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कोरिया/रायपुर@ देहदान कर अमर हुए समाजसेवी गणेश दास मानिकपुरी,अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मेडिकल कॉलेज रायपुर को सौंपी गई पार्थिव देह

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कोरिया जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी के पिता गणेश दास मानिकपुरी नहीं रहे,देहदान कर मानवता को दे गए अमर संदेश
समाजसेवा की अंतिम मिसाल,गणेश दास मानिकपुरी की पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज को दान,नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
जीवनभर समाज की सेवा,मृत्यु के बाद भी मानवता के नाम देहदान…गणेश दास मानिकपुरी को भावभीनी विदाई
रामायण के प्रख्यात टीकाकार एवं समाजसेवी गणेश दास मानिकपुरी पंचतत्व में विलीन, देहदान से रचा सेवा का नया अध्याय
कोरिया/रायपुर 23 जुलाई 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले के जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी के पिता,प्रख्यात समाजसेवी,रामायण के प्रख्यात टीकाकार एवं देहदान संकल्पी श्री गणेश दास मानिकपुरी का बुधवार सुबह रायपुर स्थित उनके निवास दोन्दे खुर्द में आकस्मिक निधन हो गया, उनके निधन से सामाजिक,सांस्कृतिक, साहित्यिक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया, समाज ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया,जिसने अपना संपूर्ण जीवन सेवा, संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मूल्यों के लिए समर्पित कर दिया था, उनके निधन की सूचना मिलते ही रायपुर स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों,जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों,पत्रकारों,साहित्यकारों,सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में शुभचिंतकों का तांता लग गया। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देते हुए उनके व्यक्तित्व और समाज के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।
प्रदेशभर में शोक,33 जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि– स्व. गणेश दास मानिकपुरी के निधन का समाचार मिलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर दौड़ गई, छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पदस्थ जनसंपर्क अधिकारियों सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, साहित्यकारों तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शोक संदेश जारी कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, सभी ने एक स्वर में कहा कि श्री मानिकपुरी का निधन केवल उनके परिवार की नहीं,बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है, उनका जीवन समाजसेवा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण था।
रामायण के प्रख्यात टीकाकार के रूप में बनाई विशिष्ट पहचान-गणेश दास मानिकपुरी केवल समाजसेवी नहीं थे,बल्कि वे रामायण के प्रख्यात टीकाकार के रूप में भी व्यापक सम्मान प्राप्त कर चुके थे, उन्होंने वर्षों तक धार्मिक आयोजनों, सत्संगों एवं सामाजिक कार्यक्रमों में रामायण की सरल, सहज और जीवनोपयोगी व्याख्या प्रस्तुत कर लोगों को धर्म के साथ-साथ नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया,उनकी वाणी में केवल धार्मिक प्रवचन नहीं,बल्कि समाज को सही दिशा देने वाली जीवनदृष्टि होती थी,यही कारण था कि वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से आमंत्रित किए जाते थे।
स्पष्टवादिता, सादगी और सामाजिक सरोकारों से अर्जित किया सम्मान-श्री मानिकपुरी की सबसे बड़ी पहचान उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और निर्भीक व्यक्तित्व था,उन्होंने कभी दिखावे की समाजसेवा नहीं की,बल्कि अपने कार्यों के माध्यम से समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित किया,गरीब, जरूरतमंद और समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के लिए वे हमेशा आगे रहते थे। सामाजिक सरोकारों से जुड़े हर विषय पर उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी, उनके विचारों ने अनेक लोगों को सकारात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
मृत्यु से पहले ही लिया था देहदान का संकल्प- समाजसेवा को उन्होंने केवल अपने जीवन तक सीमित नहीं रखा,उन्होंने अपने जीवनकाल में ही एक ऐसा निर्णय लिया,जो मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का माध्यम बन गया, उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज),रायपुर को अपनी पार्थिव देह दान करने का विधिवत संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक सहमति-पत्र भी भर रखा था,उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का पूर्ण सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज रायपुर को दान कर दी,यह निर्णय उपस्थित सभी लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायी क्षण बन गया।
मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा का संदेश- श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि अधिकांश लोग समाजसेवा की बातें करते हैं,लेकिन श्री गणेश दास मानिकपुरी ने अपने जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा का मार्ग चुना,देहदान चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है,मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कराने में ऐसे दान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, उनके इस निर्णय ने समाज को यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी मानव जीवन दूसरों के लिए उपयोगी बन सकता है।
मानवता के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण-श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पत्रकारों और समाजजनों ने कहा कि श्री मानिकपुरी ने अपने जीवन में सेवा,त्याग और मानवता की जो मिसाल स्थापित की, उसे उन्होंने अपने अंतिम निर्णय से और भी ऊंचाई प्रदान कर दी,वक्ताओं ने कहा कि देहदान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानव कल्याण और चिकित्सा विज्ञान के विकास में अमूल्य योगदान है। ऐसे निर्णय समाज में जागरूकता पैदा करते हैं और लोगों को देहदान जैसे पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।
विजय मानिकपुरी के प्रति संवेदनाएं व्यक्त- श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने कोरिया जिले के जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी एवं उनके समस्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, सभी ने कहा कि एक पिता का साया खोना अपूरणीय क्षति है, लेकिन श्री गणेश दास मानिकपुरी अपने विचारों, संस्कारों और सेवा कार्यों के माध्यम से सदैव समाज के बीच जीवित रहेंगे।
समाज को दे गए अमर संदेश- स्व. गणेश दास मानिकपुरी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति का मूल्य उसके पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों से तय होता है, उन्होंने अपने जीवन में धर्म को आडंबर नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया, समाजसेवा को दायित्व माना और मृत्यु के बाद देहदान कर यह सिद्ध कर दिया कि मानव जीवन का अंतिम उद्देश्य भी मानवता की सेवा ही हो सकता है, उनकी विदाई केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि समाजसेवा के एक ऐसे युग का अवसान है, जिसने अपने कर्मों से हजारों लोगों को प्रेरित किया। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी, विचार, समाजसेवा, रामायण की व्याख्याएं और देहदान का महान निर्णय आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।


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