जिले में व्यंग्य यह चल रहा है कि पुलिस की कहानी में देवेन्द्र रजक ऐसा सर्वगुण संपन्न पात्र बनकर उभरा है जो कभी साथी के साथ चोरी करता है,कभी अकेले चोरी करता है और अंत में पूरा मामला भी स्वीकार कर लेता है,लोग पूछ रहे हैं कि क्या वास्तव में पूरा नेटवर्क इतना छोटा था या फिर कहानी का कुछ हिस्सा अभी भी पर्दे के पीछे है?
कबाड़ी बने कहानी के सह-कलाकार- पुलिस ने चोरी का सामान खरीदने वाले तीन लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं,इनमें नासिर खान,जय सिंह और मोहम्मद गफ्फार शामिल हैं,यहीं से चर्चा का दूसरा अध्याय शुरू होता है,लोगों का कहना है कि चोरी का असली बाजार खरीददारों के कारण ही चलता है,यदि चोरी का माल खरीदने वाला न हो तो चोरों की आधी हिम्मत वैसे ही खत्म हो जाए,लेकिन जिले के लोगों का सवाल है कि आखिर इन खरीददारों तक चोरी का सामान पहुंचा कैसे? क्या पहली बार ऐसा हुआ? क्या इनके पुराने रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या कबाड़ कारोबार की नियमित निगरानी होती है? व्यंग्य में लोग कह रहे हैं कि जिले में कबाड़ी चोरी के हर बड़े मामले में चर्चा में आ जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के बाद फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
पुलिस की सफलता पर सवाल नहीं,प्रस्तुति पर सवाल जरूर- यह भी सच है कि चोरी का माल बरामद हुआ है और आरोपी पकड़े गए हैं,इसके लिए पुलिस की टीम की मेहनत को नकारा नहीं जा सकता,पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में थाना सिटी कोतवाली,चरचा,सोनहत और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने काम किया और मामले तक पहुंची, लेकिन जनता का कहना है कि जब मामला इतना बड़ा था तो खुलासे में भी उतनी ही पारदर्शिता दिखाई जानी चाहिए थी,सिर्फ यह बताना कि माल बरामद हो गया, काफी नहीं है,यह भी बताना जरूरी है कि माल कहां मिला, किस परिस्थिति में मिला और पूरे नेटवर्क की असली तस्वीर क्या थी।
बरामदगी कहां से हुई…यही सबसे बड़ा सवाल…
पुलिस ने बताया कि चोरी का पूरा माल बरामद कर लिया गया है, लेकिन आम नागरिक पूछ रहे हैं कि बरामदगी आखिर कहां से हुई? किसके घर से हुई? किस गोदाम से हुई? किस दुकान से हुई? किस परिसर से हुई? यदि सामान किसी के कब्जे से मिला तो उस स्थान का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया? यही कारण है कि पटना और बैकुंठपुर क्षेत्र में चर्चा है कि पुलिस ने खुलासा तो किया लेकिन कहानी के कुछ पन्ने जनता को पढ़ने नहीं दिए।
कॉपर पाइप चोरी कोई बच्चों का खेल नहीं
कॉपर पाइप निकालना आसान काम नहीं होता,एसी की संरचना समझना पड़ती है, पाइप काटने पड़ते हैं, उपकरणों का उपयोग करना पड़ता है, इसलिए लोगों का मानना है कि यह कोई अचानक की गई चोरी नहीं थी, यह सुनियोजित अपराध था, ऐसा अपराध जिसमें पहले रेकी की गई होगी, सुरक्षा व्यवस्था को समझा गया होगा और फिर मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया गया होगा, लेकिन पुलिस की कहानी में पूरा मामला ऐसा दिखाई देता है मानो कुछ युवकों ने घूमते-घूमते एसी देखे और कॉपर पाइप निकाल लिए, यहीं पर लोगों को कहानी अधूरी लग रही है।
जिले में बढ़ रही चिंता…
कोरिया जिले में पहले से ही चोरी की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है,कई मामलों में आज तक पूर्ण खुलासा नहीं हो पाया, ऐसे में जब न्यायालय, बैंक और एसईसीएल जैसी संस्थाएं भी चोरों के निशाने पर आ जाएं तो स्वाभाविक रूप से जनता की चिंता बढ़ जाती है, लोगों का मानना है कि यदि चोरी करने वाले और चोरी का माल खरीदने वाले दोनों के खिलाफ कठोर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं आगे भी जारी रहेंगी।
सवाल अभी भी बाकी हैं…
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफलता का दावा कर दिया है,देवेन्द्र रजक,नासिर खान,जय सिंह, मोहम्मद गफ्फार और एक अपचारी बालक के नाम भी सामने आ चुके हैं,चोरी का सामान भी बरामद बताया जा रहा है, लेकिन जनता के बीच आज भी कुछ सवाल तैर रहे हैं क्या पूरी सच्चाई सामने आ गई है? क्या चोरी का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ है? क्या बरामदगी की पूरी जानकारी सार्वजनिक होगी? और सबसे बड़ा सवाल क्या यह वास्तव में कॉपर पाइप चोरी का पूर्ण खुलासा है,या फिर वह संस्करण है जिसे जनता के सामने प्रस्तुत करना सुविधाजनक समझा गया? जब तक इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता,तब तक कोरिया पुलिस की यह सफलता तालियों से ज्यादा बहस, चर्चा और संदेह का विषय बनी रहेगी।


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